logo

“जन्म से चांदी के चम्मच में खाना खाने वाले क्या समझेंगे गरीब-दलित-किसान की समस्या”

What will those who eat food in silver spoons understand the problem of poor-Dalit-farmer from birth?

महान किसान नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने कहा था कि देश की प्रगति का मार्ग इस देश के गांव, गलियों, खेत और खलिहानों से होकर जाता है। चौधरी चरण सिंह की बातों को वास्तव में समाजवादी पार्टी ने अपने कालखंड में थोड़ा भी ध्यान में रखा होता तो उत्तर प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक किसानों ने उनके कालखंड में आत्महत्या नहीं की होती। दुष्यंत कुमार ने इस पर बहुत अच्छी बात कही है कि तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीं नहीं और कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीं नहीं। उन्हें जमीनी हकीकत की कोई जानकारी नहीं है।

तुलसीदास जी ने ये बात कही भी है कि समरथ को नहीं कोई दोष गोसाईं...ऐसे ही लोगों पर बातें अक्षरशः ठीक बैठती हैं, क्योंकि जो लोग जन्म से चांदी के चम्मच से खाने के आदी हैं वो गरीब-किसान-दलित की समस्या और उसकी पीड़ा को क्या समझेंगे। उन्होंने अति पिछड़ों और पिछड़ों के साथ क्या व्यवहार किया था, ये पूरा देश जानता है।

मुझे चौधरी चरण सिंह की बातों के साथ ही महान साहित्यकार राम कुमार वर्मा जी की पंक्तियां याद आती हैं जिन्हें ध्यान में रखकर डबल इंजन की सरकार काम कर रही है। यह देश के अन्नदाता किसानों के लिए समर्पित पंक्तियां थीं कि हे ग्रामदेवता नमस्कार, सोने चांदी से नहीं किंतु तुमने मिट्टी से किया प्यार, हे ग्राम देवता नमस्कार। सोना-चांदी से प्यार करने वाले लोग अन्नदाता किसान के महत्व को नहीं समझेंगे। उसकी पीड़ा को भी नहीं समझ पाएंगे।

अगर भारत की खेती की बात होती है तो नेता विरोधी दल, उससे बाड़ी शब्द भी जुड़ता है। पशुपालन भी उसका पार्ट है। और जिस सांड़ की आप बात कर रहे हैं न वो भी उसी का हिस्सा है। आपके समय में वो बूचड़ खाने के हवाले होता था, हमारे समय में यही पशु धन का पार्ट बना हुआ है।

लगता है पेपर की कटिंग पर होमवर्क करते समय शिवपाल जी ने कुछ पुरानी कटिंग भी बीच में रखवा दी थीं। क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब परिवार में सत्ता का संघर्ष बढ़ता है तो कुछ न कुछ चीजें तो सामने आएंगी। शिवपाल जी ने इतना पापड़ बेला है तो कुछ तो सामने आएगा। शिवपाल जी के प्रति हमारी सहानुभूति है। आपके साथ अन्याय हुआ है। आपके साथ ये लोग न्याय करेंगे भी नहीं।

यूपी की स्थिति देश के अन्य राज्यों से काफी अच्छी है। यूपी देश का और दुनिया का अकेला ऐसा भूभाग है जहां 86 प्रतिशत भूमि, नगरों, सरकारी और निजी नलकूपों से सिंचित है। कृषि बोआई का सामान्य प्रतिशत 88 प्रतिशत फसलों की बोआई हो गई है। धान की नर्सरी भी लगभग 100 फीसदी लग चुकी है, कम बारिश के कारण इसमें नुकसान हुआ होगा, मगर सरकार की कार्रवाई इसपर आगे बढ़ रही है।

सिंचाई की अतिरिक्त सुविधा और अतिरिक्त विकल्प होने का परिणाम ये है कि देश के कुल कृषि भूमि का 11 प्रतिशत यूपी के पास है। मगर खाद्यान का कुल उत्पादन 20 अन्न उत्पादन यहां का किसान करता है। ये दिखाता है कि प्रदेश का किसान अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से उत्पादन को आगे बढ़ाने में कोताही नहीं करता। सरकार किसानों को अधिक से अधिक सुविधा देने का प्रयास करती है।

बाढ़ और सूखा से आपदा की चपेट में आए 4500 किसानों को पहले चरण में अबतक मुआवजा देने का कार्य किया है। 2017 में सरकार ने 61320 किसानों को लगभग 60 करोड़ का मुआवजा उपलब्ध कराया था। इसी प्रकार 2018-19 में भी 384113 किसानों को 212 करोड़ का मुआवजा दिया गया, जिसमें से ज्यादातर सूखे से पीड़ित थे। 2019-20 में भी 64 करोड़ 32 लाख का मुआवजा अन्नदाता को प्रदान किया गया। 2020-21 में 120 करोड़ का मुआवजा 362600 से अधिक किसानों को प्रदान किया गया। 2021-22 में 475 करोड़ रुपए 1394900 से अधिक किसानों को कंपनसेशन दिया। 2022-23 में प्रदेश के 427 करोड़ रुपए 1214000 किसानों को मुआवजा दिया गया। अबतक 8400 से अधिक किसानों को प्रदेश सरकार बाढ़ के कारण क्षति का मुआवजा दे चुकी है।

इस बार पश्चिमी यूपी में बाढ़ आई मगर 40 से ज्यादा जनपदों में सूखा देखने को मिला। बहुत सी जगह सिंचाई और पॉवर कॉर्पोरेशन ने अपने स्तर पर कार्य किये। प्रदेश सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के राहत के कार्य किये।

इस वर्ष 26964 ड्राई राशन किट बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराया गया। 2550 डिग्निटी किट प्रदान किए गए। 909 बाढ़ शरणालय बनाये गये। पशुओं के लिए चारे भी बनाये गये। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप, पशुओं का टीकाकरण, अतिरिक्त नौकाओं की व्यवस्था की गई। प्रशासन की कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से पब्लिक में संतुष्टि का भाव देखने को मिला।

इन्सेफलाइटिस से पूर्वी यूपी में चालीस साल में 50 हजार बच्चों की मौत हुई थी। मुझे ये बताने में गर्व होता है कि हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में इन्सेफेलाइटिस का समूल नाश कर दिया। आज प्रेदश में पूरी तरह से इंसेफेलाइटिस समाप्त हो चुका है। बस घोषणा होना बाकी है।

ये सरकार पहली सरकार है जिसने अन्नदाता किसानों के हित में दो अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। कोई व्यक्ति सर्पदंश और सांड़ से मरे, इन सभी को आपदा में घोषित करने वाला यूपी देश का पहला राज्य है।

हम किसान को सुरक्षित रखेंगे, साथ ही वन्यजीवों को रेस्क्यू करके सुरक्षित करने का कार्य भी करेंगे।  2017 से अबतक 55 लाख लोगों को आवास दिलाये गये हैं। लोहिया आवास में आप सपा के कैडर को आवास देते थे। ये लोग आवास देते ही नहीं थे। लगभग ढाई वर्ष तक ये सरकार में रहे। 2017 के बाद 55 लाख गरीबों को आवास दिया गया है, जिसमें से 44 लाख से अधिक आवास में गृह प्रवेश भी हो चुका है। डबल इंजन सरकार ने एक और काम किया है। प्रयागराज में एक भूमाफिया की जमीन को मुक्त कराके 76 गरीबों को वहां भी आवास देने का कार्य किया गया है।

2012 से 17 के बीच प्रदेश की जनता चाचा भतीजे के बीच द्वंद्व का शिकार होती रही। भतीजे को लगता था कि चाचा हावी ना हो जाएं, इसलिए पैसे नहीं देते थे। यही कारण है कि 2012 से 17 के बीच आठ परियोजनाएं पूरी हो पाई थीं। 2017 से 22 के बीच हमने 20 परियोजनाओं को पूरा किया है। सिंचन क्षमता 2012 से 17 तक 195900 हेक्टेयर थी और 2017 से 22 के बीच 2317000 हेक्टेयर सिंचाई हुई है, जिससे 44 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।

पहली बार गत वर्ष हमने बिजली के बिल में 50 फीसदी की छूट दी है। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बनाने का कार्य हुआ है। 34974 रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य हुआ है। 30749 रियूज एंड रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाने का कार्य हुआ है। विभिन्न जनपदों में 9 नदियों को पुनर्जीवित किया गया है।

2017 से पहले बिजली वीआईपी जिलों में ही मिलती थी। शेष जिले इससे वंचित होते थे। आज यूपी में सभी जिलों में समान रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही है। जिला मुख्यालय पर 23 से 24 घंटे, तहसील पर 20 से 22 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 16 से 18 घंटे की आपूर्ति 2017 से लगातार की जा रही है।

इसके अलावा हमारी सरकार द्वारा पॉवर सप्लाई लॉस को भी काफी कम किया गया। 2017 से पहले ये 22 फीसदी था, आज ये 17 फीसदी के आसपास है।2017 से पहले 1 करोड़ 8 लाख विद्युत मीटर थे, आज 3 करोड़ 27 लाख से अधिक विद्युत मीटर लगाये गये हैं। ये योजनाएं प्रदेश की आने वाली आवश्यक्ताओं की पूर्ति करने का कार्य करेंगी।

एमएसपी क्या होता है शायद नेता विरोधी दल को पता नहीं है। सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी स्थिति में किसान परेशान ना हो। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई। 2017 से 2022 के बीच लगभग 50 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। इसमें 4228 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधे सीधे पहुंचाने का कार्य हुआ।

प्रदेश में रबी और खरीफ के लाभार्थी किसानों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा से जोड़ा जा रहा है। इसके अंतर्गत जिन किसानों की दुखद मौत हुई, ऐसे 9710 किसानों को अबतक 435 करोड़ की धनराशि का भुगतान किया गया है। प्रदेश में किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 2 करोड़ 61 लाख किसानों को 59105 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से दिए जा रहे हैं।  2017-22 के बीच 2325 करोड़ रुपए किसानों को सीधे सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गये हैं।

12 से 17 के बीच 19 लाख किसानों से 94 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई थी। 12 हजार 800 करोड़ का भुगतान नगद किया गया था। इसमें आढ़ती और बिचौलिये बीच में थे। 17 और 22 से बीच 47 लाख 89 हजार किसानों से 225 लाख मीट्रिक टन खरीदा जाता है और 41 हजार 299 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के खाते में पैसा जाता है।

हमने नई चीनी मिलें दी, बंद चीनी मिलों को चलाया। आपकी सरकार में चीनी मिलों को बंद करके किसानों के पेट पर लात मारी गई। किसानों पर गोलियां चलाई जाती थी। कोरोना कालखंड में जब नेता विरोधी दल घरों में दुबके थे तब भी हम चीनी मिलें चला रहे थे। उन्हें अपने कार्यकर्ताओं की चिंता नहीं थी, सरकार से ये पूछने की भी जहमत नहीं उठाई कि हम क्या मदद कर सकते हैं। उल्टा वैक्सीन का विरोध कर रहे थे।

12 से 17 के बीच 14725 टीसीडी पेराई क्षमता का विस्तार हुआ, जबकि 17 से 22 के बीच 78900 टीसीडी का विस्तार हुआ। गन्ना पेराई 3 हजार 734 लाख मीट्रिक टन हुआ और 17 से 23 के बीच में 6 हजार 404 लाख मीट्रिक टन की पेराई हुई है। चीनी उत्पादन 368 लाख मीट्रिक टन और 17 से 23 के बीच 682 लाख 44 हजार मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ है।

मैं आश्वस्त करता हूं प्रदेश के सभी 65 लाख गन्ना किसानों का भुगतान शत प्रतिशत किया जाएगा।

वृक्षारोपण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जो प्रयास किया गया है, इसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। दुनिया इसे पॉजिटिव रूप में लेती है कि दुनिया का सबसे बड़ा राज्य दुनिया के लिए कार्बन उत्सर्जन के लिए कितना योगदान दे रहा है।

162 करोड़ से अधिक वृक्ष अब तक लगाये गये हैं, जिससे 12 लाख 80 हजार एकड़ लैंड आच्छादित हुई है। अगर एफआरआई देहरादून के स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट देखें तो कहा गया है कि कुल वनावरण में 80 हजार हैक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। हम लगातार इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

एक दिन में 30 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गये हैं। अभी 15 अगस्त को 5 करोड़ पौधरोपण का अभियान फिर चलाया जाएगा। इस दौरान हर ग्राम पंचायत, नगर निकाय और प्रमुख स्थलों पर भारत के स्वतंत्रता सेनानियों, वीर शहीदों और अमर जवानों के लिए अमृत वाटिका का निर्माण होगा।



योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश
(यह लेख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा में दिए गए उनके भाषण के संपादित अंशों पर आधारित है।)

Leave Your Comment

 

 

Top