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'वंदे मातरम्' का सम्मान बेहद अहम

Respect for 'Vande Mataram' is very important

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलाम्
मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलाम्
मातरम्।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्॥१॥

सप्तकोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले द्विसप्तकोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं
नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं
मातरम् ॥२॥

तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे ॥३॥

त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्
नमामि कमलाम्
अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलाम्
मातरम् ॥४॥

वन्दे मातरम्
श्यामलाम् सरलाम्
सुस्मिताम् भूषिताम्
धरणीं भरणीं
मातरम् ॥५॥

 

यह मात्र कुछ पंक्तियां नहीं हैं। यह है हमारे भारत देश का वह गीत जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक अहम भूमिका निभाई। यह वह गीत है जो भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए अनमोल है। ऐसे में इस गीत ने अपने 150 वर्ष पूरे कर लिए हैं। जिसको लेकर देश में एक विशेष प्रकार का जश्न मनाया जा रहा है जो कि एक जश्न नहीं बल्कि राष्ट्रभावना और भारत के इतिहास को जागृत रखने  की एक पहल है। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणादायक नारा था। 1 अक्टूबर को मंत्रिमंडल ने 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशव्यापी समारोहों को मंजूरी दी, ताकि नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों को इस गीत की मूल, क्रांतिकारी भावना से जोड़ने के लिए एक सशक्त आंदोलन को बढ़ावा दिया जा सके। ये समारोह इस शाश्वत संदेश का सम्मान करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि इसकी विरासत को पूरी तरह से मनाया जाए और अगली पीढ़ी के दिलों में बसाया जाए। 
इस बीच केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक अहम फैसला लिया जो कि वंदे मातरम के मूल को जागृत रखने के लिए बेहद जरुरी है। केंद्र सरकार ने एक नई आधिकारिक गाइडलाइंस जारी की हैं। यह निर्देश 28 जनवरी 2026 को जारी एक औपचारिक सरकारी आदेश के माध्यम से लागू किए गए हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन और प्रस्तुति के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करना है, जैसा कि राष्ट्रीय गान के लिए पहले से निर्धारित है। क्योंकि कई जगहों पर यह देखा गया है कि जब राष्ट्रगीत का गायन होता है तो लोग इसका सम्मान नहीं करते। बस एक गीत की तरह सुनकर चले जाते हैं पर अब वंदे मातरम् के गायन के दौरान भी राष्ट्रगान की तरह ही प्रोटोकॉल को फालो करना होगा। 3 मिनट 10 सेकंड के 6 छंद वाले वंदे मातरम को सरकारी प्रोग्राम में बजाने या गाने को अनिवार्य किया गया है। 10 पेज के आदेश में गृह मंत्रालय की ओर से यह भी साफ किया गया है कि अगर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को एक साथ गाया या बजाया जाता है तो वंदे मातरम पहले बजाया जाएगा, इस दौरान लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में क्या-क्या हैं मुख्य बिंदु :

  1. नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाता है, तो उसके पूर्ण छह छंद (6 stanzas) को प्राथमिकता दी जाएगी। अब तक केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नए निर्देश में मूल विस्तारित रूप को मान्यता दी गई है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुसार प्रस्तुति का स्वरूप तय किया जा सकता है, पर आधिकारिक रूप से संपूर्ण गीत को मानक माना गया है।
  2. अब विशेष सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के आधिकारिक छह अंतरों का गायन या वादन अनिवार्य होगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है।
  3. यदि किसी समारोह में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों का आयोजन हो, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। यह क्रम अब औपचारिक रूप से निर्धारित किया गया है ताकि कार्यक्रमों में एकरूपता बनी रहे।
  4. सम्मान और शिष्टाचार के तहत यह भी निर्देश दिया गया है कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन के समय उपस्थित लोगों को सम्मानपूर्वक खड़ा होना चाहिए, ठीक उसी प्रकार जैसे राष्ट्रीय गान के समय खड़े होते हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के प्रति समान आदर सुनिश्चित करना है।
  5. तिरंगा फहराने, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजेगा। सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।

कहां-कहां लागू होगी ये गाइडलाइन?

ये गाइडलाइन मुख्य रूप से सरकारी समारोहों, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आयोजनों, शैक्षणिक संस्थानों के आधिकारिक कार्यक्रमों तथा अन्य सरकारी प्रोटोकॉल वाले आयोजनों पर लागू होंगी। यह कोई दंडात्मक कानून नहीं है, बल्कि एक प्रशासनिक प्रोटोकॉल है जिसे सरकारी कार्यक्रमों में अपनाया जाएगा।

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