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बड़बोले ट्रंप सिर्फ कठपुतली हैं, किसके हाथों में है उनकी डोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को बहुत बड़ा तुर्रम खां समझते हैं। लेकिन ट्रंप जानते नहीं है कि वो सिर्फ एक कठपुतली हैं, जिनकी डोर पुतिन और मोदी जैसे अनुभवी नेताओं के हाथ में है। 
सोमवार की देर रात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक हुई। जिसके बाद ट्रंप ने ऐलान किया है कि वह यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों के बीच आमने-सामने की बातचीत की व्यवस्था करेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि वोलोडिमिर जेलेंस्की और सात यूरोपीय नेताओं के साथ वाइट हाउस में बैठक के बाद उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से त्रिपक्षीय बैठक पर बात की है। मैंने राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच बैठक की व्यवस्था शुरू कर दी है, जिसके लिए एक स्थान निर्धारित किया जाएगा। 
ट्रंप ने यह भी बताया कि वह खुद इस बैठक की मेजबानी करेंगे और रूस-यूक्रेन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ लगातार कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि आम तौर पर ट्रंप लगातार बड़बोलापन दिखाते हैं। लेकिन इस बार अगर वह यूक्रेन और रूस को एक साथ वार्ता की मेज पर बिठाने के लिए तैयार हो गए, तो यह उनकी बड़ी कामयाबी होगी। 
लेकिन ट्रंप को इतनी बड़े ऐलान की ताकत यूं ही नहीं मिल गई है। यूक्रेन-रूस वार्ता का ऐलान करने से पहले ट्रंप ने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन घंटे लंबी बैठक हुई थी। हालांकि इस बैठक में ट्रंप और पुतिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। लेकिन यह तय हो गया कि अमेरिका और रूस एक रास्ता खोलना चाहते हैं। 
लेकिन जानते हैं, यूक्रेन में शांति स्थापित करने की ये जो सारी कवायद हो रही है, उसके पीछे प्रेरक शक्ति भारत है। इस बात का संकेत इससे मिलता है कि ट्रंप से बात करने के तुरंत बाद पुतिन ने हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन मिलाया और उन्हें ट्रंप से हुई बातचीत का पूरा अपडेट दिया। दोनों नेताओं के बीच यह चर्चा सोमवार शाम को हुई। यानी ट्रंप-जेलेंस्की की बैठक से ठीक पहले उनकी बात हुई। पिछले दो हफ्तों में ये मोदी-पुतिन के बीच दूसरी सीधी बातचीत थी। पिछली बार 8 अगस्त को पुतिन ने फोन करके मोदी को यूक्रेन युद्ध से जुड़े हालात बताए थे।  लेकिन इस बार का कॉल इसलिए और ज्‍यादा मायने रखता है क्योंकि अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से करीब तीन घंटे लंबी मीटिंग करने के बाद पुतिन ने सबसे पहले भारत को ही फोन किया और पूरा हाल बताया। 
यह बातचीत दिखाती है क‍ि पुत‍िन भारत को ‘ग्लोबल स्टेकहोल्डर’ मानते हैं। पुतिन यह मैसेज देना चाहते हैं कि रूस-भारत रिश्ता अलग स्तर पर है। रूस, भारत को टॉप-टीयर स्ट्रैटेजिक पार्टनर मानता है और किसी तीसरे चैनल पर भरोसा करने की बजाय मोदी जी को सीधे भरोसे में लेता है। पुतिन ने यह संदेश दिया कि भारत को साइडलाइन नहीं किया जा सकता, बल्कि उसे भी अपडेट रखना जरूरी है। 
पीएम मोदी लगातार युद्ध खत्म करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात करते हैं और अब पुतिन ने मोदी को फोन करके भारत की शांति पहल और नैतिक समर्थन को अहमियत दी, साथ ही पश्चिमी दुनिया को भी संकेत दिया कि भारत के साथ रूस का पुल मजबूत है। पुतिन का पीएम मोदी को कॉल करना भारत की मध्यस्थ की भूमिका को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करता है। 
साथ ही यह भी संदेश दिया गया कि अमेरिका और रूस जैसे बड़े खिलाड़ी भी भारत को मीटिंग के बाद पहला फोन करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया में कहीं भी कुछ भी हो रहा हो, उसमें भारत का दखल जरुर होता है। चाहे परोक्ष रुप से या फिर अपरोक्ष रुप से। ट्रंप-पुतिन बातचीत का असर भारत के कूटनीतिक वजन को और बढ़ा रहा है। भारत अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि बड़े फैसलों में परोक्ष रूप से शामिल पार्टनर की तरह उभर रहा है। 

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