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भारत के लिए अर्जेन्टीना क्यों है जरुरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच देशों की यात्रा की है। जो हैं घाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद एंड टोबैगौ, नामीबिया और ब्राजील। इन पांच देशों की यात्रा से पीएम मोदी ने एक नहीं कई निशाने साधे हैं।  नामीबिया में दुनिया का 11 फीसदी यूरेनियम मौजूद है। अर्जेंटीना में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लिथियम रिज़र्व मौजूद है, साथ ही साथ ही शेल गैस और तेल का भंडार भी है। घाना में अफ्रीका का सबसे बड़ा लिथियम हब मौजूद है। त्रिनिदाद एंड टोबैगो में हाइड्रोकार्बन का भंडार मौजूद है। ब्रिक्स में शामिल ब्राज़ील रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी में भारत का रणनीतिक साथी है। 
इन सभी देशों के साथ भारत का लंबा रणनीतिक संबंध रहा है। लेकिन हाल ही में अर्जेंटीना भारत के लिए बेहद अहम दिखाई देने लगा है। इसीलिए इस बार की यात्रा में पीएम मोदी ने अर्जेन्टीना पर विशेष ध्यान दिया। विदेश मंत्रालय की हालिया घोषणा के अनुसार भारत ने अर्जेंटीना के लिथियम भंडार में गहरी रुचि दिखाई है। क्योंकि यह लिथियम आयन बैटरियों के लिए बेहद जरुरी होता है, जो कि इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों के लिए सबसे जरुरी कॉम्पोनेन्ट है। 
आज की दुनिया में लिथियम ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ बन चुका है, क्योंकि इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल व्हीकल, बैटरी और एनर्जी सेक्टर में भारी मात्रा में किया जाता है। हाल के वर्षों में दुनिया भर में इलेक्ट्रिकल व्हीकल का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और भारत समेत दुनिया भर के देश इसको बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा की रणनीति को बढ़ावा देने में लिथियम की अहम भूमिका है। 
हालांकि भारत के जम्मू में भी लिथियम के भंडार मिले हैं। लेकिन वह क्ले डिपॉज़िट फॉर्म में है। यानी उसे व्यावसायिक रूप से निकालना बेहद महंगा और जटिल है। यही वजह है कि भारत की नजर अर्जेन्टीना के लिथियम भंडार पर है। अर्जेंटीना लिथियम ट्रायएंगल का हिस्सा है। इस ट्रायएंगल में दो और देश बोलीविया और चिली भी शामिल हैं। ये तीनों देश मिलकर दुनिया के करीब 80 फीसदी लिथियम का उत्पादन करते हैं। अर्जेंटीना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा लिथियम उत्पादक है और यहां दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लिथियम भंडार पाया जाता है। साल 2025 के लिए अर्जेंटीना ने 130800 टन लिथियम के उत्पाद का लक्ष्य तय किया है जो पिछले साल (2024) के मुकाबले 75 फीसदी ज्यादा है। अर्जेंटीना चैंबर ऑफ माइनिंग कंपनीज के अनुसार इस साल अर्जेंटीना में लिथियम उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा साल्टा में नए ऑपरेशंस और अन्य ऑपरेशंस के विस्तार के जरिए मिलने की उम्मीद है।  फिलहाल अर्जेंटीना में 6 एक्टिव लिथियम खदानें हैं, जिनके जरिए साल 2024 में 74600 टन लिथियम का उत्पादन हुआ था।  यह साल 2023 में हुए कुल उत्पादन के मुकाबले 62 फीसदी ज्यादा था। अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लिथियम की खुदाई का अधिकार भारत की खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड पहले ही हासिल कर चुकी है।  इसके लिए 15 जनवरी 2024 को भारत और अर्जेंटीना के बीच लिथियम की खुदाई पर एक समझौता हुआ था। इस समझौते की लागत 200 करोड़ रुपये थे। इसी के तहत भारत की सरकारी कंपनी खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड को अर्जेंटीना में खनन का अधिकार मिला है और उसे पांच लिथियम ब्राइन ब्लॉक आवंटित किए जाने हैं। 
इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना को एक महत्वपूर्ण रक्षा प्रस्ताव दिया है। जो ये है कि उसके विशाल हेलिकॉप्टर फ्लीट की मेंटेनेंस भारत द्वारा की जाए। दक्षिण अमेरिका में सैन्य रणनीति में हेलिकॉप्टर्स का महत्त्वपूर्ण स्थान है। क्योंकि इन देशों में घने जंगल..पहाड़ और विशाल नदियां मौजूद है। जिसकी वजह से यहां पर ज़मीनी संचालन कठिन होता है।  इस लॉजिस्टिक पहल के जरिए भारत अर्जेंटीना के रक्षा तंत्र में भरोसेमंद भागीदार बनने का प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, अर्जेंटीना भारत की ब्रह्मोस मिसाइल और अन्य डिफेंस इक्विपमेंट खरीदने में भी दिलचस्पी दिखा चुका है। ये सब बातें इस तरफ इशारा करती हैं कि भारत का “एक्सपोर्टिंग डिफेंस पावर” बनना अब केवल सपना नहीं रहा है, बल्कि अब यह आकार लेने लगा है। आज की तारीख में भारत अर्जेंटीना का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। साल 2019 से 2022 के बीच इन दोनों देशों में हुआ द्विपक्षीय व्यापार दोगुना से भी ज्यादा बढ़ गया था और यह 6.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 53 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। साल 2024 में भारत-अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 5.2 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच चुका था।  भारत से अर्जेंटीना को पेट्रोलियम ऑयल, एग्रीकल्चरल केमिकल और दोपहिया वाहन आदि का निर्यात किया जाता है।  अर्जेंटीना से भारत लिथियम के अलावा सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल, चमड़े और अनाज का आयात करता है।  अर्जेन्टीना के रुप में भारत को अपने हथियारों का आयातक और लिथियम के निर्यातक के रुप में एक अच्छा साथी मिल गया है। जिसे पीएम मोदी की सर्वग्राह्य विदेश नीति का नतीजा का जा सकता है। 

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