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.सिर्फ इज्जत बचाने के लिए ईरान ने दाग दी सैकड़ों मिसाइलें ,क्या होगा इस जंग का अंजाम

Iran launched 500 missiles at Israel on Tuesday.What will be the outcome of this war?

सिर्फ इज्जत बचाने के लिए ईरान ने तेल अवीव पर दाग दी सैकड़ों मिसाइलें | इजरायल का बाल भी बांका नहीं हुआ, क्या होगा इस जंग का अंजाम |

अंशुमान आनंद

नई दिल्ली -  मंगलार यानी 1 अक्तूबर को देर रात ईरान ने ईरान ने इजरायल पर करीब 500 मिसाइलें दाग दीं। ईरान ने अपनी औकात के हिसाब से इजरायल को नुकसान पहुंचाने की भरपूर कोशिश की थी। ईरान ने इजरायल के तीन मिलिट्री बेस और खुफिया एजेंसी मोसाद के हेडक्वार्टर को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी थीं। ईरानी मिसाइलों ने इजरायल के नेवाटिम, हेटजेरिम और टेल नौफ मिलिट्री बेस को बर्बाद करने के लिए उसपर मिसाइलें दागी। इसमें से टेल नोफ और नेवाटिम इजरायल डिफेंस फोर्स के सबसे एडवांस मिलिट्री बेस हैं।लेकिन इन हमलों ने ईरानी मिसाइलों की क्वालिटी की पोल खोल दी है। 500 मिसाइलों के हमले में इजरायल के एक भी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचा है। ज्यादातर ईरानी मिसाइलों को इजरायल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जिसे आयरन डोम के नाम से जाना जाता है। उसने रोक लिया कुछ मिसाइलें इजरायली जमीन पर गिरीं भीं लेकिन यह फुस्स पटाखा साबित हुईंऔर इनसे चंद गाड़ियों को ही नुकसान पहुंच पाया। इजरायली मीडिया में आई खबरों के मुताबिक उत्तरी तेल अवीव में जॉर्ज वीस स्ट्रीट पर एक इमारत पर सीधा हमला हुआ । लेकिन यहां कोई हताहत नहीं हुआ।इसके अलावा इजरायल की राजधानी तेल अवीव के साथ-साथ डिमोना, नबातिम, होरा, होद हशरोन, बीर शेवा और रिशोन लेज़ियन में भी कई मिसाइलों के गिरने की खबर है।

इजरायल पर हुए ईरानी हमले के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। जिसमें ईरानी मिसाइलों और इंटरसेप्टर के टुकड़ों को डेड सी यानी मृत सागर गिरते हुए देखा जा रहा है।इजरायल के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने घोषणा की कि एयरपोर्ट पर सभी लैंडिंग और टेकऑफ रोक दिए गए हैं। इसके अलावा इजरायल में सभी ट्रेनें रोक दी गई हैं। जो विमान लैंडिंग के लिए हवा में थे, उन्होंने यू-टर्न ले लिया। जॉर्डन और इराक ने भी अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।

भले ही ईरानी हमले में इजरायल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन इससे ईरान का गुनाह कम नहीं हो जाता है। क्योंकि उसने अपनी तरफ से इजरायल को बर्बाद करने की पूरी कोशिश की है और ऐसा करके ईरान के कट्टरपंथी मौलानाओं ने शेर के मुंह में हाथ डाल दिया है।अब इजरायल को जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार मिल गया है ।इजरायल रक्षा विभाग के प्रवक्ता प्रवक्ता डेनियल हागारी ने ईरान के हमले के बाद बयान जारी किया है कि "ईरान के आक्रमण ने संघर्ष को एक गंभीर और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। उसको इसके परिणाम भुगतने होंगे इजरायल सरकार के निर्देश के अनुसार, हम अपने हिसाब से जहां भी, जब भी और जैसे भी हो, इसका इसका जवाब देंगे यानी कि इजरायल ईरान को इस गुस्ताखी के लिए सजा तो जरुर देगा लेकिन समय और जगह इजरायल खुद तय करेगा।इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने फ्रांस और इजरायल के अनुरोध पर आपातकालीन बैठक बुलाई है। इजरायल के संयुक्त राष्ट्र राजदूत डैनी डैनन ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर ईरान पर इजरायल को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और सुरक्षा परिषद से ईरान की फौज इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन के तौर पर चिह्नित करने का आग्रह किया है।

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या ईरान को अपनी क्षमता का एहसास नहीं था।जब वह जानता था। इजरायल का विश्व प्रसिद्ध आयरन डोम दुनिया के किसी भी मिसाइल हमले को रोकने में सक्षम है।तो उसने इस तरह की गुस्ताखी क्यों की है मैं क्यों कह रहा हूं कि ईरान को अपनी औकात और इजरायल के डिफेंस सिस्टम के अचूक  निशाने का एहसास था। क्योंकि इसी साल 13 अप्रैल को भी ईरान ने इजरायल पर हमला किया था । उस समय ईरान ने 120 बैलिस्टिक मिसाइलों, 170 ड्रोन और दर्जनों क्रूज मिसाइलों से हमला किया था । लेकिन यह भी नाकाम कर दिया गया था । तो फिर ईरान ने क्यों दोबारा हमला करके दुनिया के सामने अपना मजाक उड़वाया इसका जवाब छिपा है।  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की घोषणा में जिसमें उन्होंने बयान जारी किया कि यह हमला हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह की हत्या के जवाब में किया गया है। यानी कि नसरल्लाह के मारे जाने के बाद ईरान भारी दबाव में था हिजबुल्लाह को उसने ही पाल पोस कर बड़ा किया था। लेकिन इजरायल हिजबुल्लाह के आतंकियों को गाजर मूली की तरह मार रहा था। ऐसे में ईरान पर प्रेशर बढ़ता जा रहा था । इसीलिए उसने अपनी नाक बचाने के लिए इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं। हालांकि वह खुद भी यह अच्छी तरह जानता था । कि इजरायल का इस हमले से कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है।लेकिन अपनी नाक बचाने के चक्कर में ईरान के खोमैनी शासन ने अपनी मौत बुला ली है क्योंकि इजरायल और अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने कई बार खोमौनी की तानाशाही में पिसते ईरान को मुक्त कराने की इच्छा जाहिर की है । खुद ईरान में भी महिलाओं और दूसरे प्रबुद्ध लोग कट्टरपंथियों के शासन से मुक्ति चाहते हैं। तो उम्मीद की जानी चाहिए कि इजरायल पर ईरान का यह हमला खोमैनी के तानाशाही शासन के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा और यही पूरी दुनिया के सभ्य समाज के हित में भी है ।

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