WRITER- सात्विक उपाध्याय
नई दिल्ली: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के स्थापना दिवस के 102 वर्ष के बाद 10 अक्टूबर, मंगलवार को कार्यपरिषद की बैठक हुई। इस बैठक में कुलपति आनंद त्यागी के साथ कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। इस बैठक में विद्यापीठ को लेकर एक बड़ी फैसला सुनाया गया है। बता दें कि कार्यपरिषद की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया कि काशी विद्यापीठ के 102 साल पूरे हो गए हैं और विद्यापीठ राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय है, परन्तु इसके नाम के सामने विश्वविद्यालय नहीं लिखा जाता है। अत: विद्यापीठ के नाम के आगे हिंदी में विश्वविद्यालय और अंग्रेजी में यूनिवर्सिटी लिखा जाना चाहिए। जिसको लेकर प्रस्ताव रखा गया कि काशी विद्यापीठ के नाम के आगे अब विश्वविद्यालय भी लिखा जाना चाहिए। इस प्रस्ताव की स्विकृति के लिए इसे कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल और शासन को भेजा जा रहा है। बता दें कि कार्यपरिषद की इस बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गये हैं।

बता दें कि पक्ष और विपक्ष में हुए बड़े बसह के बाद सभी सदस्यों ने सर्वसहमति के साथ इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। जिसके बाद इस प्रस्ताव को कुलाधिपति औऱ शासने के पास भेजने की बात कही गई।

जानकारी के मुताबिक कार्यपरिषद की इस बैठक में नवंबर में होने वाले दीक्षांत समारोह को लेकर भी बदलाव किए गये। जिसमें प्रमुख रुप से परंपरागत गणवेश यानी की पहले से चली आ रही गाउन औऱ टोपी की परंपरा में बदलाव किया गया है। गणवेश में बदलाव के लिए कहा गया है कि अब छात्र गाउन की जगह अंगवस्त्रम यानी कि दुपट्टे और गांधी टोपी का प्रयोग करेंगे। जिसके दोनों तरफ काशी विद्यापीठ का लोगो छपा रहेगा। बता दें कि इसी दुपट्टे और गांधी टोपी को दीक्षांत परिधान के रुप में चुना गया है। साथ ही इस कार्यपरिषद की बैठक में 10 कर्मचारियों की सेवा को स्थायी कर दिया गया है।
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