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सकारात्मक संवाद के ज्ञान केन्द्र बने शैक्षणिक परिसर: प्रफुल्ल आकांत

Educational campus should become knowledge center for positive dialogue: Prafulla Akant

भारतीयता आधारित विचारों से प्रेरित लोग तो संवाद तथा सकारात्मक विमर्श में विचार रखते हैं, परंतु भारत में ऐसी विचारधाराएं भी हैं जो संवाद तथा विमर्श में भरोसा नहीं रखती हैं, वामपंथी विचारधारा सतत् विचारों के प्रवाह से विरोध रखती है।


आशुतोष सिंह

नई द्ल्ली: मंगलवार, 17 अक्टूबर को  दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी में कौटिल्य स्टडी सर्किल द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्री प्रफुल्ल आकांत, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष तुषार डेढ़ा, लॉ फैकल्टी प्रोफेसर डॉ सीमा सिंह ने उपस्थित स्टूडेंट्स को संबोधित किया। पुस्तक संस्कृति के नवीन माध्यमों से विकास, अध्ययनशीलता बढ़ाने तथा संवाद के नए रास्ते तलाशने आदि विषयों पर सारगर्भित संवाद हुआ। स्टूडेंट्स ने इससे संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न भी पूछे। 

ABVP के  राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत ने क्या कहा- 

बता दें की लॉ फैक्ल्टी में आयोतित इस संगोष्ठी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की संस्कृति तथा जीवन मूल्यों में संवाद की परंपरा द्वारा सत्य के बोध की परंपरा आदिकाल से रही है, 'वादे वादे जायते तत्व बोधः ' जैसे सिद्धांत इस बात की पुष्टि करते हैं। शैक्षणिक परिसरों में सकारात्मक संवाद तथा विमर्श की संस्कृति के विकास के लिए प्रयास करने होंगे, कौटिल्य स्टडी सर्किल जैसे प्रयास इस ओर सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनें। भारतीय युवा अपनी प्रतिभा के बलबूते विश्व की आशाओं को दिशा देने का कार्य कर रहा है, युवाओं के मध्य संवाद की परंपरा के विकास तथा भारतीय मूल्यों आधारित विमर्श दृष्टि द्वारा परिवर्तन की आकांक्षा विकसित होनी चाहिए।

प्रफुल्ल आकांत जी ने आगे कहा कि," भारतीयता आधारित विचारों से प्रेरित लोग तो संवाद तथा सकारात्मक विमर्श में विचार रखते हैं, परंतु भारत में ऐसी विचारधाराएं भी हैं जो संवाद तथा विमर्श में भरोसा नहीं रखती हैं, वामपंथी विचारधारा सतत् विचारों के प्रवाह से विरोध रखती है। आज का युवा संवाद की महानता में विश्वास रखने वाला है। भारत में युवाओं के मध्य विचार विमर्श तथा संवाद की परंपरा विकसित होनी चाहिए तथा शैक्षणिक परिसरों को भारतीय मूल्यों आधारित ज्ञान केन्द्र के रूप में विकसित करना होगा, यह जिम्मेदारी शिक्षा क्षेत्र कार्यरत सभी हितधारकों की है।

कार्यक्रम के इस मौके पर डूसू अध्यक्ष तुषार डेढ़ा ने कार्यक्रम में कहा कि," वर्तमान में डिजिटल युग में जहां एक ओर तकनीक ने बहुत सारी बातों में आसानी की है, वहीं दूसरी ओर एकाग्रता को भी प्रभावित किया है। आज शैक्षणिक परिसरों में न‌ई आवश्यकताओं व नए माध्यमों के अनुरूप पुस्तक संस्कृति के विकास के लिए प्रयास होने चाहिए। डूसू ने इस दिशा में रचनात्मक लक्ष्य लेते हुए डीयू सहित विभिन्न स्थानों पर प्रयास शुरू करने की योजना की है,इन प्रयासों द्वारा परिसरों में युवाओं के मध्य संवाद की परंपरा विकसित होगी। परस्पर संवाद तथा अध्ययनशीलता युवाओं के आगे बढ़ने के लिए आवश्यक तत्व है।"

 

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