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भारत तैयार कर रहा है अमेरिका के बी-2 बॉम्बर का बाप

22 जून 2025 को जब अमेरिका के बी-टू बॉम्बर्स ने ईरान के फोर्डो-इस्फहान एवं नतांज परमाणु संयंत्रों पर जीबीयू-57 "बंकर बस्टर" बम गिराया, तो पूरी दुनिया में अमेरिका की बॉम्बिंग पावर की धूम मच गई। लेकिन अब सुनिए उससे भी धमाकेदार खबर। वो ये है कि भारत के पास जल्दी ही अमेरिकी से भी बेहतर बॉम्बिंग पावर तैयार होने वाली है। देश को ये सफलता दिलाएगी, दिवंगत पूर्व महामहिम राष्ट्रपति और संसार के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों में से एक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के निर्देशन में विकसित की गई अग्नि मिसाइल प्रणाली। 
  भारत ने बंकर-भेदी वारहेड विकसित करने का फैसला कर लिया है। ये वारहेड अग्नि मिसाइल प्रणाली के एक संस्करण का हिस्सा होंगे, जो दुश्मन के उन महत्वपूर्ण ठिकानों को भेदने में सक्षम होंगे जो जमीन के काफी नीचे किलेबंद संरचनाओं में स्थित हैं और जिन्हें पारंपरिक हथियारों से नष्ट नहीं किया जा सकता। यह कदम पहले से योजना में था, लेकिन ईरान पर अमेरिका के बंकर बस्टर बमों की कामयाबी को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को और तेज कर दिया गया है। 
लेकिन अमेरिका और भारत की बॉम्बिंग में एक फर्क होगा। वह ये है कि अमेरिका के बंकर-बस्टर जीबीयू-57 बमों को गिराने के लिए B2 स्टील्थ बॉम्बर विमान की जरुरत पड़ी थी। लेकिन भारत अपनी अग्नि मिसाइल के वारहेड के रूप में बंकर बस्टर बम लगाए जाएंगे।  यानी कि भारत को अगर दुश्मन देश में स्थित किसी बंकर को नष्ट करना हो, तो वहां अपने विमान भेजने की जरुरत नहीं पड़ेगी। बल्कि उसको घर बैठे ध्वस्त कर सकता है, क्योंकि भारत अपनी जिस अग्नि मिसाइल सिस्टम पर बंकर बस्टर बम लगाना चाहता है, वह बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी शुरुआती रेंज 700 किलोमीटर से अधिकतम  10,000 किलोमीटर तक है। 
फिलहाल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के एक संशोधित संस्करण को विकसित कर रहा है। हालांकि इससे पहले भी अग्नि मिसाइलें 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम थीं। लेकिन इसका नया संस्करण एक पारंपरिक हथियार होगा जो 7,500 किलोग्राम वजनी बंकर-भेदी वारहेड ले जा सकेगा।  यह मिसाइल दुश्मन की उन कठोर संरचनाओं को नष्ट करने के लिए बनाई जा रही है जो कंक्रीट और स्टील की मोटी परतों के नीचे स्थित होती हैं। यह मिसाइल जमीन के 80 से 100 मीटर नीचे तक घुसकर विस्फोट कर सकेगी। जिसकी वजह से नए बंकर-भेदी वारहेड दुश्मन के कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर, मिसाइल साइलो और अन्य सैन्य ढांचों को नष्ट करने में सक्षम होंगे। 
खबर है कि अग्नि-5 के दो नए संस्करणों पर काम किया जा रहा है। 
इनमें से एक वर्जन हवाई विस्फोटक (एयरबर्स्ट) वारहेड से लैस होगा, जो रनवे और दुश्मन के टैंकों जैसे सतह पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाएगा। 
दूसरा संस्करण गहराई में स्थित किलेबंद भूमिगत ढांचों को भेदने में सक्षम होगा। जैसा कि अमेरिका ने ईरान में किया। 
हालांकि इन बंकर बस्टर मिसाइलों की मारक क्षमता 2,500 किलोमीटर तक ही सीमित रहेगी, जबकि मूल अग्नि-6 की रेंज 10,000 किलोमीटर से अधिक थी। लेकिन बंकर बस्टर बमों के 7,500 किलोग्राम वजन के कारण इसकी रेंज घट गई। फिर भी यह चीन पाकिस्तान जैसे हमारे घोषित शत्रुओं को बर्बाद करने में पूरी तरह सक्षम है। 
अग्नि मिसाइलों की बहुत तेज स्पीड इसको बेहद खतरनाक बनाती है। ये मिसाइलें मैक 8 से मैक 20 की गति तक पहुंचने में सक्षम होंगी, जिससे इन्हें हाइपरसोनिक हथियारों की श्रेणी में रखा जाएगा और इनकी पेलोड क्षमता भी काफी अधिक होगी। यानी कि अपने भारी भरकम बंकर बस्टर बम के साथ अग्नि मिसाइल भीषण तेजी से आकर धरती के अंदर घुस जाएगी और बेहद अंदर जाकर विस्फोट करेगी।  जिससे सभी भूमिगत संरचनाएं धराशायी हो जाती हैं। 

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