हल के वर्षों में भारत ने स्वदेशी नवाचार और विनिर्माण के माध्यम से अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई परिवर्तनीय कदम उठाने शुरु किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए कई सुधार शुरू किए हैं। ये पहल वैश्विक रक्षा क्षेत्र में एक दुर्जेय शक्ति के रूप में भारत की महत्वपूर्ण छवि गढ़ रहा है। भारत की रणनीति का केंद्र संशोधित रक्षा खरीद नीति (DPP) है, जिसके जरिए "मेक इन इंडिया" परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलती है। इस नीतिगत बदलाव का उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। भारत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देकर ना केवल अपने रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करता है बल्कि आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति को भी बढ़ावा मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित डिफेंस कॉरिडोर इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये कॉरिडोर रक्षा नवाचार और विनिर्माण के लिए केंद्र के रूप में काम करते हैं, जो उद्योग, शिक्षा और सरकार के बीच सहयोग के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हैं। साथ ही अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास और उत्पादन में तेजी लाते हैं। भारत के रक्षा बलों की रीढ़ भारतीय थल सेना आधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। K9 वज्र-T और M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर जैसी उन्नत तोपखाना प्रणालियों को एकीकृत किया गया है, जिससे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सेना की मारक क्षमता और परिचालन सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। ये प्रगति भारतीय सैनिकों को अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों से लैस करने की प्रतिबद्धता को दिखाती है।
इस पृष्ठभूमि में यहाँ यह भी बताना चाहूंगा कि व्यापक रणनीतिक हितों वाले एक समुद्री राष्ट्र के रूप में, भारत ने अपनी नौसेना क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जलावतरण देश की समुद्री क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जो कि ना केवल भारत की समुद्री परिचालन क्षेत्र का विस्तार करती है बल्कि जहाज निर्माण और नौसेना प्रौद्योगिकी में इसकी बढ़ती दक्षता को भी रेखांकित करती है। भारतीय वायु सेना (IAF) में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमानों के शामिल होने से बल मिला है। उन्नत एवियोनिक्स, हथियार प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं से लैस ये विमान IAF को बेजोड़ हवाई श्रेष्ठता और हमला करने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस का विकास और शामिल होना एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और विनिर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को उजागर करता है। इसके निष्कर्ष के तौर पर यह देखा जा रहा है कि मोदी सरकार के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की भारत की कोशिश इसके सैन्य आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देकर, खरीद नीतियों में सुधार करके और समर्पित रक्षा गलियारे स्थापित करके, भारत का लक्ष्य आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। ये पहल न केवल भारत की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करती हैं, बल्कि देश को रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण कौशल में वैश्विक नेता के रूप में भी स्थापित करती हैं। जैसे-जैसे भारत रक्षा में आत्मनिर्भरता के इस मार्ग पर आगे बढ़ता जा रहा है, हमारी सैन्य क्षमताएं विशिष्ट तरीके सुदृढ़ता प्राप्त कर रही हैं।

दीपक कुमार रथ
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