नई दिल्ली: वाराणसी से दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) को जोड़ने वाले ऐतिहासिक मालवीय पुल पर 23 दिसंबर से फिर बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई दी गई है। बता दें कि 22 दिनों तक ब्रिज पर ड्रेनेज स्पाउट एक्सपेंशन जॉइंट मरम्मत काम के लिए प्रशासन ने ये फैसला लिया है। इसके चलते वाराणसी से चंदौली आने जाने वालों की मुश्किलें थोड़ी बढ़ेगी। पुल के मरम्मत का यह काम 20 दिसंबर से शुरू होना था। इसके लिए वाहनों के आवागमन पर रोक भी लगाई गई थी, लेकिन पहले ही दिन व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण इस फैसले को वापस ले लिया गया था और अब फिर कुछ छूट के साथ इस काम को मंगलवार से शुरू किया गया है।
वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की ओर से मिले जानकारी के मुताबिक आज से 13 जनवरी तक इस पुल पर पैदल यात्रियों के साथ दो पहिया वाहन, ऑटो, ई रिक्शा, एम्बुलेंस और हल्के शव वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।
यहां से आ सकेंगे वाराणसी
नए निर्देशों के मुताबिक सभी वाहन अब रामनगर, टेंगरा मोड़ होते हुए नेशनल हाईवे से अमरा अखरी बाई पास से शहर में प्रवेश करेंगे। वहीं लौटूबीर अंडरपास पर भी बैरियर लगाए गए हैं। जिससे मरीजों को बीएचयू और ट्रामा सेंटर आने में परेशानी न हो।
ट्रैफिक पुलिस की रहेगी तैनाती
एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्रा ने बताया कि पैदल और दो पहिया वाहन के साथ ऑटो और रिक्शा को भी पुल के मरम्मत के दौरान आवागमन में छूट दी गई है, लेकिन बड़े वाहन जैसे चार पहिया, ई बसें, माल वाहक गाड़ियां 23 दिसम्बर से मालवीय पुल से नहीं आ जा सकेंगे। ट्रैफिक डायवर्जन के लिए बाकायदा पुल के दोनों तरफ ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी भी लगाई जाएगी, ताकि यातयात व्यवस्था सुगमता से चल सकें।
138 साल पुराना है ब्रिज
वाराणसी में गंगा में बना मालवीय ब्रिज 138 साल पुराना ब्रिज है.जिसके ऊपरी हिस्से पर सड़क मार्ग और नीचे बिहार के रास्ते बंगाल जाने वाली रेल लाइन है। हालांकि इस रिपेयरिंग वर्क के दौरान रेल लाइन पर संचालन आम दिनों की तरह ही जारी रहेगा। इस पुल को राजघाट पुल के नाम से भी जानते है।अंग्रेजों के समय इसे डफरिन पुल कहा जाता था लेकिन आजादी के बाद इसे मालवीय पुल नाम दिया गया। गंगा पर बना यह पुल अपने आप में देश का सबसे पुराने पुलों में से एक है।
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