logo

केंद्रीय बजट 2026: आज की रणनीति, कल की शक्ति

Union Budget 2026: Strategy today, power tomorrow

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026 केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 'आर्थिक कूटनीति' का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार रविवार को पेश किया गया यह बजट एक ऐसी सरकार की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसकी प्राथमिकता 'तमाशा' नहीं बल्कि 'ठोस रणनीति' है। जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रही हैं, तब भारत का यह बजट अपनी स्थिरता और दूरदर्शिता के कारण दुनिया में अलग चमक रहा है।
इस बजट की सबसे बड़ी खूबी वह है, जो इसमें 'नहीं' है। सरकार ने सस्ती लोकप्रियता के लालच को सिरे से नकार दिया है। कोई लोक-लुभावन घोषणाएं नहीं, कोई रेवड़ियां नहीं। इसके बजाय, सरकार ने कठिन लेकिन सही रास्ता चुना है- विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सुधार और मानव पूंजी पर दांव लगाया है। यह इस बात का संकेत है कि भारत अब छोटे फायदे के लिए नहीं, बल्कि 'लंबी रेस' के लिए खेल रहा है।
सरकार ने वित्तीय क्षेत्र में सतही राहत के बजाय गहरे सुधारों को प्राथमिकता दी है। 'विकसित भारत' के लिए बैंकिंग समिति का गठन और कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट का आधुनिकीकरण देश की आर्थिक नींव को फौलादी बनाने की दिशा में बढ़ाए गए कदम हैं। वहीं, 'एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट' पहल और आयुष संस्थानों का विस्तार युवाओं को केवल शिक्षित नहीं, बल्कि कुशल बनाने का संकल्प है।
तंबाकू और सिगरेट जैसे 'सिन गुड्स' पर टैक्स बढ़ाना केवल राजस्व का जरिया नहीं है, बल्कि एक सामाजिक संदेश है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जन-स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा। यह राजकोषीय अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी का एक सुंदर समन्वय है।
कल तक जिसे केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र माना जाता था, आज उसे निर्यात और रोजगार के 'रणनीतिक हथियार' के रूप में विकसित किया जा रहा है। मेगा टेक्सटाइल पार्क और खादी का वैश्विक ब्रांड बनना ग्रामीण भारत की नई शक्ति का प्रतीक है। अब हमारे करघे केवल कपड़े नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक साख बुन रहे हैं। ₹12.2 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय भारत के भविष्य का बीमा है। मुंबई-पुणे से लेकर वाराणसी-सिलीगुड़ी तक सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर केवल कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि हमारी बढ़ती महत्वाकांक्षा के प्रतीक हैं। जलमार्ग और सीप्लेन लॉजिस्टिक्स पर जोर देना यह बताता है कि हमारी सोच अब पारंपरिक सीमाओं को लांघ चुकी है।
शेयर बाजार की शुरुआती घबराहट को नजरअंदाज कीजिए। बाजार अक्सर तात्कालिक प्रतिक्रिया देता है, लेकिन निवेशक हमेशा स्थिरता की पूजा करते हैं। जैसे-जैसे इस बजट के लाभ, रोजगार, कम लॉजिस्टिक्स लागत और बेहतर सुविधाएं आम नागरिक के जीवन तक पहुंचेंगे, देश के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
आज भारत वैश्विक लोकतंत्रों के बीच सबसे चमकदार बिंदु है। लेकिन 'विकसित भारत' का यह सपना केवल सरकारी फाइलों से पूरा नहीं होगा। अगले 20 साल भारत के लिए 'आत्मनिर्भरता' की दूसरी आजादी की लड़ाई के समान हैं। पहली आजादी हमें बलिदानों से मिली थी, यह दूसरी आजादी हमें हमारे श्रम, नवाचार और संकल्प से मिलेगी।
मेरे युवा साथियों, आप इस महायज्ञ के मूक दर्शक नहीं, बल्कि इसके मुख्य सारथी हैं। अमृत काल शुरू हो चुका है। बजट ने दिशा दिखा दी है, अब संकल्प की शक्ति हमें लगानी है।

 


दीपक कुमार रथ

Leave Your Comment

 

 

Top