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एनआईटी राउरकेला ने 100 से अधिक स्वीकृत पेटेंट का ऐतिहासिक पड़ाव पार किया

NIT Rourkela crosses landmark milestone of over 100 granted patents

राउरकेला, 5 फरवरी: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) ने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 100 से अधिक पेटेंट स्वीकृत होने का महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके साथ ही संस्थान ने देश के अग्रणी नवाचार-आधारित शैक्षणिक संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत की है।

अब तक एनआईटी राउरकेला द्वारा कुल 230 पेटेंट आवेदन दायर किए गए हैं, जिनमें 218 राष्ट्रीय और 12 अंतरराष्ट्रीय आवेदन शामिल हैं। इनमें से 101 पेटेंट स्वीकृत हो चुके हैं—97 राष्ट्रीय और चार अंतरराष्ट्रीय—जो संस्थान की अनुसंधान एवं बौद्धिक संपदा सृजन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पिछले कुछ वर्षों में एनआईटी राउरकेला में पेटेंट दाखिल करने और उनके स्वीकृत होने की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी गई है। पेटेंट परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 2025 में किए गए अधिक पेटेंट आवेदन आने वाले वर्षों में स्वीकृतियों की संख्या में और वृद्धि करेंगे। केवल 2025 में ही संस्थान को 23 पेटेंट स्वीकृत हुए, जो उल्लेखनीय वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

नवाचार के प्रमुख क्षेत्र

स्वीकृत पेटेंट कई महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों से संबंधित हैं, जिनमें एआई-आधारित वाहन संचार प्रणालियां, स्वायत्त ड्रोन तकनीक, औद्योगिक अपशिष्ट उपचार समाधान, स्वास्थ्य निगरानी आईओटी उपकरण, टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग और अपशिष्ट संसाधनों से विकसित उन्नत सामग्री शामिल हैं।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने कहा कि 100 से अधिक पेटेंट का स्वीकृत होना अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन की मजबूत संस्कृति की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि अब तक 230 से अधिक पेटेंट दायर किए जा चुके हैं, जिनमें 101 स्वीकृत हैं, जो एआई-आधारित तकनीक, सतत सामग्री, स्वास्थ्य एवं बायोमेडिकल समाधान, सेमीकंडक्टर और जल अनुसंधान जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में संस्थान के प्रभावशाली कार्य को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि 2025 में ही 91 पेटेंट आवेदन दायर किए गए हैं और संस्थान आने वाले वर्ष में स्वीकृत पेटेंट की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखता है, जिससे विकसित भारत 2047 के विज़न को मजबूती मिलेगी।

बौद्धिक संपदा सृजन को बढ़ावा देने के लिए एनआईटी राउरकेला का बौद्धिक संपदा अधिकार केंद्र (सीआईपीआर) संकाय सदस्यों और छात्रों को नवाचारों के संरक्षण हेतु एक समग्र मंच प्रदान करता है। यह केंद्र आईपी जागरूकता और क्षमता निर्माण, प्रस्तावों की समीक्षा एवं स्वीकृति, पेटेंट दाखिल करने और स्वीकृति प्रक्रिया में सहायता, लाइसेंसिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा सहयोग, और आईपी-संबंधित एमओयू व एनओसी जारी करने का कार्य करता है।

सीआईपीआर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसके अध्यक्ष प्रो. सुजीत सेन ने कहा कि 2022 में स्थापित यह केंद्र शैक्षणिक साख को मजबूत करने, संस्थान की रैंकिंग सुधारने, उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने और नवाचारी समाधान प्रस्तुत करने वाले आविष्कारकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। ‘वन स्कॉलर, वन पेटेंट’ जैसी पहल ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं और इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में कम से कम 200 पेटेंट दाखिल करने की योजना है और अगले तीन वर्षों में ‘एक दिन, एक पेटेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है।

आगे की रणनीति के तहत एनआईटी राउरकेला उद्योग साझेदारियों का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय पेटेंट दाखिल करने की संख्या बढ़ाने और सामाजिक व औद्योगिक प्रभाव के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। संस्थान का पेटेंट-आधारित नवाचार आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों को भी मजबूती प्रदान करता है।

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