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राफेल और सुखोई दोनों पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार

फ्रांस से आया राफेल जल्दी ही भारतीय ब्रह्मास्त्र से लैस होगा, यानी उसपर ब्रह्मोस नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल लगा दी जाएगी। जिससे राफेल पाकिस्तान के लिए और घातक हो जाएगा। राफेल पर ब्रह्मोस लगना अपने आप में बड़ी खबर तो है ही, लेकिन इससे ज्यादा बड़ी खबर इससे पीछे है। जो कि भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और पश्चिमी देशों के उपर मजबूत भरोसे को बताती है।  

हमारा देश हमेशा से हथियारों का बड़ा खरीदार रहा है। जो कि फ्रांस जैसे पश्चिमी देशों से हथियार खरीदता रहा है। हाल ही में भारत ने फ्रांस से राफेल विमान मंगवाए हैं और 26 राफेल मरीन का भी ऑर्डर दिया है। इससे पहले भी भारतीय वायुसेना में फ्रांस से खरीदे हुए मिराज जैसे विमान सेवा दे रहे हैं। लेकिन फ्रांस जैसे देश पहले भारत को अपना ग्राहक मात्र समझते थे। लेकिन अब उनकी मानसिकता में बदलाव आया है और वो भारत को अपने डिफेंस पार्टनर का दर्जा देने लगे हैं। 
क्योंकि एक वक्त था जब भारत ने फ्रांसीसी मिराज 2000 विमानों में भारतीय मिसाइल लगाने के लिए फ्रांस की थालेस कंपनी और दस्सॉ एविएशन से उनके प्रोडक्ट का सोर्स कोड मांगा था। लेकिन तब इन कंपनियों ने  Intellectual Property Rights का हवाला देते हुए सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया था। 
 लेकिन अब वक्त बदल गया है। भारत ने इस बार राफेल विमानों में भारतीय रक्षा कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रह्मोस मिसाइल लगाने के लिए सोर्स कोड मांगा। इस बार फ्रांस ने इनकार नहीं किया है और सोर्स कोड उपलब्ध कराने के लिए हामी भर दी है। जिसके बाद राफेल विमान ब्रह्मोस नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइलों से लैस होकर और भी घातक हो जाएंगे। 
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमान हैं। जल्दी ही नौसेना के पास 26 राफेल-M विमान आने वाले हैं। यानी कि भारत के पास कुल 72 राफेल विमान हो जाएंगे। राफेल विमानों की गिनती दुनिया के अत्याधुनिक युद्धक विमानों में होती है। इस पर जिस  ब्रह्मोस-NG सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को तैनात करने की तैयारी चल रही है, वह 300 किलोमीटर तक मार करने वाली और 4500 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ने वाली  मिसाइल है। जो कि दुश्मन पर सटीक और विध्वंसक वार करने में सक्षम है। दस्सॉ एविएशन ने भारत की इस स्वदेशी हथियार प्रणाली को राफेल में एकीकृत करने की मंजूरी दे दी है। जिससे "मेक इन इंडिया" को नई ताकत मिलेगी और भारत की रणनीतिक क्षमता और भी आत्मनिर्भर होगी। 
BrahMos-NG  मिसाइलों का उत्पादन उत्तर प्रदेश के लखनऊ के डिफेंस कॉरिडोर में स्थित ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर में हो रहा है। जो कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का एक हल्का एवं उन्नत वर्जन है, जिसे खासतौर पर आधुनिक फाइटर जेट्स और मोबाइल प्लेटफॉर्म्स से लॉन्च करने के लिए विकसित किया जा रहा है। ब्रह्मोस-NG का वजन 1.5 टन के आस पास है। जो कि मूल ब्रह्मोस मिसाइल से लगभग 40 प्रतिशत कम है। इसलिए यह तेजस Mk1A, राफेल, मिराज-2000, सुखोई-30MKI जैसे फाइटर जेट्स से आसानी से दागी जा सकती है. ब्रह्मोस-NG की स्ट्राइक एक्यूरेसी जबरदस्त है। यानी कि यह दुश्मन के इलाके में एक पानी के ग्लास तक को निशाना बना सकता है। इसका डिज़ाइन स्टील्थ कैरेक्टरिस्टिक्स के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे यह छिपा रहता है और दुश्मन के रडार में पकड़ में नहीं आता।  भारत के फाइटर जेट पर दो मिसाइलें एक साथ ले जाई जा सकती हैं, जिससे एक ही उड़ान में दो अलग-अलग टारगेट्स पर हमला संभव हो सकेगा. यह मिसाइल एयर-लॉन्च, लैंड-बेस्ड, शिप-बेस्ड वर्जन में उपलब्ध है। 
राफेल के अलावा भी भारत ने  अपने Su-30MKI लड़ाकू विमान को इजरायली I-Derby ER मिसाइल से लैस कर दिया है। जिससे Su-30MKI की मारक क्षमता काफी बढ़ गई है। इजरायली I-Derby ER और स्वदेशी Astra Mk-1 मिसाइलों से लैस होने के बाद अब Su-30MKI लड़ाकू विमान, 100 से 110 किमी की दूरी तक दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकते हैं।
भारत को इस हथियार की काफी जरूरत थी। ऐसा इसलिए क्योंकि 27 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद, पाकिस्तान वायुसेना के F-16 विमानों ने AIM-120C AMRAAM मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय Su-30MKI विमानों को 100-120 किमी की दूरी से निशाना बनाने की कोशिश की थी। उस वक्त भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ रूसी R-77 मिसाइलें थीं। इन मिसाइलों का प्रभावी रेंज करीब 80 किलोमीटर होता है। इसके बाद से भारत को एडवांस रेंज की मिसाइलों की जरूरत थी, जिसमें इजरायल ने मदद की है। I-Derby ER के जरिए भारतीय वायुसेना ने अपनी BVR (Beyond Visual Range) क्षमताओं को एडवांस स्तर तक पहुंचा दिया है। भारत ने 2020 के बाद इजरायली मिसाइल को सुखोई लड़ाकू विमान में लगाने की शुरूआत की थी और धीरे धीरे ज्यादातर सुखाई विमानों को इन दोनों मिसाइलों से लैस कर दिया गया। I-Derby ER एक लॉंग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। इस मिसाइल ने Su-30MKI लड़ाकू विमान की अटैक और डिफेंस, दोनों की क्षमताओं को बढ़ाया है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के पास अब स्वदेशी Astra Mk-1 मिसाइल भी है, जिसका डिजाइन DRDO ने तैयार किया है और इसका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड कर रहा है। इसकी रेंज 110 किलोमीटर से ज्यादा है। Su-30MKI फाइटर जेट में दोनों मिसाइलों को एक साथ लगाया जा रहा है। Astra Mk-1 की सबसे बड़ी खासियत रडार के जरिए लक्ष्य को भेदने की है। Astra Mk-1 मिसाइल ने भारतीय वायुसेना की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है और विदेशी निर्भरता को कम किया है।
भारत ने अपने विदेशी लड़ाकू विमानों के बेड़े को स्वदेशी हथियारों से लैस करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है...जो कि पाकिस्तान को चंद मिनटों में धूल में मिला देने में सक्षम है।  

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