नई दिल्ली: मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, ज्ञान, और विवेक की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को कला और शिक्षा के क्षेत्र में कामयाबी मिलती है। कहते हैं कि अगर जिस भी व्यक्ति पर मां सरस्वती की कृपा रहती है उसे अपने जीवन में कभी भी असफलता का मुंह नहीं देखना पड़ता है। उसे अपने जीवन में अपार सफलता की प्राप्ति होती है। बता दें कि हर साल की भांति ही इस बार भी बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा होगी। पंचांग के अनुसार, हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन सरस्वती पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 2 फरवरी 2025 को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर होगा। पंचमी तिथि समाप्त 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 51 मिनट पर होगा। सरस्वती पूजा 2 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी। वहीं सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 9 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
बता दें कि बसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां हंसवाहिनी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला और शिल्प-कला की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही माता सरस्वती का जन्म हुआ था। कहते हैं कि इसी दिन देवी सरस्वती श्वेत कमल पर विराजमान हो कर और हाथों में वीणा, माला और पुस्तक लिए प्रकट हुई थीं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। उदय इंडिया एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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