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भारत के पिनाका का दुनिया पर छाया खुमार, आर्मेनिया के बाद अब ये देश भी कतार में, रेंज बढ़ाने पर काम जारी

India's Pinaka casts a shadow on the world, after Armenia, now this country also in Qatar, work on range increase continues

Written and reported by - Anshuman Anand 

नई दिल्ली: पिनाक यानी भगवान शिव का वह धनुष जिससे उन्होंने असुरों के त्रिपुर को नष्ट किया था और उसी की तर्ज पर बना पिनाक भारतीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए सन्नद्ध है और यह इतना प्रभावशाली है कि दुनिया भर के देश इसे खरीदने के लिए इच्छुक हो रहे हैं। भारत के पास मौजूद पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर जिसकी मांग बढ़ती जा रही है। पहले तो यूरोपीय देश आर्मेनिया ने भारत से पिनाक सिस्टम खरीदा। जिसके बाद अब दक्षिण अमेरिका के दो देशों ने पिनाका की खरीद में रुचि दिखाई है। ऐसी संभावना है कि जल्द ही इन देशों को पिनाका की सप्लाई का रास्ता साफ हो सकता है। इसके अलावा पिनाका पर फ्रांस की भी नजर है। फ्रांसीसी सेना पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर का मूल्यांकन कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि फ्रांस भी सीमित संख्या में पिनाक सिस्टम की खरीदारी भारत से कर सकता है। 

फिलहाल भारत के पास मौजूदा पिनाक रॉकेट सिस्टम 75 से 80 किलोमीटर तक के लक्ष्यों पर हमला कर सकता है। लेकिन इसकी रेंज जल्दी ही बढ़ाई जा सकती है। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि डीआरडीओ अब लंबी दूरी के रॉकेट पर काम कर रहा है जिन्हें भारतीय सेना के पास पहले से ही सेवा में मौजूद लॉन्चरों के एक ही सेट से दागा जा सकता है और इससे लागत बचाने में मदद मिलेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ऐसे रॉकेट विकसित कर रहा है जो 120 किलोमीटर और 200 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य पर वार करने में सक्षम होंगे। यानी वर्तमान 75 से 80 किलोमीटर रेंज से यह नया रॉकेट दो से ढाई गुना ज्यादा शक्तिशाली होगा और दुश्मनों के लिए ज्यादा घातक साबित होगा। यही कारण है कि दुनिया भर के देश पिनाक रॉकेट सिस्टम में रुचि दिखा रहे हैं। 

पिनाका की खासियत 

 इस सिस्टम की सफलता भारतीय सार्वजनिक और निजी रक्षा कंपनियों के बीच के सहयोग को भी दर्शाता है क्योंकि इसका निर्माण निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। हालांकि इसका पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन डीआरडीओ ने तैयार किया है। लेकिन इसके अलग अलग हिस्से अलग अलग कंपनियों द्वारा बनाए जाते हैं। जहां इसका लॉन्चर वाहन टाटा समूह और लार्सन एंड टूब्रो ने तैयार किया है, वहीं इसके रॉकेट्स सोलर इंडस्ट्रीज और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाए गए हैं। पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से 44 सेकंड में 12 हाई एक्सप्लोसिव रॉकेट को फायर किया जा सकता है। यह एक पूर्ण मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। प्रत्येक पिनाका बैटरी यानी कि एक यूनिट में छह लांचर वाहन होते हैं और प्रत्येक में 12 रॉकेट होते हैं। इसमें कमांड पोस्ट, फायर कंट्रोल कंप्यूटर और DIGICORA MET रडार भी ट्रकों पर ही माउंट होते हैं। पिनाका के छह लांचरों की एक बैटरी 1000 मीटर बाई 800 मीटर के क्षेत्र को पूरी तरह से बर्बाद कर सकती है। सेना आमतौर पर एक क्षेत्र में एक बैटरी तैनात करती है जिसमें कुल 72 रॉकेट होते हैं।

पिनाका में कई देशों की रूचि 

 आर्मेनिया पहले ही पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांच सिस्टम खरीद चुका है। जहां यह सफलतापूर्वक काम कर रहा है। उसकी इसी सफलता से प्रभावित होकर दुनिया के दूसरे देश भी पिनाका सिस्टम में रुचि दिखा रहे हैं। अपनी स्वदेशी जरुरतों और विदेशी खरीदारों की रुचि को देखते हुए भारतीय कंपनियां लगातार पिनाका सिस्टम बनाने में जुटी हुई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल पिनाका रॉकेट लॉन्चर की लगभग 5000 मिसाइलों का उत्पादन किया जा रहा है। जिससे हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करने में हथियारों की कमी ना पड़े।

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