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“भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस को लोगों ने पुरस्कृत किया’

“People rewarded zero tolerance towards corruption”

देश ने एक सफल चुनाव अभियान को पार करते हुए विश्व को दिखा दिया है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव अभियान था। देश की जनता ने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव अभियान में, जनता ने हमें चुना हैं। मैं कुछ लोगों की पीड़ा समझ सकता हूं कि लगातार झूठ चलाने के बावजूद भी उनकी घोर पराजय हुई और लोकतंत्र के, आदरणीय सभापति जी, ये विश्व का सबसे बड़ा चुनाव अभियान और उसमें भारत की जनता ने हमें तीसरी बार देश की सेवा करने का मौका दिया है। ये अपने आप में लोकतांत्रिक विश्व के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है, बहुत ही गौरवपूर्ण घटना है। हमें हर कसौटी पर कसने के बाद देश की जनता ने ये जनादेश दिया है। जनता ने हमारे 10 साल के ट्रैक रिकॉर्ड को देखा है। जनता ने देखा है कि गरीबों के कल्याण के लिए हमने जिस समर्पण- भाव से जनसेवा ही प्रथम सेवा इस मंत्र को कृतार्थ करते हुए, हमने जो कार्य किया है उसके कारण 10 साल में 25 करोड़ गरीब गरीबी से बाहर निकले हैं। देश की आजादी के कालखंड में इतने कम समय में, इतने लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का ये सफल प्रयास इस चुनाव में हमारे लिए आशीर्वाद का कारण बना है।

हम 2014 में जब पहली बार जीतकर के आए थे तो चुनाव के अभियान में भी हमने कहा था कि हमारा करप्शन के प्रति zero tolerance रहेगा। और आज मुझे गर्व है कि हमारे सरकार ने देश का सामान्य नागरिक जो करप्शन के कारण पीड़ित है, देश को करप्शन ने दीमक की तरह खोखला कर दिया है। ऐसे में भ्रष्टाचार के प्रति हमारी जो zero tolerance नीति है, आज देश ने हमें उसके लिए आशीर्वाद दिया है। आज दुनिया भर में भारत की साख बढ़ी है। आज विश्व में भारत का गौरव हो रहा है और भारत की तरफ देखने का नजरिया भी एक गौरवपूर्ण नजरिया हर भारतवासी अनुभव करता है।

देश की जनता ने देखा है कि हमारा एकमात्र लक्ष्य nation first है, भारत सर्वप्रथम है। हमारे हर नीति, हमारे हर निर्णय, हमारे हर कार्य का एक ही तराजू रहा है कि भारत प्रथम और भारत की प्रथम की भावना के साथ देश में जो आवश्यक reform थे, उस reform को भी हमने लगातार जारी रखा हैं। 10 वर्ष में हमारी सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ इस मंत्र को लेकर के लगातार देश के सभी लोगों का कल्याण करने का प्रयास करती रही है। हम उस सिद्धातों को समर्पित हैं जिसमें भारत के संविधान के स्प्रिट के अनुसार सर्वपंथ समभाव उस विचार को सर्वोपरि रखते हुए हमने देश की सेवा करने प्रयास किया हैं।

इस देश ने लंबे अरसे तक तुष्टिकरण की राजनीति भी देखी, इस देश ने लंबे अरसे तक तुष्टीकरण का गवर्नेंस का मॉडल भी देखा। देश ने पहली बार secularism का एक पूरा हमने जो प्रयास किया और वो हमने तुष्टीकरण नहीं, संतुष्टीकरण और संतुष्टीकरण के विचार को लेकर के हम चले हैं। और जब हम संतुष्टीकरण की बात करते हैं तो इसका मतलब है कि हर योजना का सैचुरेशन। गवर्नेंस को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने की हमारी जो संकल्पना है इसको परिपूर्ण करना। और जब हम सैचुरेशन के सिद्धांत को लेकर चलते हैं तब सैचुरेशन सच्चे अर्थ में सामाजिक न्याय होता है। सैचुरेशन सच्चे अर्थ में secularism होता है और उसी को देश की जनता ने हमें तीसरी बार बिठाकर के मोहर लगा दी है।                   

इस चुनाव ने इस बात को सिद्ध किया है कि भारत की जनता कितनी परिपक्व है, भारत की जनता कितने विवेकपूर्ण से और कितने उच्च आदर्शों को लेकर के अपने विवेक का सद्बुद्धि से उपयोग करती है। और उसी का नतीजा है कि आज तीसरी बार हम आपके सामने, देश की जनता के सामने नम्रतापूर्वक सेवा करने के लिए उपस्थित हुए हैं। देश की जनता ने हमारी नीतियों को देखा है। हमारी नीयत, हमारी निष्ठा उस पर देश की जनता ने भरोसा किया है। इस चुनाव में हम जनता के बीच एक बड़े संकल्प के साथ देश की जनता के पास आशीर्वाद मांगने के लिए गए थे। और हमने  आशीर्वाद मांगा था विकसित भारत के हमारे संकल्प के लिए। हमने विकसित भारत के निर्माण के लिए एक प्रतिबद्धता के साथ, एक शुभनिष्ठा के साथ, जन सामान्य का कल्याण करने के इरादे से हम गए थे। जनता ने विकसित भारत के संकल्प को चार चांद लगा करके हमें फिर से एक बार हमें विजयी बनाकर के देश की जनता की सेवा करने का मौका विकसित भारत का मतलब होता है कोटि-कोटि नागरिकों को कोटि-कोटि अवसर उपलब्ध होते हैं। अनेक-अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं और वो अपने कौशल, अपनी क्षमता और संसाधनों  के अनुसार विकास की नई सीमाओं को प्राप्त कर सकता है।

उन दिनों को याद करेंगे तो हमारे ध्यान में आएगा कि हमारे देश के लोगों ने उनका आत्मविश्वास खो चुका था, देश निराशा की गर्त में डूब चुका था। ऐसे में 2014 के पहले देश ने जो सबसे बड़ा नुकसान भुगता था, जो सबसे बड़ी अमानत खोई थी, वो था देशवासियों का आत्मविश्वास। और जब विश्वास और आत्मविश्वास खो जाता है तब उस व्यक्ति को, उस समाज को, उस देश को खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। और उस समय सामान्य मानव के मंुह से यही निकलता था कि इस देश का कुछ हो नहीं सकता, उस समय हर जगह पर ये सात शब्द सुनाई देते थे। इस देश का कुछ नहीं हो सकता। यही शब्द 2014 के पहले सुनाई देते थे । भारतीयों की हताशा के ये सात शब्द एक प्रकार से पहचान बन गए थे। उस समय हर आए दिन अखबार खोलते थे तो घोटालों की खबरें ही पढ़ने को मिलती थी। और सैंकड़ों करोड़ के घोटाले, रोज नए घोटाले, घोटालों की घोटालों से स्पर्धा, ये घोटालेबाज लोगों के घोटाले, इसी का ये कालखंड था। और बेशर्मी के साथ सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर लिया जाता था कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है तो 15 पैसा पहुंचता है। एक रुपये में 85 पैसे का घोटाला। इस घोटालों की दुनिया ने देश को निराशा की गर्त में डूबा दिया था। पॉलिसी paralysis था। भाई भतीजावाद इतना फैला हुआ था कि जिसके लिए सामान्य नौजवान तो आशा छोड़ चुका था कि अगर कोई सिफारिश करने वाला नहीं है तो जिंदगी अटक जाएगी। ये िस्थति पैदा हुई थी। गरीब को घर लेना हो हजारों रुपयों की रिश्वत देनी पड़ती थी।

एनडीए का तीसरी बार सरकार में आना एक ऐतिहासिक घटना है। आजादी के बाद ये सौभाग्य दूसरी बार इस देश में आया है। और 60 साल के बाद आया है। इसका मतलब ये सिद्धि पाना कितना कठोर परिश्रम के बाद होता है। कितना अभूतपूर्व विश्वास संपादन होने के बाद होता है। ऐसे ही ये राजनीति के खेल से नहीं होता है। जनता जनार्दन की सेवा से प्राप्त आशीर्वाद से होता है।

जनता ने हमें स्थिरता और निरंतरता, इसके लिए जनादेश दिया है। लोकसभा चुनाव के साथ ही आदरणीय सभापति जी, लोगों की नजर से चीजें जरा ओझल हो गईं। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ हमारे देश में चार राज्यों के भी चुनाव हुए हैं और आदरणीय सभापति जी, इन चारों ही राज्यों में एनडीए ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है, अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। हमने शानदार विजय प्राप्त की है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की धरती उड़ीसा ने हमें भरपूर आशीर्वाद दिया है।

बालक बुद्धि में ना बोलने का ठिकाना होता है और ना ही बालक बुद्धि में व्यवहार का कोई ठिकाना होता है। और जब ये बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं। ये बालक बुद्धि अपनी सीमाएं खो देती हैं तो सदन के अंदर बैठकर के आंखें मारते हैं। इनकी सच्चाई आदरणीय सभापति जी अब पूरा देश समझ गया है। इसलिए आज देश इनसे कह रहा है तुमसे नहीं हो पाएगा, तुमसे न हो पाएगा।

ईवीएम को लेकर झूठ, संविधान को लेकर झूठ, आरक्षण को लेकर झूठ, उससे पहले राफेल को लेकर झूठ, एचएएल को लेकर के झूठ, एलआईसी को लेकर के झूठ, बैंकों को लेकर झूठ, कर्मचारियों को भी भड़काने के प्रयास हुए। हौसला तो इतना बढ़ गया कि कल सदन को भी गुमराह करने का प्रयास हुआ। कल अग्निवीर को लेकर सदन में झूठ बोला गया। कल यहां भरपूर असत्य बोला गया कि एमएसपी नहीं दिया जा रहा।

गंभीर बात है कि आज हिंदुओं पर झूठा आरोप लगाने की साजिश हो रही है, गंभीर षड्यंत्र हो रहा है। आदरणीय सभापति जी, ये कहा गया हिंदू हिंसक होते हैं, ये हैं आपके संस्कार, ये है आपका चरित्र, ये है आपकी सोच, ये है आपकी नफरत, इस देश के हिंदुओं के साथ ये कारनामे। ये देश शताब्दियों तक इसे भूलने वाला नहीं है। कुछ दिन पहले हिंदुओं में जो शक्ति की कल्पना है, उसके विनाश की घोषणा की गई थी। आप किस शक्ति की विनाश की बात करते हैं। ये देश सदियों से शक्ति का उपासक है। ये मेरा बंगाल मां दुर्गा की पूजा करता है, शक्ति की उपासना करता है। ये बंगाल मां काली की उपासना करता है, समर्पित भाव से करता है। आप उस शक्ति के विनाश की बातें करते हो। ये वो लोग हैं, जिन्होंने हिंदू आतंकवाद ये शब्द गढ़ने की कोशिश की थी। इनके साथी हिंदू धर्म को इसकी तुलना डेंगू, मलेरिया, ऐसे शब्दों से करें और ये लोग तालियां बजाएं, ये देश कभी माफ नहीं करेगा।

एक सोची समझी रणनीति के तहत इनका पूरा इकोसिस्टम हिंदू परंपरा, हिंदू समाज, इस देश की संस्कृति, इस देश की विरासत, इसको नीचा दिखाना, उसको गाली देना, उसे अपमानित करना, हिंदुओं का मजाक उड़ाना इसे फैशन बना दिया है और उसको संरक्षण देने का काम अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे तत्व कर रहे हैं।

हमारी सेनाएं देश का अभिमान हैं। सारे देश को उनके साहस और हमारी सेना की वीरता पर गर्व है। और आज सारा देश देख रहा है हमारी सेनाएं, हमारा डिफेंस सेक्टर आजादी के बाद इतने सालों में जितना नहीं हुआ इतने ही रिफॉर्म हो रहे हैं। हमारी सेना को आधुनिक बनाया जा रहा है। हर चुनौती को हमारी सेना मुंहतोड़ जवाब दे सके इसलिए युद्ध के सामर्थ्य वाली सेना बनाने के लिए हम भरपूर प्रयास कर रहे हैं, रिफॉर्म कर रहे हैं, कदम उठा रहे हैं, देश की सुरक्षा का मकसद लेकर के। बीते कुछ सालों में बहुत सारी चीजें बदली हैं। सीडीएस का पद बनने के बाद integration और सशक्त हुआ है।

 

 

नरेंद्र मोदी

(यह लेख लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के जवाब के सम्पादित अंशों पर आधारित है)

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