पांच साल पहले पीएम मोदी ने देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा था, तो बहुत कम लोगों को उनकी इस बात का भरोसा हुआ था। लेकिन कहा जाता है ना कि हिम्मते मर्दां- मददे उपरवाला। यानी आप साहस करके आगे बढ़िए, अपना कर्तव्य करिए, उपर वाला रास्ता तो सुझा ही देगा। बिल्कुल वैसा ही भारत के साथ भी हो रहा है। पीएम मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का संकल्प लिया, तो ईश्वर ने रास्ता भी सुझा दिया। वह भी कोई मामूली रास्ता नहीं, बल्कि ऐसा रास्ता कि जो सफल हो गया, तो देश की जीडीपी तुरंत पांच गुना बढ़ जाएगी।
जल्दी ही हमारा देश उर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है। अभी तक भारत को अपनी जरुरतों के लिए विदेश से तेल मंगाना पड़ता है। लेकिन जल्द ही भारत की कच्चे तेल के लिए विदेश पर निर्भरता खत्म हो सकती है। भारत के खुद के पास भविष्य में इतना तेल हो सकता है कि वह अपनी जरूर पूरी करने के साथ ही विदेशों को भी बेचे। क्योंकि भारत को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित अंडमान-निकोबार बेसिन में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के महत्वपूर्ण और विशाल भंडार मिला है। जो 20 ट्रिलियन डॉलर का गुयाना-साइज तेल भंडार है।
केन्द्रीय पेट्रोलियम मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि "अंडमान निकोबार में चल रही तेल की खोज जल्द ही पूरी हो हो जाएगी। उन्होंने कहा है कि अंडमान में मिलने वाला तेल भण्डार दक्षिण अमरीकी देश गुयाना जितना हो सकता है। अब हमें ग्रीन शूट, तेल और कई अन्य स्थान मिले हैं। और मुझे लगता है कि यह केवल समय की बात है इससे पहले कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना जैसा तेल का भण्डार पाएँगे। इस पर अभी काम चल रहा है।"
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत में तेल और गैस की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के पर्याप्त भंडार हैं। जो कि अनुमानित रुप से 72 मिलियन मीट्रिक टन तेल के बराबर है। जिसमें से अब तक केवल 2 मिलियन मीट्रिक टन की खोज की गई है। भारत सरकार इस क्षेत्र में अन्वेषण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है, जिसमें ONGC और Oil India जैसी सरकारी कंपनियाँ सर्वेक्षण कर रही हैं और अन्वेषण गतिविधियाँ शुरू कर रही हैं। सरकार ने इस क्षेत्र को निजी क्षेत्र के निवेश के लिए भी खोल दिया है, जिसमें एक्सॉनमोबिल और शेल जैसी कंपनियों ने साझेदारी में रुचि व्यक्त की है।
वित्तीय वर्ष 2024 में ONGC ने 541 कुएँ खोदे, जिनमें 103 अन्वेषण कुएँ और 438 विकास कुएँ शामिल हैं। जिसमें 37,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय था।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, "अब चीजें बदल रही हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि हम बहुत सारे तेल क्षेत्र खोज लेंगे। यहाँ मिलने वाले तेल के भण्डार से देश की अर्थव्यवस्था तुरंत पांच से छह गुना ज्यादा बढ़ जाएगी।
अंडमान की श्रृंखला भारत के अलावा म्यांमार और इंडोनेशिया में भी फैली हुई है। यह दोनों देश भी इस इलाके से तेल निकाल रहे हैं। भारत को यहाँ पहले कुछ जगहों पर गैस मिल भी चुकी है। इंडोनेशिया को भी बड़े गैस भण्डार मिले हैं। भारत की 80% तेल की जरूरतें विदेशों से आने वाले कच्चे तेल से पूरी होती हैं। वित्त वर्ष 2025 में ही भारत को 137 बिलियन डॉलर यानी 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का खर्च तेल आयात के लिए करना पड़ा था। यदि अंडमान में गुयाना जितना भी तेल मिले तो भारत को यह पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। ऐसे में भारत को पाँच वर्षों में ₹50 लाख करोड़ से अधिक की बचत होगी। यह पैसा देश में रहने से अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और साथ ही हमारा व्यापार घाटा भी कम करेगा। यानी कि पीएम मोदी ने देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो सपना देखा था, उससे कई गुना ज्यादा बड़ी हमारी अर्थव्यवस्था बन सकती है।
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