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देश का रक्षा उत्पादन 174% और रक्षा निर्यात 34 गुना बढ़ा

अब से 11 साल पहले जो भारत अपनी रक्षा जरुरतों के लिए विदेश पर निर्भर करता था, वह दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों में शामिल हो गया है और अपने रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ के विशाल लक्ष्य तक ले जाने के लिए तैयार है। क्योंकि ये नया भारत है, यहां कुछ भी असंभव नहीं है। 
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में हमारा देश बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है और दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को हथियार बेच भी रहा है। लेकिन अब रक्षा मंत्रालय ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह भारत जैसे हथियार आयातक रहे देश के लिए बहुत बड़ा लक्ष्य है। 
भारत को रक्षा आयातक से रक्षा निर्यातक बनाने की यात्रा साल 2014 से शुरु हुई, जब केन्द्र में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली। उसके पहले तो माहौल ये था कि सेना के लिए बंदूकें और पिस्तौलें भी बाहर से मंगानी पड़ती थीं। ऐसे में लड़ाकू विमान..टैंक और विमानवाहक पोतों की तो बात रहने ही दीजिए। इस तरह की बड़ी युद्धक मशीनों को भारत में बनाए जाने के बारे में कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था। 
लेकिन अब वक्त बदल चुका है, अब तो देश के रक्षा उत्पादन में तरक्की साफ दिखाई दे रही है। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में 174 प्रतिशत की चौंका देने वाली बढ़ोतरी देखी गई है। 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये से भारत का कुल रक्षा उत्पादन अब 2023-24 में 1,27,265 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने अगले चार साल में यानी साल 2029 तक घरेलू रक्षा विनिर्माण को 3 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का  लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने सैकड़ों तरह के हथियारों, उपकरणों और स्पेयर पार्ट्स के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे न सिर्फ विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि घरेलू नवाचार और उत्पादन के लिए भी नए मौके बन रहे हैं। 
जैसे जैसे देश हमारा देश रक्षा उत्पादन के मामले में आत्म निर्भर हो रहा है, वैसे वैसे हमारी रक्षा कंपनियों का निर्यात भी बढ़ता जा रहा है।  पिछले 11 सालों यानी मात्र 4017 दिनों में ही मोदी सरकार ने देश के डिफेंस एक्सपोर्ट सेक्टर में वो लक्ष्य हासिल किया है, जिसे इसके पहले की कोई भी सरकार हासिल नहीं कर पाई थी। 
पिछले 11 वर्षों में रक्षा निर्यात में 34 गुना बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान पर बीते कई सालों में हुई सर्जिकल स्ट्राइक्स से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत के हथियारों के एक्सपोर्ट का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। आज हमारा देश अत्याधुनिक हथियारों और खास तौर पर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम का सबसे अहम ग्लोबल एक्सपोर्टर बन गया।  भारत के हथियारों के एक्सपोर्ट की मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ी है।  हमारा देश अब अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया सहित 85 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है। विदेश में हमारे जिन हथियारों की सबसे ज्यादा डिमांड है। वह हैं- आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्लेटफॉर्म, ब्रह्मोस मिसाइल और लोइटरिंग म्यूनिशन, केन्द्र सरकार ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) सहित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए लगातार प्रयास किया है।   उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं। जिसमें  8,658 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश  हुआ है और 53,439 करोड़ रुपये की अनुमानित निवेश क्षमता वाले 253 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस की नियुक्ति ने सेवाओं के बीच समन्वय और निर्णय लेने में सुधार किया है, जिससे उभरते सुरक्षा खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया संभव हो सकी है।  केन्द्र सरकार ने कई थिएटर कमांड स्थापित किए हैं, जिससे सेना के तीनों अंगों के बीच समन्वय मजबूत हुआ है। 
अब हालत यह है कि रक्षा निर्यात में केवल सरकारी ही नहीं निजी कंपनियों का शेयर भी बढ़ता जा रहा है। पिछले साल निजी कंपनियों ने 15,209 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया था। जो कि इस साल के मध्य तक ही 15,233 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी कि इस साल निजी क्षेत्र पिछले साल की अपेक्षा दोगुना रक्षा निर्यात करने की दिशा में बढ़ रहा है, जो कि भविष्य के लिए बहुत अच्छा संकेत है।  
 

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