अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला विराजमान हो गए हैं। इसके साथ ही देश विदेश में बसे करोड़ों-अरबों हिंदुओं का सपना पूरा हुआ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दुनिया में सबसे लंबा आंदोलन चलाया गया। सभी वर्ग, जाति, धर्म के लोगों ने प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाया। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम, गांव से महानगरों तक हर उम्र के लोगों ने उत्साहपूर्वक रामलला के लिए दीप प्रज्जवलित किए और इसके साथ ही 22 जनवरी का दिन भारतीयों के लिए एक और दिवाली बन गया। भारत और भारतीयता के प्रति प्रेम का प्रवाह पूरे देश में हुआ। जिससे एक बात तो साबित हो गई कि जब बात हमारी मातृभूमि या पूज्य भगवान राम की आती है, तो हम सभी एकजुट हो जाते हैं। हमने इस बात की चिंता नहीं की, कि किसने निमंत्रण स्वीकार किया या किसने नहीं। भगवान रामलला को इसकी चिंता नहीं है कि किसे उनके आशीर्वाद की जरूरत है और किसे नहीं। भगवान राम के सामने सभी बराबर हैं। सभी को राम राज्य में धर्म के मार्ग पर चलने की जरूरत है। जो लोग भगवान राम की भक्ति में डूब जाते हैं और सब कुछ समर्पण कर देते हैं, वे कभी निराश नहीं होते। यह सत्य है कि भक्ति और शक्ति तभी प्राप्त होती है जब कोई रामकाज के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाता है। बॉलीवुड सितारे, खिलाड़ी, व्यवसायी, किसान, गरीब व्यक्ति और साधु-संत सभी ने नम आंखों के साथ प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाया । कश्मीर से कन्याकुमारी तक ऐसा लग रहा था जैसे हर कोई राम, राम भक्ति और राम शक्ति के लिए एकजुट है। एक बार फिर पूरी दुनिया ने राम के प्रति भारतीयों के प्रेम देखा। जिन लोगों ने हमेशा अलग-अलग कारणों से और अलग-अलग समय पर भारत में हमारे समाज को विभाजित करने की कोशिश की है, वे अब दुनिया भर के लोगों का समुद्र जैसा समर्थन देखकर निराश हो गए हैं। प्राण प्रतिष्ठा के दूसरे दिन तीन लाख से अधिक भक्तों ने रामलला का आशीर्वाद प्राप्त किया। अयोध्या में लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए कृतसंकल्प हैं। किसी ने उनके लिए कोई आध्यात्मिक यात्रा का आयोजन नहीं किया। यह भगवान राम के प्रति उनका प्रेम है।
अब तो यह हर किसी के सामने साफ है कि हमारे देश ने फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्र निर्माण के लिए सभी एकजुट हैं। राम मंदिर का ये पल इतिहास में दर्ज हो गया है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे सैकड़ों कारसेवकों ने रामलला के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब उनके पूज्य रामलला सुरक्षा बलों के घेरे में तंबू में रहते थे तो भक्तों की आंखों में हमेशा आंसू आ जाते थे। अब समय बदल गया है और करोड़ों लोगों की मनोकामनाएं पूरी हो रही हैं। अब यह कहना बिल्कुल सही होगा की भारत में अमृतकाल आ गया है और हमारा देश विश्व गुरु भारत बनने की ओर अग्रसर है। साथ ही भारत का पूरे ब्रह्मांड का मार्गदर्शन करने वाला सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना तय है।
हमारा देश अपनी सदियों पुरानी संस्कृति के अनुरूप वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास करता है। हम कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, हम कभी किसी पर हमला नहीं करते और हम कभी किसी सभ्यता को नष्ट नहीं करते। साथ ही हम एक राष्ट्र के रूप में हमेशा मजबूत हैं। अब भारत किसी भी विदेशी संस्कृति या शक्ति को अपनी भूमि पर हस्तक्षेप नहीं करने देगा। सर्वाधिक युवा आबादी के कारण हमारा देश बदल गया है। भारत सैन्य शक्ति और उन्नत अंतरिक्ष विज्ञान के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गया है और सभी राष्ट्रविरोधी ताकतों और दुश्मन पड़ोसियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। वे दिन गए जब छद्म धर्मनिरपेक्ष ताकतों की वजह से चिंता बनी रहती थी। अब भारत हर आम इंसान और हमारी युवा आबादी राष्ट्र विरोधियों की गतिविधियों के प्रति सतर्क है। अब रामलला स्वयं हमारे देश के लिए और पूरी मानवता के लिए विराजमान हो चुके हैं। जो लोग अब भी रामलला की आलोचना करते हैं या राम के अस्तित्व को नकारते हैं, उनके दिन अब गिनती के रह गए हैं। आशा है कि राजनीति को किनारे रखकर सभी लोग एकता की भावना के लिए खड़े हों और समाज में सामाजिक समरसता स्थापित करेंगे। उम्मीद हैं कि रामलला पूरी मानवता का ख्याल रखेंगे। जय श्री राम।

दीपक कुमार रथ
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