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शेख हसीना को मिली फांसी की सजा, मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के मामले में सुनाया गया फैसला

Sheikh Hasina sentenced to death in a case of alleged crimes against humanity

नई दिल्ली: सोमवार, 17 नवंबर को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हसीना को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला 2024 के जुलाई-अगस्त में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों में आया है, जिसमें हसीना की सरकार पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर क्रूर दमन का आरोप है। ट्रिब्यूनल ने हसीना की गैर-हाजिरी में यह फैसला सुनाया, जिसमें उन्हें तीन प्रमुख आरोपों—उकसावा, हत्या के आदेश देना और अपराधियों पर कार्रवाई न करने—में दोषी पाया गया। साथ ही, अदालत ने तीन दिनों के भीतर हसीना को गिरफ्तार करने का आदेश भी जारी किया है।

हसीना को दी गई फांसी की सजा

राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ। मामले में अभियोजकों ने दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हसीना सरकार की ओर से आदेश के बाद 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच ‘विद्रोह’ के दौरान 1,400 लोग मारे गए थे। 11 हजार से अधिक लोग हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए थे।

शेख हसीना ने जारी किया बयान

कोर्ट के फैसले से पहले शेख हसीना का बयान भी सामने आ गया था। अपने बयान में उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा बताया था। हसीना ने एक ऑडियो संदेश में कहा- "हमने इस तरह के हमलों और मामलों को बहुत देखा है। मुझे परवाह नहीं है, अल्लाह ने मुझे जीवन दिया है और एक दिन मेरी मौत आएगी, लेकिन मैं देश के लोगों के लिए काम कर रही हूं और ऐसा करना जारी रखूंगी। हमारे संविधान के अनुच्छेद 7 (बी) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधियों को बलपूर्वक सत्ता से हटाता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। यूनुस ने यही (मुझे बलपूर्वक सत्ता से हटाया) किया। अगर कोई अदालत में झूठी शिकायत करता है, तो उस पर कानून के तहत मुकदमा चलता है और एक दिन ऐसा होगा ही।" उन्होंने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से सजा के बारे में चिंता ना करने को कहा है।

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