WRITER- सात्विक उपाध्याय
नई दिल्ली: मंगलवार 26 दिसंबर को 2004 की सुनामी की 19वीं बरसी पर तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के मछुआरों और निवासियों ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत एक क्षण के मौन के साथ हुई, जिससे सभी को त्रासदी की भयावहता और उन जिंदगियों पर विचार करने का मौका मिला जो हमेशा के लिए बदल गईं। इस मौके पर पारंपरिक पोशाक पहनकर मछुआरों ने पूजा-अर्चना भी की।
बता दें कि 2004 में तमिलनाडु में आये सुनामी में जान गंवाने वाले लोगों को लेकर तमिलनाडु के पज़लवेरकाडु समुद्र तट पर भी स्मरण दिवस मनाया गया। यह गंभीर अवसर उनके समुदाय पर आई भारी त्रासदी और ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने उनके द्वारा दिखाए गए लचीलेपन की याद दिलाता है।
सुनामी से सीधे तौर पर प्रभावित हुए मछुआरों ने अपने जीवित बचे रहने और नुकसान की कहानियां साझा कीं और अपने साथ हुए कष्टदायक अनुभवों को याद किया। निवासियों ने भी पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरा दुख और सहानुभूति व्यक्त की। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय नेता और कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल हुए, जिन्होंने पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की।
26 दिसंबर, 2004 को आई सुनामी से आई बाढ़ ने तमिलनाडु के सिंगारथोप्पु देवानमबत्तीनम, दलांगुडा, सोनांगुप्पम, सोथिकुप्पम, अक्कराइक्कोरी और एमजीआर सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। तमिलनाडु में कम से कम 610 लोगों की जान चली गई और थिथु और बिलुमेदु सहित विभिन्न मछली पकड़ने वाले गांव सूनामी लहरों में बह गए। 2004 की सुनामी इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर आए भूकंप का परिणाम थी। यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार, 1900 के बाद से तीसरा सबसे बड़ा भूकंप, उत्तरी सुमात्रा, इंडोनेशिया और भारत के निकोबार द्वीप समूह में गंभीर क्षति और हताहत हुआ।
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