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बीसवीं सदी का चाणक्य

Chanakya of the twentieth century

डिप्लोमेसी का दूसरा नाम नरेन्द्र मोदी-इजरायल और ईरान दोनों मित्र

 

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम विश्व के महान डिप्लोमेट में लिया जा रहा है। अगर नरेन्द्र मोदी के जीवन चक्र और उनके देश की शीर्षस्थ स्थान पर पहुंचने की यात्रा पर नजर डालें तो एेसी बहुत सी बातें हैं जो दर्शाती हैं कि नरेन्द्र मोदी की राजनीति में महान चाणक्य (कौटिल्य) का अंश है। महान कूटनीतिज्ञ ज्ञानी और विद्वान चाणक्य का जन्म गरीब परिवार में हुआ था। वहीं नरेन्द्र मोदी का जन्म भी गरीब परिवार में हुआ। चाणक्य को वंशवाद के खिलाफ नंद वंश के आधिपत्य को समाप्त करने के लिये जाना जाता हैं। वहीं नरेन्द्र मोदी नेहरू  वंश के आधिपत्य के खिलाफ हैं और उनके 60 साल के साम्राज्य को समाप्त करने के लिये जाने जायेंगे। चाणक्य ने पहली बार सीधे राजा धनानंद की सत्ता से केन्द्र बिन्दु में टकराकर हार कर सबक सीखा था कि पहले देश के किनारों (छोरों) पर विजय प्राप्त कर केन्द्रीय सत्ता से युद्ध करना चाहिए। बाद में इसी युक्ति को अपना कर चाणक्य ने धनानंद का साम्राज्य को समाप्त कर मौर्य राज स्थापित किया था। उसी तरह नरेन्द्र मोदी ने भी पहले किनारे से यानी गुजरात से राजनीति कर कांग्रेस की सत्ता को चुनौती दी और लगातार 5 वर्ष के अंतराल से 3 बार चुनाव जीत कर कांग्रेस का सफाया किया। बाद में केन्द्र पर हमला कर जनता के सहयोग से सत्ता प्राप्त की थी। इस तरह मोदी की कार्य प्रणाली में चाणक्य की शिक्षा की झलक स्पष्ट है। 

इस समय जब अमेरिका जैसी महाशक्ति का युद्ध इजरायल जैसे बहादुर देश के साथ मिल कर सैन्यशक्ति से सम्पन्न ईरान के साथ हो रहा है तब मोदी ने भारत को कूटनीतिक ढंग से अलग रखते हुये इजरायल और ईरान दोनों से समझ बूझ के साथ मित्रता बनाये रखने में सफलता प्राप्त की है। ये काम आसान नहीं था। जहां दुनिया के तमाम विकसित व विकासशील देश या तो अमेरिका के साथ या ईरान के समर्थन मंे हैं, कुछ तो युद्ध में सम्मिलित न होकर भी अमेरिका के साथ हैं। कुछ ईरान का समर्थन करते हुये उसे मदद देने में असमर्थ हैं। यहां मोदी ने न किसी का समर्थन किया न किसी का विरोध किया। वे भारत के हित में जो भी हो उन सारे हितों की रक्षा करते हुये निर्णय ले रहे हैं। यही कारण है कि इजरायल भारत को अपना सबसे अच्छा मित्र मानता है और भारत को आधुनिकतम हथियार देने को तैयार है। 

सर्वविदित है कि इजरायल के पास अचूक हथियार और आधुनिक टेक्नोलोजी है। वहीं ईरान ने भी भारत के साथ मित्रता दिखाई है। इस मुसीबत की घड़ी में भारत के लिये आवश्यक वस्तुएं, कुकिंग गैस आदि आने जाने वाले जहाजों को भारत जाने का रास्ता भी ईरान ने खोल दिया है। 

अमेरिका के आगे भारत एक बार भी नहीं झुका है। उसके द्वारा लगाये गये प्रतिबन्धों को नहीं माना और खुले आम रूस से तेल खरीदता रहा है, रूस से तेल लेकर रिफाइन्ड करके दूसरे देशों को बेच कर काफी मुनाफा भी कमा रहा है। वर्तमान में अंततः अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के प्रतिबन्ध से मुक्त कर दिया है। 

मोदी की भारी सफलता से विपक्ष, खास तौर से कांग्रेस इतनी जल भुन गयी है कि  मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी की भूमिका बेहद निक्रिष्ट और घटिया हो गयी है। कुकिंग गैस की कमी होने के कारण लोगों को कठिनाई हो रही है जो कि ईरान द्वारा विभिन्न देशों के जहाजों की नाकाबन्दी के कारण हुयी है। बहुत सारे देश इस परेशानी को झेल रहे है। भारत में वैसे भी रसोई गैस के स्रोत खपत के अनुपात में न के बराबर ही है। फिर भी मोदी जी ने कुछ ही दिनाें में ये कठिनाई दूर कर ली है, ये उनके डिप्लोमेटिक कार्य शैली का सफल नमूना है। 

कांग्रेस पार्टी एवं कुछ विपक्षी दलों ने देश में राजनीति का नंगा नाच करने की कोशिश की है, ये समय भारत के साथ चलने का था। साथ देने के बजाय उल्टा लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है। जनता सब समझती है, पहले भी कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी इस तरह की कई हरकतें करके मोदी से मात खा चुके हैं। वे लगातार अपनी पार्टी का सत्यानाश करते जा रहे हैं, राहुल जल्दी से जल्दी कुर्सी पाने के लालच में घिनौना काम कर रहे हैं। हम अमेरिका के पास हाथ जोड़ने नहीं गये, उसने खुद ही भारत को रूस से तेल आदि खरीदने के लिये कहा।

अब दूसरे ढंग से सोचें तो ईरान हमारे पड़ोसी देशों में सबसे ताकतवर देश है और (इस्लामिक) मुस्लिम देश है। ईरान वक्त आने पर हमारा साथ नहीं देता है, जब भी पाकिस्तान के साथ हमारे बिगड़ते संबंधों की बात आती है या लड़ाई की बात आती है तो ईरान पाकिस्तान का साथ देता है। ऐसी स्थिति में ईरान के और शक्तिशाली होने की कार्यवाही का समर्थन भारत के लिये उपयुक्त नहीं था। कांग्रेस खुल कर ईरान का समर्थन कर रही है और चाहती थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ईरान के सुप्रीमो अली खामेनेई की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते जबकि अली खामेनेई ईरान के किसी संवैधानिक सरकारी पद पर नहीं थे । कांग्रेस ने जुलूस निकाल कर लोगों को उक्सा कर अली खामेनेई के पक्ष में देश में जुलूस निकलवाये यानि हमारे अमेरिका और इजरायल से संबंधों को बिगाड़ने का प्रयास किया है। 


कांग्रेस ये भूल गयी कि उनकी मनमोहन सरकार ईरान का भारत के ऊपर अरबों रूपयों का कर्जा छोड़कर गयी थी जो मोदी के कार्यकाल में चुकाया गया। मोदी सरकार के समय सामाजिक और व्यापारिक दृष्टि से ईरान के महत्वपूर्ण चबाहार पोर्ट को विकसित कर संचालित करने का कार्य भी ले लिया था। आज कांग्रेस सत्ता में होती तो उसकी नीतियों के कारण भारत कहीं का नहीं रहता, अमेरिका इजरायल और लगभग सारे यूरोपीय देश हमारे खिलाफ खड़े होते यहां तक कि मिडिल ईस्ट के अरब मुस्लिम देश हमारे ईरान को समर्थन देने से खिलाफ हो जाते। इन सभी देशों से आज हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं, उनसे रिश्ते खोना भारत को बहुत भारी पड़ता। 

लाखों-लाखों भारतीय सौदी अरब, अबू धाबी, दुबई, बहरिन, ओमान, कतर आदि में काम कर रहे हैं उनके हितों को हम नजर अंदाज नहीं कर सकते। कांग्रेस की नीतियां तो “ भारत को न घर का रहने देती न घाट का।” 

युद्ध में उलझे और युद्ध से प्रभावित सारे देशों और अंतर्राष्ट्रीय जगत में ये चर्चा है कि नरेन्द्र मोदी युद्ध बन्द कराने में अहम भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि हमारे दोनों ही देशों इजरायल और ईरान से मजबूत रिश्ते हैं। हम जब चाहें उनसे औपचारिक अनऔपचारिक बात कर सकते हैं, यही मोदी की नीतियों की सुपर जीत है। 

 


डाॅ. विजय खैरा

(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

 

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