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वाराणसी में देव दीपावली को लेकर तैयारियां शुरु, 10 लाख से अधिक दीये अर्धचंद्राकार घाटों को करेंगे रौशन

Preparations begin for Dev Deepawali in Varanasi, with over 1 million diyas lighting up the crescent-shaped ghats

नई दिल्ली: यूपी के वाराणसी में इस बार देव दीपावली के मौके पर भव्य उत्सव मनाए जाने की तैयारी है। जिसको लेकर तैयारियां शुरु हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी काशी में होने वाले देव दीपावली को  लेकर सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां की जा रही हैं। बता दें कि  5 नवंबर को देव दीपावली के मौके पर वाराणसी के घाटों पर 10 लाख से अधिक दीये अर्धचंद्राकार घाटों को रोशन करेंगे। इन 10 लाख दीयों में एक लाख दिए गाय के गोबर से बने होंगे, जो पर्यावरण के अनुकूल होंगे।

 सरकार द्वारा वाराणसी में होने वाले देव दीपावली के आयोजन को राजकीय मेले का दर्जा दिए जाने से इसका उत्साह और भी बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक इस बार बी गंगा आरती के साथ लेजर शो और संगीत के साथ पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र होगी। माना जा रहा है कि वाराणसी के घाटों पर होने वाले इस दिव्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त और पर्यटक जमा होंगे। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए घाटों पर रोशनी की आकर्षक व्यवस्था की जाएगी और साज-सजावट के साथ विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा।

राजघाट पर 1 से 4 नवंबर तक चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव

5 नवंबर को होने वाली देव दीपावली से पहले राजघाट पर 1 से 4 नवंबर तक चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव, 'गंगा महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा का प्रदर्शन होगा। इस अनुभव को और समृद्ध बनाने के लिए, चेतसिंह घाट पर एक लेज़र शो काशी की पौराणिक कथाओं का वर्णन करेगा। साथ ही, गंगा की रेती पर प्रदूषण-मुक्त हरित आतिशबाजी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी।

काशी में देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?

त्रिपुरासुर के वध का दिन कार्तिक पूर्णिमा का दिन था। त्रिपुरासुर के वध के बाद देवी- देवता बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने भगवान शिव की नगरी काशी में दीप दान कर खुशियां मनाई। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली कहा जाने लगा। काशी यानी वाराणसी में देव दिवाली का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। 

देव दीपावली का क्या महत्व है?

देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा के शुभ दिन पर मनाई जाती है, जिसमें भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के वध का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन देवता धरती पर आते हैं और दीये जलाकर अपना उत्सव मनाते हैं। देव दीपावली का महत्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और इस दिन दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि आती है और देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। वाराणसी में गंगा घाटों पर दीये जलाकर इस पर्व का भव्य आयोजन किया जाता है। 

दिवाली पर जगमग होगी अयोध्या

एक खबर दिवाली को लेकर भी है। इस बार दिवाली के मौके पर अयोध्या में भव्य दीपोत्सव समारोह आयोजित होगा। 18 से 20 अक्टूबर, 2025 तक होने वाले अब तक के सबसे भव्य दीपोत्सव समारोह के लिए भगवान राम की अयोध्या में तैयारी जारी हैं। 

इस मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से 26 लाख से अधिक दीयों से सरयू नदी के घाटों को रोशन किया जाएगा।

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