नई दिल्ली: गुरुवार, 25 सितंबर की शाम विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनसिप 2025 का उद्धाटन दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में भारतीय संस्कृति,परंपरा और रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ। इस मौके पर दुनियाभर से आए एथलिट द्वारा एथलेटिक्स परेड भी निकाली गई। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारत में पहली बार हो रही विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के उद्घाटन की घोषणा की। इस वैश्विक प्रतियोगिता में 27 सितंबर से 104 देशों के 2200 से ज्यादा और भारत की ओर से कुल 74 एथलीट हिस्सा लेंगे।
क्या रहा कार्यक्रम में खास-
बता दें कि भारत एशिया का चौथा ऐसा देश है जो इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। भारत से पहले इस पैरा एथलेटिक्स चैंपियनसिप की मेजबानी कतर (2015), यूएई (2019) और जापान (2024) में कर चुका है। बता दें कि उद्घाटन से पहले एथलीटों की परेड और 45 मिनट का सांस्कृतिक प्रदर्शन हुआ। ध्वजवाहक धरमबीर नैन और प्रीति पाल के नेतृत्व में लगभग 10 भारतीयों ने उपस्थित जनसमूह की करतल ध्वनि के बीच संक्षिप्त परेड में भाग लिया। दिल्ली स्थित नृत्य समूह वी आर वन, जो श्रवण-बाधित कलाकारों से बना है, ने प्रसिद्ध जय हो की प्रस्तुति दी, जिनमें से कई व्हीलचेयर पर थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भांगड़ा नृत्य और मृदंग के साथ मणिपुरी पुंग चोलोम का प्रदर्शन भी किया गया।

चैंपियनसिप को लेकर पीएम मोदी का संदेश क्या रहा-
भारत को डब्ल्यूपीएसी 2025 की मेज़बानी पर "गर्व" होने की बात कहते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "खेल लोगों को जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है, जो धर्म, क्षेत्र और राष्ट्रीयता की सभी बाधाओं को पार करता है। आज की दुनिया में, खेल के इस एकीकृत पहलू पर ज़ोर देना और भी ज़रूरी है। मुझे यकीन है कि डब्ल्यूपीएसी का सभी प्रतिभागियों और दर्शकों पर ऐसा ही प्रभाव पड़ेगा।"
इसके अलावा पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत को पहली बार विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी करने पर गर्व है। ऐसे समय में जब हमारे देश को एक खेल और समावेशी राष्ट्र के रूप में पहचाना जा रहा है, इतने बड़े टूर्नामेंट का आयोजन करना एक बहुत बड़ा सम्मान है। पैरा एथलीटों के उल्लेखनीय प्रदर्शन ने लचीलेपन और दृढ़ संकल्प के अर्थ को फिर से परिभाषित किया है, जिससे दुनिया भर के खिलाड़ियों और आम लोगों दोनों को प्रेरणा मिली है। उनकी उपलब्धियों ने एक सामूहिक विश्वास जगाया है कि कोई भी चुनौती अजेय नहीं है। बाधाओं को तोड़कर और नए मानक स्थापित करके, पैरा एथलीटों ने एक उभरते खेल केंद्र के रूप में भारत की पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लाखों लोगों को खेल को जीवन के तरीके के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने क्या कहा-
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, हमारा 74 एथलीटों का दल भाग ले रहा है जो बात का प्रमाण है कि देश में पैरा-स्पोर्ट्स ने कितनी गहरी जड़ें जमा ली हैं। सुमित अंतिल, प्रीति पाल, दीप्ति जीवनजी, धरमबीर नैन और प्रवीण कुमार जैसे चैंपियन घरेलू मैदान पर प्रतिस्पर्धा करेंगे।
डब्ल्यूपीएसी की मेज़बानी भारत की वैश्विक आयोजनों की नियमित मेज़बानी और बड़ी बहु-खेल चैंपियनशिप आयोजित करने की अपनी क्षमताओं का परीक्षण करने की योजना का हिस्सा है। डॉ. मंडाविया ने कहा: "हम 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की योजना बनाने में गहराई से जुटे हैं, और हमारी नज़र 2036 में ओलंपिक खेलों की मेज़बानी पर है, जिसकी महत्वाकांक्षाएँ बुनियादी ढाँचे, अवसरों और अनगिनत युवाओं के खेल के सपनों को गति देंगी। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है, "खेल न केवल चैंपियन बनाते हैं; बल्कि यह शांति, प्रगति और स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देते हैं।" यही हमारी खेल यात्रा का मार्गदर्शक है।
डॉ. मंडाविया ने यह भी बताया कि डब्ल्यूपीएसी क्षमता निर्माण को कैसे बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा: "बुनियादी ढाँचे या महत्वाकांक्षा से परे एक गहरी विरासत छिपी है: एक बदली हुई मानसिकता। हम अपने पीछे सुलभ स्थल, पैरा-एथलीटों के लिए मज़बूत समर्थन प्रणालियाँ और खेलों में समान अवसर के बारे में एक नए सिरे से राष्ट्रीय संवाद छोड़ जाएँगे। ये सच्चे परिणाम हैं जो पदक मिलने के बाद भी लंबे समय तक बने रहेंगे।"
कौन-कौन उद्घाटन समारोह में रहा उपस्थित-
समारोह में खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सासंद एवं अभिनेत्री कंगना रानौत के अलावा भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया और विश्व पैरा एथलेटिक्स समिति के प्रमुख पॉल फिट्जगेराल्ड भी उपस्थित थे। बता दें कि पुरुषों के लिए 104 और महिलाओं के लिए 84 स्पर्धाएं होंगी, एक मिश्रित वर्ग की स्पर्धा भी होगी। एथलीट पहली बार यहां बिछे नए मोंडो ट्रैक पर हिस्सा लेंगे।
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