भुवनेश्वर: 17 मार्च: ओड़िशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिये 16 मार्च को हुए चुनाव में भाजपा ने बीजद और कांग्रेस को करारा झटका देते हुए तीन सीट जीत ली है। एक सीट बीजू जनता दल के खाते में गई है। विधायक खरीद फरोख्त और बीजद में खुली बगावत , क्रॉस-वोटिंग के बीच ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल, मौजूदा सांसद सुजीत कुमार , बीजद के संतृप्त मिश्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ( निर्दलीय उम्मीदवार) विजेता हुए हैं। भाजपा समर्थित दिलीप राय ने बीजद -कांग्रेस के साझा उम्मीदवार डॉक्टर दत्तेश्वर होता को दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर हरा दिया। इस विजय के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने “2002 की पुनरावृत्ति” करते हुए बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक को एक बार फिर शिकस्त दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के करीबी माने जाने वाले राय, जिनके सभी दलों के नेताओं से अच्छे संबंध रहे हैं, ने एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीतने में सफलता हासिल की। बीजद के बागी विधायकों ने अपने दल के कांग्रेस से हाथ मिलाने को अस्वीकार करते हुए दिलीप राय को वोट दिया।
चुनाव पूर्व गणित के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को सीधे जीत के लिए 30 पहली वरीयता वोटों की आवश्यकता थी। भाजपा के पास तीन निर्दलीय विधायकों सहित लगभग 82 विधायक होने के कारण दो सीटें जीतना तय माना जा रहा था, जबकि 48 विधायकों वाली बीजद को एक सीट मिलनी तय थी। मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को पहली वरीयता में 35-35 वोट मिले। जबकि बीजद के संतृप्त मिश्र को 31 वोट मिले। दिलीप राय और डॉक्टर होता को समान 23-23 वोट मिले। अतः दूसरी वरीयता में दिलीप राय ने जीत हासिल करने में सफल हो गये। इस चुनाव में कांग्रेस के तीन और बीजद के आठ विधायकों ने दलीय व्हीप को अंगूठा दिखाते हुए दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की।
परिणाम घोषित होने के बाद नवीन पटनायक ने भाजपा पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाने के साथ अपने दल के कुछ विधायकों को 'आपराधिक पृष्ठभूमि' वाले बता दिया। दूसरी तरफ दिलीप राय ने अपनी विजय के लिए अन्य दलों के विधायकों के साथ भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण रिश्तों को श्रेय दिया। बीजद के क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों ने दिलीप राय को बीजू पटनायक के आदर्शों को आगे बढ़ाने वाला नेता बताया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने अपने तीन विधायकों के क्रॉस वोटिंग को अप्रत्याशित कहा।
इतिहास दोहराया गया
चौबीस वर्ष पहले 2002 में भी दिलीप राय को राज्यसभा जाने से रोकने के नवीन पटनायक के मंसूबों को दिलीप राय ने विफल कर दिया था। उस वर्ष नवीन पटनायक ने बीजद के संस्थापक सदस्य दिलीप राय को राज्यसभा के लिए टिकट देने से मना कर दिया था। तो दिलीप राय निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर गए थे। उस समय किसी भी दल का समर्थन उनके पास नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने कांग्रेस के मोरिस कुजूर को हराकर राजनैतिक भूचाल ला दिया था। उस समय लगभग 15 बीजद विधायकों ने दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी। बीजद के अलावा भाजपा, निर्दलीय और जेएमएम विधायकों ने भी दिलीप राय को वोट दिया था। कांग्रेस के पास 26 विधायक होने के बावजूद कांग्रेस प्रार्थी मोरिस कुजुर का वोट 23 वोट मिले। बाद में कांग्रेस ने तीन विधायकों को निलंबित कर दिया था। 2014 के राज्य सभा चुनाव में भी नवीन पटनायक को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी जब कांग्रेस के रंजीब बिश्वाल ने बीजद समर्थित शिल्पकार रघुनाथ महापात्र को हरा दिया था।
परिवार वाद का नया रूप
नवीन पटनायक अपने पिता बीजू पटनायक का नाम लेकर राजनीति कीऔर 24 वर्षों तक ओड़िशा पर निरंकुश शासन किया। अब अनेक विधायकों ने भी अपने पिता के नाम पर दल से बदला लिया। बीजद के सौविक बिश्वाल, देबीरंजन त्रिपाठी, अरविंद महापात्र, कांग्रेस की सोफिया फिरदौस ने अपने पिताओं के साथ किये गए अन्याय का बदला चुकाया।
सौविक बिश्वाल बोले- मैंने पिता का बदला ले लिया
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर सौविक बिश्वाल ने कहा, “मैंने उसी उम्मीदवार को वोट दिया है जिसे दिवंगत बीजू पटनायक का आशीर्वाद प्राप्त है।. मैं अपने पिता के साथ हुए अन्याय और अत्याचार को कभी नहीं भूल सकता.। मैं जानता हूं कि मेरे पिता कैसे व्यक्ति थे।. अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी किसी से एक रुपया भी रिश्वत नहीं ली, लेकिन बीजू जनता दल ने उन्हें चोर करार दे दिया. आज मुझे थोड़ी शांति महसूस हो रही है कि मैंने जो किया वह सही किया. मेरे पिता को बीजेडी ने चिटफंड मामले में फंसाया था. हां, मैंने बदला लिया है।”
दो अन्य विधायक देबीरंजन त्रिपाठी और अरविंद महापात्रने भी अपने पिता को दल में अपमानित किये जाने का बदला चुकाया। कांग्रेस की कटक बाराबाटी विधायिका सोफिया फिरदौस के पिता मुहम्मद मोकिम को भी दल ने निलंबित किया था। अब सोफिया ने पिता के पक्ष में खड़ी हो गई। बीजद के विधायकों की खुली बगावत के पीछे नवीन पटनायक का कांग्रेस से हाथ मिलाने का प्रयास भी बड़ा कारण रहा। बागी बीजद विधायकों का कहना था कि बीजू जनता दल का गठन कांग्रेस के कुशासन के विरुद्ध लड़ने के लिए हुआ था। अब वे किस मुंह से कांग्रेस के साथ खड़े हो सकेंगे। नवीन पटनायक के कांग्रेस नेताओं के साथ गलबहियां करने से बीजद के आम कार्यकर्ताओं में व्यापक असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा था। चुनाव नतीजों के बाद यह भावना और बढ़ने की संभावना है। नवीन पटनायक और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने दल के बागी विधायकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही है। राज्यसभा चुनावी नतीजों से राज्य में नए राजनैतिक समीकरण बनने के स्थिति बन गई है। यह समीकरण किस रूप में सामने आएंगे इसपर सबकी नजरें रहेंगी।
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