भारत ने डिजिटल क्रांति में बड़ी सफलता हासिल की है। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से ही डिजिटल इंडिया मुहिम को प्राथमिकता दी गई। जिसका परिणाम अब सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है। भारत का डिजिटल परिवर्तन इस बात का प्रभावशाली उदाहरण बनकर उभरा है कि तकनीक का इस्तेमाल किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी को सरल, तेज और अधिक समावेशी बनाने के लिए किया जा सकता है। 1 दशक पहले भारत में डिजिटल इंडिया मुहिम को तेजी देने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी की UPI की बड़े पैमाने पर शुरुआत किया गया। जिसका परिणाम सकारात्मक भी रहा। ऐसे में भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बदलने वाला UPI अब 10 साल का हो गया है। इस मुहिम की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुआ और 10 सालों बाद अब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) देश में रोजमर्रा के भुगतान का अहम हिस्सा बन चुका है और लोगों के जीवन का अहम हिस्सा भी। छोटी दुकान पर कुछ रुपये का पेमेंट हो या लाखों रुपये का कारोबारी लेनदेन, UPI ने पैसे भेजने और लेने का तरीका काफी आसान बना दिया है। किसी भी मुहिम को गति देने में समय लगता है ऐसा ही UPI के साथ भी हुआ पर यह भारतीय डिजिटल क्रांति का सबसे अहम चेहरा बन गया और दिशा तय करने का एक प्रमुख जरिया भी। गांव हो या फिर शहर, छोटे दुकान हों या फिर मॉल आज सभी जगहों पर UPI का प्रयोग तेजी के साथ हो रहा है। UPI आज डिजिटल रूप से सशक्त और वित्तीय रूप से समावेशी भारत के विजन को प्रतिबिंबित करता है।
UPI देश के विकास का एक ऐसा जरिया बना कि इसकी जिक्र विश्व स्तर पर किया जाने लगा। UPI का दायरा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। बीते एक दशक में इसका दायरा विश्व स्तर तक पहुंच गया है। भारत के अलावा UPI अब UAE, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में संचालित हो रहा है। IMF के अनुसार, 2025 में वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी थी। इस तरह 10 साल में UPI भारत की डिजिटल पहचान के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में भी अपनी जगह बना चुका है।
10 साल में कैसा रहा UPI का सफर-
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों और सूचना के मुताबिक, UPI की शुरुआत के पहले वित्त वर्ष 2016-17 में सालाना सिर्फ 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे.. जो जाहिर तौर पर कम तो था पर शुरुआती चरण के लिए बड़ी सफलता भी था। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो गया। यानी करीब 10 साल में UPI के सालाना ट्रांजैक्शन में लगभग 13,000 गुना की बढ़ोतरी हुई। ट्रांजैक्शन की संख्या के साथ बीते 10 सालों में भुगतान की कुल रकम में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2016-17 में UPI के जरिए करीब ₹0.07 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गया। भारत में UPI की सफलता का बड़ा सबूत यह भी रहा कि इससे जुड़े बैंकों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। जो शुरुआती वर्षो में करीब 44 बैंकों तक सीमित थी पर वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंक हो गई। जो UPI के लिए बड़ी सफलता का विषय है।
अहम बात यह है कि सरकार द्वारा आने वाले दौर में UPI के मौजूदा आधार को और secure, inclusive, and globally interoperable बनाने की दिशा में कई अहम और मजबूत फैसले लिए जा सकते हैं। UPI के पहले दशक ने इसे भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की रीढ़ के रूप में स्थापित किया है। अगला दशक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
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