नई दिल्ली - न्यूक्लियर ट्रायड यानी परमाणु त्रयी हुई और मजबूत रक्षा मंत्री ने किया परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात का जलावतरण हिंद महासागर में चीन के खतरनाक मंसूबों पर कसेगी लगाम।
न्यूक्लियर ट्रायड यानी परमाणु त्रयी हासिल करना हमारे देश का पुराना सपना था।इसका मतलब होता है तीनों स्थानों यानी स्थल,जल और आकाश से परमाणु हमला और बचाव करने की क्षमता हासिल करना । जिसमें से स्थल और वायु क्षेत्र से परमाणु हमला करने में तो भारत ने पहले ही सफलता हासिल कर ली थी । लेकिन हमारी जल सेना की परमाणु हमलावर क्षमता उतनी मजबूत नहीं थी । जिसे सशक्त बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने लगातार प्रयास कर रही थी और इसके परिणाम अब दिखाई भी देने लगे हैं।
29 अगस्त यानी गुरुवार को विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल से लैस पनडुब्बी 'आईएनएस अरिघात' को नौसेना में शामिल किया। जिससे ना केवल हमारी समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ हुई है। बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिली है । आईएनएस अरिघात' पर स्वदेशी सिस्टम और उपकरण लगे हैं, जिनकी संकल्पना से डिजाइन तक और निर्माण से एकीकरण तक भारतीय वैज्ञानिकों, उद्योग और नौसेना कर्मियों द्वारा किया गया है।
INS अरिघात का वजन 6000 टन है और इसकी लंबाई करीब 113 मीटर है। इसकी चौड़ाई 11 मीटर और ड्राफ्ट 9.5 मीटर है। यह पानी के भीतर 980 से 1400 फीट की गहराई तक जा सकती है। आईएनएस अरिघात की खासियत यह है कि यह महीनों तक समुद्र की गहराई में छिपी रह सकती है। जिससे दुश्मन इसकी तरफ से बेखबर हो जाता है।इसकी खासियत यह भी है कि यह दुश्मन द्वारा किए गए अचानक हमले से बच सकता है और जवाबी हमला करने में सक्षम है। यह समंदर में घात लगाकर दुश्मनों को खोज-खोज कर सफाया करने में सक्षम है। जिसके लिए आईएनएस अरिघात में 12 की संख्या में के-15 सागरिका सबमैरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) तैनात की गई हैं ।जिसकी रेंज 750 किलोमीटर है। इसके अलावा आईएनएस अरिघात में 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली चार K4 मिसाइलें भी लगी हैं। इसके अलावा इसमें 21 इंच के छह टॉरपीडो भी लगे हैं । साथ ही इस पनडुब्बी में कई टॉरपीडो ट्यूब हैं जिनका उपयोग टॉरपीडो, मिसाइल या समुद्री माइंस को तैनात करने के लिए किया जा सकता है।सबसे खास बात है.आईएनएस अरिहंत का इंजन जिसे चलाने के लिए पनडुब्बी के अंदर ही एक न्यूक्लियर रिएक्टर भी लगाया गया है । जिससे कि यह परमाणु ऊर्जा का उपयोग करके इस सतह पर 28 किमी/घंटा और पानी के भीतर 44 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती है। यह अरिहंत क्लास की दूसरी परमाणु पनडुब्बी है। जो कि भारत के न्यूक्लियर डेटरेंस फोर्स का अहम हिस्सा है ।
इसके नौसेना में शामिल होने से भारत के न्यूक्लियर ट्रायड यानी परमाणु त्रयी को मजबूती मिली है। .जिसका सपना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था। यह वाजपेयी जी की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा था कि उस समय की केंद्र सरकार देश की परमाणु नीति का और परमाणु अस्त्रों को तैनात करने के विकल्प का पुनर्मूल्यांकन करने को तैयार हो गई थी. तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने भी सेना की मांग सामने रखी थी ।उन्होंने कहा था कि दुश्मन देशों की परमाणु अस्त्रों और मिसाइलों की बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार सेना की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता विकसित करे और सेना के तीनों अंगों को परमाणु क्षमता से लैस करे।
अरिघात संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है, दुश्मनों का संहार करने वाला । आईएनएस अरिघात को नौसेना को सौंपने के बाद भारतीय वैज्ञानिक आईएनएस अरिदमन को तैयार करने में जुट गए हैं जिसे अगले साल कमीशन कर दिया जाएगा यानी नौसेना को सौंप दिया जाएगा।
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