WRITER- सात्विक उपाध्याय
वाराणसी : सोमवार, 18 दिसंबर को पीएम मोदी वाराणसी दौरे पर हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने वाराणसी के उमरहां स्थित नवनिर्मित स्वर्वेद महामंदिर का लोकार्पण किया। पीएम मोदी के साथ इस मौके पर उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ इस केंद्र का दौरा किया। यहां 25,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं। सात मंजिला इस भव्य महामंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के छंद उकेरे गए हैं। स्वर्वेद महामंदिर प्राचीन दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक मिलाजुला रूप है।
स्वर्वेद मंदिर का निर्माण पिछले 19 वर्षो से हो रहा था। इस मंदिर के निर्माण में कुल लागत 700 करोड़ से भी अधिक की आई है। बता दें इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। खास बात यह है कि इस मंदिर में कुल 25000 लोग एक साथ योग साधना कर सकते हैं। योग साधना मंदिर के अलग-अलग तल पर अलग-अलग चरण और श्रेणी में की जाएगी।

विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र।
स्वर्वेद महामंदिर 180 फीट ऊंचा है। इसकी दीवारों पर 4000 दोहे लिखे हैं।
मकराना संगमरमर पर 3137 स्वर्वेद छंद उत्कीर्ण।
25,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं।
125 पंखुड़ी वाला कमल गुंबद।
सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के जीवन पर यांत्रिकी प्रस्तुति।
इसमें सामाजिक कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन शामिल है।
ग्रामीण भारत की भलाई के लिए अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का केंद्र।
आध्यात्मिकता के शिखर से प्रेरित- स्वर्वेद।
भारतीय विरासत की झलक दर्शाती जटिल नक्काशीदार बलुआ पत्थर की संरचनाएँ।
मंदिर की दीवारों के चारों ओर गुलाबी बलुआ पत्थर की सजावट।
औषधीय जड़ी-बूटियों वाला उत्तम उद्यान।
मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर सद्गुरु सदाफल महाराज के आध्यात्मिक जीवन पर आधारित प्रदर्शनी, गुफा व सत्संग हाल बनाया गया है।
स्वर्वेद महामंदिर दुनिया का अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में किसी देवी-देवता की प्रतिमा नहीं है। मंदिर में पूजा की जगह ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए योग साधना की जाएगी।गुरु परंपरा को समर्पित इस महामंदिर को योग साधकों की साधना के लिए तैयार किया गया है। मंदिर आज से आम साधकों व श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा। बता दें कि लगातार 600 कारीगर, 200 मजदूर व 15 इंजीनियरों की टीम ने काम किया, तब जाकर स्वर्वेद महामंदिर (Swaraveda Temple) अपने स्वरूप में सामने आया। अभी भी महामंदिर को पूरी तरह से बनकर तैयार होने में लगभग दो साल लगेंगे।

प्रथम तल पर स्वर्वेद प्रथम मंडल के दोहे, बाहरी दीवारों पर 28 प्रसंग, जो वेद, उपनिषद, गीता, महाभारत, रामायण की थीम लेकर बनाए गए हैं। प्रथम तल से पांचवें तल तक की आंतरिक दीवारों पर स्वर्वेद के दोहे व बाहरी दीवारों पर उपनिषद, गीता, रामायण के मार्मिक प्रसंग दर्शाए गए हैं। आधुनिक तकनीकी से लैस दो आडिटोरियम हैं। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा पथ व फौव्वारे लगाए गए हैं। मंदिर के अंदर गुफा का निर्माम भी किया गया है जो कि योग साधना के ऑडिटोरिम से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। मंदिर के के शीर्ष पर एक विशाल कमल पुष्प का निर्माण भी किया गया है। स्वर्वेद महामंदिर योगी सद्गुरु महर्षि सदाफलदेव की अमूल्य कृति है। स्वर्वेद का अर्थ है आत्मा के जरिये ज्ञान की प्राप्ति।
Comments (1)
S
Kafi dino se pratiksha thi is mandir ke banne ki.. Jald hi pahucha jayega