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राहुल गांधी न कांग्रेसी हैं न देशभक्त

Rahul Gandhi is neither a Congressman nor a patriot


डॉ विजय खैरा


राहुल गाँधी की राजनीति में आने और फिर कांग्रेस पार्टी पर कब्जा करने के बात से ही पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से हटती जा रही है। पार्टी का पूरा एजेंडा ही बदल दिया गया है। वो पार्टी जिसने आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और जो पार्टी देश को सर्वोपरि मानती थी, आज उस पार्टी का ये हाल हो गया कि यह पहले अपना स्वार्थ, अपना परिवार, कुर्सी पाने की लालसा में देश चाहे भाड़ में जाये को अपना सिद्धान्त माननें लगी है। कांग्रेस हाईकमान यानि राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और उनकी कोटरी के सदस्य दिग्विजय सिंह, पी चिदंबरम , वेनू गोपाल, जयराम रमेश,साम पित्रोधा आदि  देश को बर्बाद करने में  कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हाल में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मीटिंग में प्रस्ताव पास किया है कि वंदे मातरम् की केवल दो पंक्तियां ही गाएंगे और पूरा राष्ट्रीय गीत नहीं गाएंगे। इसके पीछे इस सीमा तक तुष्टिकरण किया जा रहा है कि देश मे हिंदू और मुस्लिम को बाँट दिया जाये । मुस्लिम को खुश करने के लिए उनके एकजुट वोट हासिल करने के लिए कांग्रेस पार्टी को देश की कोई परवाह नहीं। यह पहली बार नहीं हुआ है, 1937 मैं भी नेहरू जी ने उस समय मुस्लिम लीग पार्टी के सर्वे सर्वा जिन्ना को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने न सिर्फ वन्देमातरम् की दो पंक्तियाँ बोलने की बात कही थी बल्कि मुसलमानों को अलग से कॉन्स्टीट्वेंसी बेन और अलग से वोट डालने का प्रस्ताव भी लिखा था। हालांकि आजादी के बाद ये नहीं हो सका। आज जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वन्दे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया है तो कांग्रेस पार्टी अपनी पुरानी नेहरू जी की बात और प्रस्ताव को दोहराने का प्रयास कर रही है जो देश के लिए अत्यंत घातक होगा। राहुल गाँधी की सोच कभी देश को एक सूत्र में बांधने की कभी नहीं रही है इसके विपरीत भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग द्वारा नारा लगाए जाने पर उनसे मिले। उनको शक्ति प्रदान करने के लिए उनका समर्थन किया था।

राहुल गाँधी का इतिहास खंगाले तो ऐसे न जाने उनकी कितनी करतूतें हैं जब उन्होंने देश बदनाम करने की कोशिश की है। उन लोगों का साथ दिया है जो प्रमाणित तौर पर भारत के दुश्मन हैं। राहुल अमेरिका में जाकर वहां की सांसद इलान ओमर से मिले जो हमेशा भारत की बुराई करती रही है और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताती है। भारत को कश्मीर खाली करने की बात करती है। राहुल को अमेरिका में यही एक औरत मुलाकात के लिए मिली। अमेरिका में भारत की बुराई करने पर व्हाट हाउस की राजकीय नर्तकी ने ये बात तक कही थी कि ऐसा आदमी जो अपने देश की बुराई विदेश में जाकर करता है उसे कभी उस देश के लोग प्रधानमंत्री नहंी चुन सकते।

कांग्रेस पार्टी के शासन मैं जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और सोनिया गांधी, राहुल गाँधी पार्टी के सर्वेसर्वा थे। सोनिया गाँधी तो यूपीए की अध्यक्ष थी और उन्हें सरकारी दर्जा भी मिला हुआ था। जब देश की रक्षा के लिए राफेल हवाई जहाज की खरीद को अति आवश्यक समझा गया तब भी दो हवाई जहाज तक नहीं खरीदे गए। पार्लियामेंट में तत्कालीन रक्षा मंत्री ऐ. के. एंटनी ने कहा कि जहाज खरीदने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं। आर्मी ने बुलेट प्रूफ जेकेट जवानों के लिए माँगी जब कश्मीर में अलगाववादी हमारी आर्मी के जवानों को पत्थर से मारते थे। सरकार ने जवानों को लौट कर मारने से मना किया हुआ था। बेचारे रोेजाना पिटते रहे। सरकार ने एक भी बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं खरीदी ये आर्मी को कमजोर करने का षडयंत्र भी हो सकता है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही आर्मी को बुलेट प्रूफ जैकेट्स दी और राफेल्स भी खरीदें और आज उनकी संख्या 36 है। पाकिस्तान और चीन से मुकाबला करने के लिए एक मजबूत ताकत हमारे पास आ गयी है। आसानी से समझ सकते हैं कि एक ओर कांग्रेस के नेताओं द्वारा देश को कमजोर करने का काम किया जा रहा था और दूसरी ओर नरेंद्र मोदी  द्वारा देश को ताकतवर बनाने का काम हो रहा है। चीन से लड़ाई होने पर राहुल गांधी ने बोला था कि भारत की फौज डोकलाम में पीछे हट गई है जो कि सफेद झूंठ निकला। क्या यह सोची समझी साजिश नहीं थी। भारत के जवानों  का उत्साह कम करने के लिए और देशवासियों को सरकार के खिलाफ उकसाने के लिए ये झूंठ बोला गया था। दुनिया को दिखाना था कि भारत चीन के आगे बहुत कमजोर है।

दोबारा फिर राहुल गाँधी ने पेंगोन झील पर भारतीय और चीनी जवानों के बीच हुई मुठभेड़ पर बोला था हिन्दुस्तानी जवानों की चीन द्वारा पिटाई की गयी है। एक दम सफेद झूठ बोलने में राहुल को शर्म तक नहीं आती है, अपनी ही फौज की बुराई करते हैं, अपने ही देश की बुराई करते हैं, अपने ही देश को बदनाम करते हैं और फिर बेशर्मों की तरह हंसते हैं। बाद में वे फोटो आए तो पता चला कि हिन्दुस्तानी जवानों ने चीनी जवानों को खूब पीटा है। यही फोटो कुछ अन्य देशों के समाचार पत्रों से भी आए।

जब देश की आर्मी ने पाकिस्तान में घुसकर मारा और रातों रात उनके अड्डे तबाह करके सारे हमारे जवान सुरक्षित वापस आ गए तब भी राहुल गांधी ने आर्मी को बधाई नहीं दी उल्टा, उनसे सबूत मांगने के पीछे पड़ गए। यही नहीं, दुबारा जब भारत की आर्मी ने पाकिस्तान में हवाई जहाज से जाकर उनके कई हवाई अड्डों पर हमला किया और उन्हें तबाह कर दिया तब भी राहुल गांधी झूंठ फैलाते रहे कि भारतीय हवाई जहाजों को पाकिस्तान ने गिरा दिया। ये सारी घटनायें देशद्रोही सोच के सबूत हैं।

आश्चर्य की बात तो ये हैं कि राहुल गांधी जब राजनीति में आए थे जब उनकी पार्टी सत्ता में थी तब से ही देश को कमजोर करने का प्रयास चालू है। अब वे सत्ता से बाहर हैं तो देश के खिलाफ खुला एजेंडा विदेशों में चलाने लगे, आतंकवादियों का उत्साह बढाने में लगे हुये हैं। एक बार राहुल चीन के राजदूत से मिलने के लिए देर रात में गए। सुबह जब उनसे पूछा गया तो उनका जवाब था कि वो चीनी राजदूत से मिलने नहीं गए ना ही चीन की इमबैसी में गए। बाद में चीन की तरफ से बुलेटिन निकला जिसमें राहुल गाँधी के चीनी राजदूत से मिलने की बात प्रकाशित हुई तब राहुल गांधी ने माना कि वो मिलने के लिये चीनी एमबेंसी में गए थे। यदि उनका मन साफ था तो ये बात क्यों छुपायी। इस घटना से पूरा देश स्तब्ध रह गया कि अंदर ही अंदर चीन से मिल कर न जाने राहुल गांधी क्या खिचड़ी पका रहे हैं।

अभी राहुल गांधी ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 30 दिन के अंदर हटा देंगे यहां तक कि गृह मंत्री को भी धमकी दी, इन बातों से तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये बात नशे में बोलते रहते हैं या फिर उन्हें विदेशी ताकतों खासतौर से दीप इस्टेट से छुपा हुआ सहयोग और भारत को डामाडोल करने का आश्वासन मिला हुआ है।

कांग्रेसी नेताओं का जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े गैंग यानि भारत तेरे टुकड़े होंगे, उनसे जाकर मिलना और अफजल गुरु जैसे आतंकी के पक्ष में बोलना बम्बई में आतंकियो द्वारा सैकड़ों लोगों को मार डालने पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नही कर रहा और दक्षिणी भारत में रोहित बेमुला की मौत पर दलित कार्ड खेलना, देश भर में बवंडर मचाना, ये सारे काम राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी ने किये थे। बाद मे,ं जांच में रोहित बेमुला दलित ही नहीं पाया गया। कई बार ये भी हुआ है विदेशी अखबारों में देश के खिलाफ कानून व्यवस्था और आर्थिक समस्याओं तथा पाकिस्तान के पक्ष में खबरें छपवाई जाती हैं फिर राहुल गांधी उन्हीं खबरों का सहारा लेकर देशभर में शोर मचाते है, सरकार को बदनाम करते हैं। मोदी जी को तरह तरह के गंदे गंदे विशेषणों से नवाजते हैं। बाद में ये सारा झूठ निकलता है उनकी टांय टांय फिस हो जाती है फिर भी वे सुधरते नहीं। इस तरह राहुल गाँधी का लोकप्रियता का ग्राफ लगभग जीरो पर आ रहा है। कांग्रेस को भी सिद्धांतों से दूर करके चुनाव दर चुनाव हार कर पटरी पर ला दिया है। जनता की समस्याओं और मुद्दों से राहुल को कोई लेना देना नहीं है। क्या मोदी जी को गालियां देने से, उन्हें गद्दार कहने से, उन्हें चोर कहने से, या अडानी और अंबानी को दिन भर भला बुरा कहने से, जनता का कोई हित होगा। शायद वो सोचतें होंगे कि अडानी अंबानी को गालियां देने से, उनके ऊपर आरोप लगाने से, उन्हें भारी भरकम रकम या चंदा मिल जायेगा। इतिहास में कभी कोई ऐसा स्वार्थी देश को बदनाम करने वाला संसद में नेता विपक्ष नहीं रहा है।

(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

 

 

 

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