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कर्नाटक: कृष्णा नदी में मिली भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा, नवनिर्मित रामलला की मूर्ति से खाती है पूरी तरह से मेल

Karnataka: Ancient statue of Lord Vishnu found in Krishna river, matches completely with the newly built statue of Ramlala

WRITER- सात्विक उपाध्याय


नई दिल्ली: कर्नाटक के रायचूर जिले के एक गांव में कृष्णा नदी से हाल ही में भगवान विष्णु की एक प्राचीन मूर्ति मिली है जो कि नवनिर्मित रामलला की मूर्ति से लगभग पूरी तरह से मेल खाती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बता दें कि कृष्णा नदी में मिले भगवान विष्णु के मूर्ति के चारों ओर ठीक रामलला की मूर्ति में उकेरे गए अवतारों के समान ही  भगवान विष्णु के सभी दसावतार उकेरे हुए हैं। 

कृष्णा नदी में मिली मूर्ति हुबहु रामलला की मूर्ति ने खाती है मेल- 

कृष्णा नदी में मिली भगवान विष्णु की मूर्ति को देखने के बाद सूत्रों ने बताया कि यह मूर्ति इस तथ्य को देखते हुए उल्लेखनीय है कि इस मूर्ति की विशेषताएं अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर में हाल ही में प्रतिष्ठित 'राम लला' की मूर्ति से मिलती जुलती हैं। वहीं, मूर्ति के साथ एक प्राचीन शिवलिंग भी मिला है। साथ ही मूर्ति के साथ सभी दसावतार उकेरे हुए हैं। 

मूर्ति ईसा पश्चात 11वीं या 12वीं शताब्दी की हो सकती है-

मूर्ति का परिक्षण करने के बाद पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि यह मूर्ति ईसा पश्चात 11वीं या 12वीं शताब्दी की है। रायचूर यूनिवर्सिटी में प्राचीन इतिहास और पुरातत्व की लेक्चरर डा.पद्मजा देसाई ने भगवान विष्णु की प्रतिमा के संबंध में बताया कि निश्चित रुप से इस मूर्ति को किसी प्रकार की हानि ना हो इसलिए इसे नदी में प्रवाहित कर दिया गया होगा। मूर्ति को देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि मूर्ति किसी भव्य मंदिर की होगी। जिसे नष्ट किये जाने के डर से प्रवाहित किया गया होगा। 

Comments (1)
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मेरे अनुसार सत्य तो ये है कि:-"कृष्णा नदी से जो श्री राम जी की मूर्ति मिली है वही मूर्ति 11वीं और 12वीं शताब्दी में अयोध्या के श्री राम मंदिर में उसी समय से स्थापित थी लेकिन जब बाद में उस समय मुस्लिम आक्रांताओं ने भारत पर हमला किया तो उस समय शायद अयोध्या में राममंदिर के पुजारियों ने भगवान राम की उस मूर्ति को सुदूर दक्षिण में कृष्णा नदी के पास सुरक्षित छिपा दिया होगा और इसीलिए अयोध्या में जो श्री राम जी की मूर्ति स्थापित है वो उस प्राचीन तथा वास्तविक मूर्ति से 100% मिलती है और ये एक संयोग तो है ही पर इसकी जाँच पूर्ण वैज्ञानिक आधार पर भी की जानी चाहिए और ये कार्य "पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग" को ही करना चाहिए और इसके लिए उन्हें दोनों मूर्तियों की बहुत अच्छे तरीके से और बारीकी से जाँच करनी होगी क्योंकि ये हमारे गौरवपूर्ण भारतीय इतिहास का प्रश्न है। धन्यवाद!????????????????????????????????????

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