WRITER- सात्विक उपाध्याय
नई दिल्ली : 3 मई को मणिपुर में दो समुदायों के बीच शुरु हुई हिंसा के 4 माह के बाद भी राज्य में हिंसा जारी है। मणिपुर में एक बार फिर मंगलवार ,29 अगस्त की शाम को कुकी-ज़ोमी बहुल चुराचांदपुर और मैतेई बहुल बिष्णुपुर जिलों की सीमा पर हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई है। इन सीमावर्ती ज़िलों में खोइरेंटेक क्षेत्र में भारी गोलीबारी हुई, जिसके कारण कई और लोग भी घायल हुए हैं। गोलीबारी की घटना वाले दिन यानी मंगलवार को मणिपुर विधानसभा का एक दिन का सत्र बुलाया गया था। ये सत्र महज कुछ मिनटों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पुलिस की एक जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की यह घटना सुबह करीब साढ़े 6 बजे शुरू हुई थी और देर रात तक जारी रही। घटना में मारे गए लोगों में एक की पहचान जांगमिनलुन गंगटे के रूप में की गई है। बता दें कि गंगटे एक ग्राम रक्षा गार्ड थे।
राज्य में इस तरह की हिंसा 11 दिन बाद हुई है जिसमें किसी की जान गई है। इससे पहले 18 अगस्त को उखरूल थाना क्षेत्र में तीन लोग मारे गए थे। इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम का कहना है कि गंगटे की मौत सुबह 10 बजे के आसपास हुई, जब खोइरेंटेक के आसपास कुकी-ज़ोमी गांवों पर हमला हुआ। हालांकि चुराचांदपुर पुलिस ने कहा कि मंगलवार रात तक यह स्पष्ट नहीं था कि उनकी मौत गोली लगने से हुई या विस्फोट में हुई है। गोलीबारी की इस घटना के बाद इलाके में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों और सेना ने अभियान चलाया. हमले में शामिल होने के संदेह में एक व्यक्ति को पकड़ लिया है।
मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से चुराचांदपुर-बिष्णुपुर सीमा पर लगातार झड़पें और हिंसा देखने को मिल रही हैं। पहाड़ी ज़िले चुराचांदपुर में कुकी-ज़ोमी जनजाति लोगों का वर्चस्व है जबकि बिष्णुपुर एक मैतेई-बहुल ज़िला है। राज्य में करीब 4 महीने से चल रही हिंसा में अब तक 180 से अधिक लोग मारे गए हैं और 60 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
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