देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा, देश के विकास में वाधा बने राहुल गांधी न संसद चलने देते न देश के विकास के पहिये को चलने देते हैं। अपनी नासमझी और जिद से कांग्रेस पार्टी का सत्यानाश करने वाले सोनिया गांधी के सुपुत्र कांग्रेस पार्टी के लिये काल बन गये। पार्टी के बाद अब देश को बर्बाद करने में लग गये। आजादी के बाद से आज तक देश में कोई एैसा विरोधी दल नेता नहीं हुआ जो देश के सम्मान को विदेश में ठेस पहुचाये। एैसा नहीं की उनकी मां ये नहीं समझती हों आखिर उन्होंने इस देश को 10 वर्ष अपनी उंगली पर नचा कर चलाया है। कांग्रेस पार्टी के एक से एक कद्दावर नेता प्रणव मुखर्जी और अर्जुन सिंह को छोड़ कर मनमोहन सिंह जैसे कठपुतली को दो बार प्रधानमंत्री बनाया है। हो सकता है राहुल गांधी के देश विरोधी एजेंडा में उनकी सहमति हो या पुत्र मोह मे फस कर ध्रतराष्ट्र की तरह राहुल में दुर्योधन का रूप देख रही हो और उम्मीद कर रही हो कि देश का ताना बाना ध्वस्त करनें से, विघटन करने से, अराजकता फैलने से उनके बेटे को राजगद्दी मिल जाये।
दुश्मन देशों द्वारा भारत में किसी एजेंसी या राजनैतिक पार्टी को आर्थिक मदद करने का रास्ता तो मोदी सरकार ने बन्द कर दिया। अब देश के खिलाफ बोलने वालों की जुबान काटने का वक्त आ गया है। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सहन शीलता की प्रशंसा करें या राहुल की बात को सच समझें कि नरेन्द्र मोदी डरपोक हैं, वे राहुल से डरते हंै। राहुल के देश विरोधी कार्यकलाप और बोल मांफी के योग्य नहीं है। लेकिन उन पर कोई कार्यवाही भी नहीं हो रही है। यदि राहुल के विदेश मे दिये गये ब्यानों पर नजर डालें या ससंद में दिये गये भाषणों पर गहराई से विचार करें या कांग्रेस पार्टी को जिस राह पर ले जा रहे हैं। वे कांग्रेसी राजकुमार के तौर तरीकों पर गौर करें तो लगता है कि मोदी की बुराई से ज्यादा वे देश की बदनामी करके राष्ट्रद्रोह का काम कर रहे हैं। पर्याप्त कारण हैं कि उन्हें जेल में डाला जा सकता है।
यहां समस्या ये है कि भारत एक संवेदनशील सहिष्णुता वाला देश है। यहां के लोग अत्यंत दयालु प्रवृति के हैं। जेल जाते ही राहुल को सहानुभूति का लाभ मिल सकता है। यदि नरेन्द्र मोदी का आंकलन एैसा है तो वे सही है। मोदी चाहते हैं कि ये कार्य जनता द्वारा हो, दिन पर दिन राहुल की सोच की पर्ते खुलती जा रहीे हैं, वे एक्सपोज होते जा रहे हैं। उनकी मानसिकता लोगों को पता लग रही है। उनकी हरकतों से लगने लगा है कि वे छोटी सी छोटी बातें या घटनाओं को मुद्दा बना कर देश को अस्थिर करने का मौका तलाशते हैं। आखिर ये कब तक चलेगा?

ये तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया जानती है कि नरेन्द्र मोदी भारत माता का लाड़ला बेटा, जनता का प्रिय नेता, बहादुर और निडर है। उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि वो युद्ध भी एैसे लड़ता है कि लड़ाई भी जीते दुश्मनों को मिटा भी दें और अपनी फौज और राष्ट्र को नुकसान भी न होने दें। मोदी राज में परमाणु हथियार सम्पन्न पाकिस्तान को तीन बार पटकनी मिल चुकी है वो भी बिना भारत के किसी जन धन की बड़ी कोई हानि के। कुछ तो है कि मोदी के दुश्मन बने पड़ौसी देशों के मुखिया हाशियों पर चले जाते हैं या पदच्यूत हो जाते हैं। या तो वे मिट जाते हैं, मिट गये हैं या तुरन्त अपना रास्ता सुधार कर भारत सरकार के साथ संबंध सुधार लेते हैं। पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका, नेपाल और मालद्वीप इसके जीते जागते उदाहरण हैं।
राहुल गांधी तो नरेन्द्र मोदी के आगे इतने बौने हैं कि ऊपर उठा कर देखें तो पूरी गर्दन टेड़ी करके भी नहीं देख पायेंगे। एक एक करके मोदी ने उन्हें सभी जगह परास्त कर डाला। पूरे देश से कांग्रेस का सफाया हो गया। राहुल हैं कि मोदी से एक मुहावरे की तरह कहते हैं कि “अबकी बार मार फिर बताता हूँ” मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे कांग्रेस के मजबूत किले मोदी ने तहस नहस कर डाले। मोदी ने ईस्ट में भी कांग्रेस को निबटा दिया फिर भी ये कांग्रेस का दुर्भाग्य ही है कि पार्टी केे नेता चाह कर भी राहुल को हटा नहीं पा रहे हैं। राहुल की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी ने या उन्होंने खुद पिछले 11 वर्षों के मोदी राज में बीसियों मुद्दे उठाये मोदी के हर फैसलों पर उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया। जब जनता पर इसका असर नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट तक गये और वहां से सभी मुद्दों पर मार खा कर आ गये। एक बार भी उनकी बात नहीं सुनी गयी या सच नहीं निकली। जीएसटी, नोटबन्दी, राफेल, वेक्सीन जैसे दस वर्ष में दो दर्जन मुद्दों पर चिल्ला चिल्ला कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से सारे मुद्दे टांय टांय फिस हो गये।
चाय वाले से लेकर अडानी, अम्बानी से चलते हुये मोदी डरपोक है, डरता है का सफर राहुल ने एक बच्चे की तरह पूरा कर लिया पर मोदी का कुछ नहीं बिगड़ा। खुद उनकी बुद्धि की पोल खुल गयी। राहुल ने चीन से भारतीय फौजी मार खा गये, पिट गये, सर्जिेकल स्ट्राईक, सिंदूर आपरेशन घटिया टिप्पणियंा की, देश की योग्यता पर शक किया, बदनामी की और विदेश में जाकर भी बुराई की, अमेरिका में उस मुसलमान महिला सांसद से मिलने गये। जिसने पाकिस्तान के हक में बोल कर कश्मीर पर भारत का अनाधिकृत कब्जा बताया था।
संसद की बात करें तो आंख मारने से लेकर मोदी के गले में जफ्फी डालने की कोशिश से संसद में प्रपत्र, फाईलें फाड़ी। एैसी एैसी हरकतें की हैं जो एक विपक्ष के नेता तो क्या साधारण संसद सदस्य को भी शोभा नहीं देता। राहुल कहते हैं कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जाता जबकि वे घंटों घंटों तक बोला करते हैं जबकि उनकी बातें विषयांतर होती है। उन्हें खुद समझ नहीं आता कि वे क्या कहना चाहते हैं, उनकी बोली में तारतम्य नहीं रहता, सुनने वाला समझ नहीं पाता है। राहुल की पार्टी ने जब भी किसी विषय पर बोलने का नोटिस दिया है, उनकी पार्टी को बोलने का अवसर मिला है। लेकिन राहुल गांधी नोटिस देने के बाद विषय पर बोलने का समय मिलता है तो उस समय या गायब हो जाते हैं या किसी न किसी मुद्दे को उठा कर मुख्य विषय पर चर्चा नहीं होने देते। मंहगाई पर बोलने के लिये जब समय आया तो सदन से भाग निकले। अभी हाल में लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव लाये उस पर बहस का दिन निर्धारित किया गया। बहस करने के बजाय ईरान के बहाने पतली गली से फूट गये। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बीच में कोई भी बात को लेकर चिल्लानें लगे और भाषण में शोर शराबा किया। उन्हें भाषण सुनने के बाद बोलने के बहुत अवसर मिलते हैं। संसदीय परम्पराओं, कर्तव्यों, नियमों का पालन नहीं करते। जिस तरह छोटे बच्चे मनमुताबिक खिलौना नहीं मिलने पर हरकते करते हैं उसी तरह राहुल गांधी का व्यवहार रहता है। उसी तरह इसी सत्र में महिला सांसदों को नरेन्द्र मोदी का घिराव कर बदतमीजी करने भेज दिया था।
सबसे नया नमूना जब ।प् पर दुनिया भर के विदेशी प्रतिनिधि, विश्व की बड़ी बड़ी कंपनियों के मालिक ब्म्व् आदि भारत आये तो उनके सामने नंगे बदन यूथ कांग्रेस के लोगों को प्रर्दशन करने भेज दिया, इसका क्या मतलब था। देश को बदनाम करना था। बाद में खुश होकर कह रहे थे कि कर दिया यूथ कांग्रेस ने जैसे उसे शाबाशी दे रहे हों। राहुल गांधी देश के विकास में कितना भी रोड़ा बने पर विकास के घोड़े को नहीं रोक पायेंगे। सेनानी परिवार के पुत्र राजीव गांधी और विदेशी मूल की सोनिया गांधी के ये सुपुत्र देश से ज्यादा विदेश पर भरोसा करते है और प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहें है। है न अजीब सी बात।

डाॅ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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