विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने में आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति "मोदी की निजी विदेश नीति" बन गई है, जिसे "एक Universal joke" माना जा रहा है। वैसे तो अब राहुल गाँधी खुद एक मज़ाक के पात्र हैं, लेकिन अब उन्होंने आरोप लगाया है तो उस पर चर्चा होनी जरुरी है। आज की चर्चा में मैं प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर सवाल उठाने वाले लोगों को कुछ सच्चाइयों से रूबरू करना चाहता हूँ।
मित्रों, साल 2026 का भारत केवल आंकड़ों का देश नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे आत्मविश्वासी राष्ट्र की तस्वीर पेश करता है जो वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। हाल के Economic and Industrial Indicators पर नज़र डालें तो यह स्पष्ट होता है कि भारत अब केवल संभावनाओं की भूमि नहीं रहा, बल्कि परिणाम देने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है। एक ओर जहां बॉलीवुड की एक फिल्म 1000 करोड़ रुपये के पार पहुंचती है, वहीं दूसरी ओर आईपीएल टीमों की वैल्यूएशन 15000 करोड़ रुपये से ऊपर जा रही है। यह केवल मनोरंजन या खेल की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस Economic Power and Consumer Capacity का संकेत है जो देश के भीतर विकसित हो चुकी है।

इसी के समानांतर, भारतीय कंपनियों द्वारा 300 बिलियन डॉलर जैसे विशाल निवेश प्रस्तावों की चर्चा यह दर्शाती है कि देश में उद्योग जगत को लेकर विश्वास अपने चरम पर है। यह विश्वास यूं ही नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे एक Stable and Long-term Policy Framework है, जिसने Investors को स्पष्ट दिशा और भरोसा दिया है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल सेवा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह Technical and Industrial Self-Reliance की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है।
भारत में आयोजित हो रहे बड़े एआई एक्सपो और तकनीकी सम्मेलनों ने भी यह दिखाया है कि देश केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि Creators of Technology and Centers of Innovation के रूप में उभर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि आने वाले दशक में भारत Global Technological Power के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
विकास की यह कहानी केवल तकनीक या उद्योग तक सीमित नहीं है। देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट का तेज़ी से बढ़ता विस्तार इस बात का संकेत है कि विकास अब महानगरों तक सीमित नहीं रहा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे Regional Inequalities को कम करने में मदद मिल रही है। सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने न केवल जीवन को आसान बनाया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी है।
मित्रों, साल के शुरू में ही यानी जनवरी 2026 में जीएसटी कलेक्शन का ₹1,93,384 करोड़ तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि Transparency and Formalism in the Indian Economy लगातार बढ़ रही है। यह केवल राजस्व में वृद्धि नहीं है, बल्कि यह उस कर व्यवस्था की सफलता का संकेत है जिसने व्यवसायों को संगठित ढांचे में लाने का काम किया है।
इन तमाम आर्थिक उपलब्धियों के बीच एक और महत्वपूर्ण बदलाव भारत की विदेश नीति में दिखाई देता है। आज भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है। कल ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत हुई है और इस बातचीत में अमेरिका की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य-पूर्व में मध्यस्थता की भूमिका का स्वागत किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जिओ गौर ने इसे “बहुत महत्वपूर्ण” बातचीत बताया, विशेष रूप से तब जब प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित रही । वॉशिंगटन का यह रुख यह दर्शाता है कि भारत को अब केवल एक साझेदार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है, जो जटिल अंतरराष्ट्रीय संकटों में संतुलन और समाधान ला सकता है।
यह बदलाव यूं ही नहीं आया है। पिछले एक दशक में भारत ने अपनी विदेश नीति को अधिक व्यावहारिक, संतुलित और प्रभावी बनाया है। चाहे वह पश्चिम एशिया हो, रूस-यूक्रेन संकट हो या इंडो-पैसिफिक क्षेत्र—भारत ने हर मंच पर अपनी स्वतंत्र और संतुलित आवाज को बनाए रखा है। यही कारण है कि आज विश्व के बड़े देश भी भारत की भूमिका को न केवल स्वीकार कर रहे हैं, बल्कि उसे प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।
इन सभी उपलब्धियों को एक साथ जोड़कर देखें तो यह स्पष्ट होता है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में क्यों शामिल है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार और भविष्य के प्रति विश्वास को भी मजबूत कर रहा है।
इस परिवर्तन के केंद्र में सरकार की Long-term Thinking and Policy Stability है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए फैसलों ने न केवल वर्तमान को मजबूत किया है, बल्कि भविष्य के लिए एक ठोस आधार भी तैयार किया है। आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने देश को एक नई दिशा दी है, जहां विकास केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रहा है।
बताइए इन सब के बाद भी राहुल गांधी किस तरह की बातें कर रहे हैं। निस्संदेह, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन जिस गति और दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है, वह यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में यह देश न केवल आर्थिक महाशक्ति बनेगा, बल्कि एक सुरक्षित, स्थिर और वैश्विक नेतृत्व करने वाला राष्ट्र भी बनेगा। यह नया भारत है—आत्मविश्वास से भरा, अवसरों से परिपूर्ण और दुनिया को दिशा देने के लिए तैयार।
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