16 और 17 जुलाई, ये दोनों ही दिन भारतीय सैन्य ताकत के लिए बेहद निर्णायक रहे हैं। क्योंकि भारतीय सेना ने डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी डीआडीओ के साथ मिलकर तीन घातक मिसाइलों की टेस्टिंग की है, जिससे हमारे दुश्मनों की नींद उड़ गई है।
भारत ने 16-17 जुलाई को आकाश-प्राइम, पृथ्वी-2 और अग्नि-1 मिसाइलों की सफलतापूर्वक टेस्टिंग की है। जो यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अगर फिर से पहलगाम जैसी कोई कायरतापूर्ण हरकत करता है, तो चीन और तुर्की भी उसको बचा नहीं पाएंगे।
भारत ने एक तरफ तो हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन से लगी सीमा पर आकाश एयर डिफेंस सिस्टम के अपग्रेडेड वर्जन आकाश प्राइम को तैनात कर दिया है। साथ ही गहरे समंदर में अग्नि-1 और पृथ्वी-2 शॉर्ट रेंज मिसाइल का भी परीक्षण करके अपने हथियारों के जखीरे को और मजबूत बनाया है। लद्दाख में आकाश-प्राइम लद्दाख ने 4,500 मीटर यानी सतह से साढ़े चार किलोमीटर उपर अपने निशाने को ध्वस्त किया। वहीं पृथ्वी-2 ने 350 किमी और अग्नि-1 ने 700 किमी तक भारतीय सीमा को सुरक्षित बना दिया। अग्नि और पृथ्वी के यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में किए गए। अग्नि प्राइम का परीक्षण 16 जुलाई को किया गया था। वह भी 15,000 फीट यानी 4.5 कि.मी की उँचाई पर। जहां ऑक्सीजन बहुत कम होता है और हवा काफी तेज होती है। इसके बावजूद अग्नि प्राइम का निशाना बिल्कुल नहीं चूका।
आकाश भारत का वही मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जिसने भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान किसी भी पाकिस्तानी ड्रोन का मिसाइल को भारतीय सीमा में घुसने नहीं दिया। जबकि पृथ्वी-2 और अग्नि-1 दोनों ही शॉर्ट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो 500 किलो से लेकर 1000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम हैं। साथ ही इनपर परमाणु वारहे़ड भी लगाया जा सकता है। अग्नि मिसाइल जहां तरल इंधन से चलती है, वहीं पृथ्वी मिसाइल ठोस इंधन पर आधारित है। रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि विशिष्ट स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड की ओर से आयोजित इन मिसाइलों के परीक्षण-फायरिंग ने सभी ऑपरेशनल और तकनीकी मापदंडों को पूरा किया।
लद्दाख में जिस आकाश प्राइम की टेस्टिंग की गई, वह लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स जैसे खतरों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। इसमें 'राजेंद्र' रडार लगा हुआ है। जो 360 डिग्री यानी चारों तरफ से इसे कवरेज देता है और एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। लद्दाख में भी आकाश-प्राइम ने दो हाई-स्पीड ड्रोन्स को सफलतापूर्वक मार गिराया था। इसका सबसे बड़ा फीचर स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर (RF Seeker) है, जो लक्ष्य को सटीकता से पहचानता है और मिसाइल को सही दिशा देता है। यह तकनीक अभी तक सिर्फ कुछ चुनिंदा देशों के पास मौजूद है। यह मिसाइल टेस्ट 'फर्स्ट ऑफ प्रोडक्शन मॉडल फायरिंग ट्रायल' के तहत हुआ, ताकि सेना को जल्दी सप्लाई हो सके। भारतीय सेना, डीआरडीओ, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और निजी कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया। इसके बाद अब अग्नि प्राइम मिसाइल को सीमा क्षेत्रों में तैनात करने की प्रक्रिया शुरु हो गई है।
अग्नि प्राइम की टेस्टिंग लद्दाख में करके भारत ने चीन को भी सख्त संदेश दिया है। क्योंकि चीन की सेना ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास एयरस्ट्रिप्स और रडार एक्टिव कर रखे हैं। यही नहीं चीन ने हाल ही में भारतीय सीमा के पास अपनी रोबोटिक फौज की टेस्टिंग भी की है। लेकिन दो दिनों में तीन खतरनाक मिसाइलों की टेस्टिंग करके भारत ने चीन को संदेश दे दिया है कि उसकी हर चाल का जवाब भारत के पास मौजूद है।
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