नई दिल्ली: भारत को आस्था और मंदिरों का केंद्र कहा जाता है। भारत के लगभग सभी प्रांत में अनेक देवी देवताओं के मंदिर भी हैं। भारत में मंदिर जितने ही आस्था के केंद्र हैं उतने ही वे मंदिर भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अर्थ का केंद्र भी हैं। ऐसे में हम आपको कुछ आंकड़ों के मुताबिक बताते हैं कि कौन से वे मंदिर हैं जो भारत में सबसे अधिक आय का स्रोत हैं और उन मंदिर के नाम क्या -क्या हैं....
1- तिरूपति वेंकटेश्वर मंदिर - आंध्र प्रदेश
बता दें आंध्र प्रदेश में स्थित मंदिर मुख्य रुप से आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां रोज लाखों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। ऐसे में इस मंदिर की वार्षिक आय 1500 से 1650 करोड़ रुपये है।

2- पद्मनाभस्वामी मंदिर - केरल
यह मंदिर भगवान पद्मनाभस्वामी की पूजा अर्चना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भी हजारों और लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर की वार्षिक आय लगभग 750 से 800 करोड़ रुपये है।

3- श्रीराम मंदिर- अयोध्या
वर्ष 2024 में बनकर तैयार हुआ श्रीराम मंदिर अपने ही आप में ऐतिहासिक है। 500 वर्षों से अधिक के संघर्ष के बाद निर्मित यह मंदिर उत्तर प्रदेश के साथ ही पूरे भारत की मुख्य धरोहर में से एक है। इस मंदिर में विगत एक सालों में करोड़ों भक्तों ने दर्शन किया है। इस मंदिर की वार्षिक आय की बात की जाए तो इस मंदिर की प्रति वर्ष की आय 700 करोड़ रुपये है। आगे आने वाले समय में इस आय में और भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है जो भारत के आर्थिक विकास के नजरिये से बेहद सकारात्मक पक्ष है।

4- स्वर्ण मंदिर - अमृतसर, पंजाब
यह मंदिर सिख ध्रर्म का प्रमुख मंदिर है। हरिमंदिर साहिब सिख धर्मावलंबियों का सबसे पावन धार्मिक स्थल या सबसे प्रमुख गुरुद्वारा है जिसे दरबार साहिब या स्वर्ण मन्दिर भी कहा जाता है। यह भारत के राज्य पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है और यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है। पूरा अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है। स्वर्ण मंदिर में हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। अमृतसर का नाम वास्तव में उस सरोवर के नाम पर रखा गया है जिसका निर्माण गुरु राम दास ने स्वयं अपने हाथों से किया था। यह गुरुद्वारा इसी सरोवर के बीचोबीच स्थित है। इस गुरुद्वारे का बाहरी हिस्सा सोने का बना हुआ है, इसलिए इसे 'स्वर्ण मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की अगर वार्षिक आय की बात की जाए तो प्रति वर्ष मंदिर की आय लगभग 600 से 650 करोड़ रुपये है।

5- वैष्णो देवी मंदिर- जम्मू-कश्मीर
जम्मू- कश्मीर के कटरा में स्थित यह मंदिर भारतीय हिदुंओं के आस्था का प्रतीक है। माता वैष्णों का यह दरबार अपने जटिल और ऊंची चढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर आस्था के साथ ही अर्थ का भी केंद्र है। प्रति वर्ष यहां करोड़ों की संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। माता वैष्णो देवी के दरबार से प्रति वर्ष 550 से 600 करोड़ रुपये की आय अर्जित होती है।

6- शिरडी साईं मंदिर - महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित यह मंदिर आस्था का बहुत ही बड़ा केंद्र है। इस मंदिर अपने मन्नत पूरा कराने की आस से प्रति वर्ष करोड़ों की संख्या में भक्त आते हैं और दान भी अर्पित करते हैं। यह मंदिर कई सालों से भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस मंदिर के प्रति वर्ष की आय 450 से 500 करोड़ रुपये है।

7- जगन्नाथ मंदिर- पुरी, ओडिशा
ओडिशा के पुरी जिला में स्थित जगन्नाथ मंदिर मुख्य रुप से हिंदु धर्म के आस्था का केंद्र है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलदेव जी की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भारत के प्राचिन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर जितना ही आस्था का केंद्र है उतना ही अपने रोचक ढांचे, परंपरा और कलाकृति के लिए भी प्रचलित है। प्रति वर्ष इस मंदिर की आय 400 करोड़ रुपये है।

8- अक्षरधाम मंदिर- नई दिल्ली
दिल्ली में बना स्वामिनारायण अक्षरधाम मन्दिर एक अनोखा सांस्कृतिक तीर्थ है। इसे ज्योतिर्धर भगवान स्वामिनारायण की पुण्य स्मृति में बनवाया गया है। इसके मुख्य देव भगवान स्वामीनारायण है। यह परिसर 100 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मन्दिर परिसर होने के नाते 26 दिसम्बर 2007 को यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया। यह मंदरि अपने अद्भूत कलाकृति और ढांचे के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर में करोड़ों की संख्या में सैलानी आते हैं। प्रति वर्ष इस मंदिर की आय लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये है।
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यह थी उदय इंडिया टीम की खास पेशकश - जिसमें हमने भारत के सबसे अधिक मालामाल और आय वाले मंदिर के बारे में बताया है। बता दें कि उदय इंडिया टीम किसी भी तरह से दिए गए आंकड़ों की प्रमाणिकता सिद्ध नहीं करता है यह आंकड़े उत्तर प्रदेश- उत्तराखंड इकोनॉमिक एसोसिएशन का अध्ययन है।
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