नई दिल्ली: कप्तान रोहित शर्मा के नेतृत्व में भारतीय टीम ने असाधारण खेल दिखाते हुए 1 साल के अंदर भारत ने दूसरे ICC ट्रॉफी पर कब्जा किया। इससे पहले भारत ने जून 2024 में टी 20 विश्व कप को अपने नाम किया था। ऐसे में ठीक होली से पहले भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम कर पूरे भारत वर्ष को होली का तोहफा दिया । महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2013 में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीता था। ऐसे में 13 वर्ष के लंबे सूखे को भारतीय टीम ने खत्म किया है। यह कहना गलत तो नहीं होगा कि वनडे क्रिकेट में रोहित शर्मा की कप्तानी लाजवाब है और उनके नेतृत्व में भारत कई सालों के सूखे को खत्म करने का काम कर रही है। चाहे वो टी 20 विश्वकप हो, एशिया कप हो, चैंपियंस ट्रॉफी हो। इन सभी सूची में रोहित की कप्तानी में बस 2 ट्रॉफियों का इंतजार अभी और है वह है एकदिवसीय विश्वकप और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब।
पूरे चैंपियंस ट्रॉफी का सफर-
पाकिस्तान की मेजबानी में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी में कुल 8 टीमों ने हिस्सा लिया। इन सभी टीमों ने बेहतरीन खेल दिखाया। हालांकि इस बीच कुछ मैचों में बारिश का साया भी देखने को मिला था। पर इसके बावजूद भी टूर्नामेंट अपने पूर्व निर्धारित शेड्यूल के साथ चलता रहा। चैंपियंस ट्रॉफी में सभी 8 टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप में भारत, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और बांग्लादेश को रखा गया। वहीं दूसरे ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टीम को जगह मिला। दोनों ही ग्रुप में सभी टीमों को ग्रुप स्टेज में 3-3 मैच खेलना था। ऐसे में चैंपियंस ट्रॉफी के पहले मुकाबले में मेजबान टीम पाकिस्तान का मुकाबला न्यूजीलैंड के टीम से हुआ और पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। वहीं ग्रुप A में भारतीय टीम ने अपने चैंपियंस ट्रॉफी का सफर बांग्लादेश के सामने शुरू किया और क्या ही कहना था नंबर 1 भारतीय टीम के खिलाफ बांग्लादेश की टीम को हार का सामना करना पड़ा। उधर ग्रुप B में भी मुकाबले शुरु हो चुके थे। कंगारू टीम यानी कि ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने अपने सफर की शुरुआत जीत के साथ की। वहीं इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टीम को शुरुआती मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। पर इन सभी चीजों के परे सभी की निगाहें थी इस चैंपियंस ट्रॉफी के सबसे बड़े मैच यानी की विश्व के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान के मुकाबले पर। 23 फरवरी को दुबई में खेले गए इस मुकाबले में एक बार फिर से भारत को जीत मिली और पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। और इसके पीछे की वजह थी भारतीय गेंदबाजी और किंग कोहली की शतकीय पारी। जहां भारत इस जीत के साथ अपने कदम चैंपियंस ट्रॉफी की ओर बढ़ा रहा था, वहीं पाकिस्तान की टीम का सफर इस हार के साथ ही समाप्त हो गया था। नतीजा यह निकला की ग्रूप A से भारत और उधर न्यूजीलैंड की टीम ने बांग्लादेश को हरा कर सबसे पहले अपनी जगह सेमीफाइनल में पक्की कर ली। ग्रुप A में पाकिस्तान और बांग्लादेश का मुकाबला बारिश के कारण धुल गया और दोनों ही टीमों को 1-1 अंक दिया गया, पर इसका कोई फायदा नहीं था। उधर ग्रुप B में कंगारु टीम और अफ्रीका के टीम का मुकाबला बारिश के कारण धुला। नतीजन दोनों ही टीम को 1-1 साझा अंक प्राप्त हुए। उधर इंग्लैंड की टीम अपना खाता भी नहीं खोल पाई। इंग्लैंड की टीम को एक बार फिर से एक अंडरडॉग टीम यानी कि अफगानिस्तान के हाथों हार का सामना करना पड़ा और नतीजा यह निकला कि इंग्लैंड की टीम चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर हो गई। पर ग्रुप B में खास बात यह थी कि 2 की जगह 3 टीमों का संयोग बन रहा था सेमीफाइनल की ओर बढ़ने का। जिसके पीछे का कारण था अफगानिस्तान की टीम का इंग्लैंड से जीतना। लेकिन आगे के मुकाबले में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। ग्रुप B से ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। लेकिन ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले यानी कि भारत और न्यूजीलैंड के मुकाबले में चैंपियंस ट्रॉफी का असली रंग और रोमांच देखने को मिला। दोनों ही टीम के बीच सांस रोक देने वाला मुकाबला हुआ। अंत में भारत ने अपने स्पिन गेंदबाजी अटैक के दम पर इस मुकाबले को 44 रनों से जीता। इस मुकाबले में यह तय हो गया था कि जिसके पास स्पिन गेंदबाजी के ऑप्शन मौजूद हैं वो टीम आगे अपना लोहा मनवाएगी। जिसका जीता जागता उदाहरण देखने को मिला पहले सेमीफाइनल मुकाबले में जो कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के टीम के बीच 4 मार्च को दुबई में खेला गया। भारत ने इस मैच में कंगारू टीम को 11 गेंद और 4 विकेट शेष रहते हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 264 रनों का लक्ष्य दिया। जवाब में भारत ने विराट, श्रेयस, के एल राहुल और हार्दिक की महत्वपूर्ण पारी के चलते जीत लिया। इस मैच में बल्लेबाजी एक तरफ थी पर सबसे खास बात थी भारत की स्पिन गेंदबाजी जिसने कंगारू टीम को खुलकर रन बनाने ही नहीं दिया। और परिणाम यह रहा कि भारत ने एक बार फिर से चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में अपनी जगह पक्की करने में कामयाब रहा। इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल पर सभी की निगाहें थी कि आखिरकार इस मैच में कौन जीतेगा और किसका मुकाबला भारत के साथ फाइनल में होगा। 5 मार्च को दूसरा सेमीफाइनल पाकिस्तान के गद्दाफी स्टेडियम में खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम ने रचिन रविंद्र और विलियमसन की शतकीय पारी की मदद से अफ्रीका के टीम के सामने 362 रन का लक्ष्य रखा। विशाल स्कोर का पीछा करते हुए लगातार अंतराल पर अफ्रीकी टीम ने अपने विकेट गंवाए। और अंत में डेविड मिलर की शतकीय पारी की बदौलत अफ्रीकी टीम ने 300 का आंकड़ा पार तो किया पर जीत नहीं पाई। अफ्रीका के इस हार के साथ ही न्यूजीलैंड ने अपनी जगह चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पक्की कर ली थी। अब भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड के साथ फाइनल में 9 मार्च को होना था। दोनों ही टीमों ने दुबई में अभ्यास शुरु कर दिया। सभी क्रिकेट एक्सपर्ट्स के द्वारा अलग-अलग अनुमान लगाये जाने लगे, पुराने स्टैट्स देखे जाने लगे। लेकिन भारतीय टीम की निगाहें थी विश्वकप के हार की यादों को मिटाने की, न्यूजीलैंड से चैंपियंस ट्रॉफी 2000 में मिली हार का बदला लेने पर, बड़े मैचों में न्यूजीलैंड से मिली हार का बदला लेन पर और अपने आंकड़े सुधारने और मजबूत करने पर। ऐसा ही कुछ था न्यूजीलैंड के साथ भी, वह सभी मायनों में भारत से एक बार फिर आगे बढ़ने की ओर अपनी निगाहें टिकाए हुए थी। जिसके बाद 9 मार्च को भारतीय समयानुसार 2 बजे टॉस उड़ा और एक बार फिर से न्यूजीलैंड ने टॉस जीता। पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड के सामने एक बार फिर से चुनौती थी भारत के क्वालिटी स्पिनरों की। बल्लेबाजी शुरू होते ही न्यूजीलैंड की टीम ने भारतीय पेसर्स को अपना निशाना बनाना शुरु कर दिया। श्रृंखला के टॉप स्कोरर रचिन ने तेज खेलना शुरू किया। लेकिन कप्तान रोहित ने इस बीच प्लान चेंज किया और एक-एक कर स्पिनरों को न्यूजीलैंड के सामने लाना शुरु कर दिया। तेजी से बढ़ते रन गति में रोक तो लगी ही साथ ही लगातार समय अंतराल पर विकेट गिरने शुरू हुए। कुलदीप और वरुण के स्पिन के सामने पूरी न्यूजीलैंड की टीम ने घुटने टेकने शुरु कर दिए। लेकिन ब्रेसवेल की अर्धशतकीय पारी ने न्यूजीलैंड की टीम को 251 रन तक पहुंचा दिया। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम के ओपनर बल्लेबाज कप्तान रोहित शर्मा और उपकप्तान गिल ने अपने पुराने और तेजी से रन बनाने वाले अवतार में बल्लेबाजी शुरू कर दी और पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। कवर्स पर शॉट खेलते हुए गिल ने अपना विकेट गंवाया। जिसके बाद मैदान पर उतरे कोहली भी 1 रन की निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गए। भारत के रन गति में इन दो विकेट के बाद लगाम लगा। जिसके बाद एक बार फिर से कप्तान रोहित ने रन गति को बढ़ाने की सोचा और गलत शॉट सिलेक्शन के चलते आउट हो गए। जिसके बाद भारतीय टीम की कमान संभाली अय्यर और अक्षर ने। अय्यर के 48 रन के निजी स्कोर पर आउट होने के बाद एक बार फिर से के एल राहुल ने भारत की कमान संभाली। फिर क्या था राहुल, अक्षर, पांड्या के महत्वपूर्ण रन और जडेजा के विनिंग शॉट से भारत ने 2025 के चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। भारतीय टीम की इस जीत ने इस बात का उदाहरण दिया कि क्रिकेट में संयम बहुत महत्वपूर्ण है और भारतीय टीम पूरे धैर्य और संयम से भरी हुई है। भारतीय टीम की इस जीत ने पूरानी सभी कड़वी यादों को मिटा दिया साथ ही यह भी बता दिया कि भारत क्यों इस फॉर्मेट की बादशाह है।
क्यों बेहद खास रहा चैंपियंस ट्रॉफी 2025-
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सभी मुकाबले बेहद ही खास रहे। जिसका मुख्य कारण था गेंदबाजी, बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण और चैंपियंस ट्रॉफी का दुबई और पाकिस्तान दोनों ही जगह पर होना। पूरे चैंपियंस ट्रॉफी में गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ही अपने चरम पर देखने को मिली। जिसमें मुख्य रूप से स्पिन गेंदबाजी का बोलबाला रहा। भले ही टॉप विकेट टेकर तेंज गेंदबाज रहा। वहीं इस पूरे चैंपियंस ट्रॉफी में कई शतक भी देखने को मिले। सबसे रोचक और खास बात यह रही की यह चैंपियंस ट्रॉफी हाइब्रिड मोड पर खेला गया। जिसमे भारत ने अपने सभी मुकाबले दुबई में खेले तो वहीं अन्य टीमों को दुबई और पाकिस्तान दोनों ही जगहों पर मैच खेलना पड़ा।
भारत का चैंपियंस ट्रॉफी प्रदर्शन-
चैंपियंस ट्रॉफी के 9वें संस्करण का 9 मार्च रविवार को अंत हुआ। भारत ने तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वह सबसे ज्यादा बार चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने वाला देश बन गया है। भारत ने सबसे पहले 2002 सांझा रूप से खिताब जीता था। तब वो श्रीलंका के साथ संयुक्त विजेता बना था। फिर 2013 में इंग्लैंड को हराकर भारत ने इस खिताब को महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीता था और अब 2025 में न्यूजीलैंड को हराकर और 2000 के बदले को पूरा करके भारत ने यह खिताब जीता। वर्ष 2025 के चैंपियंस ट्रॉफी के सभी मुकाबले में भारतीय टीम का फूल डोमिनेंस देखने को मिला और परिणाम यह था कि भारत पूरे श्रृंखला में अपराजित रही। भारत के स्पिनर्स, तेज गेंदबाजों और बल्लेबाजों ने सभी परिस्थिति में टीम का साझा रूप से समर्थन किया और पूरा योगदान दिया। नतीजन भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
कई भारतीय खिलाड़ियों का यह पहला ICC खिताब रहा-
वर्ष 2025 का यह चैंपियंस ट्रॉफी भारत के लिए एक बेहद बड़ा खुशी का कारण रहा। इस खिताब को जीतने के लिए भारत के कुछ पुराने तो कई नए खिलाड़ी मौजूद रहे, जो अपना पहला ICC खिताब जीतने का सपना लेकर इस श्रृंखला को खेल रहे थे। इस सूची में श्रेयस अय्यर, वरुण चक्रवर्ती, हर्षित राणा, केएल राहुल का नाम आता है। जिन्होंने पहली बार किसी ICC खिताब को जीता। तो वहीं विराट,रोहित, जडेजा, पांड्या, अर्शदिप, कुलदीप, पंथ ऐसे खिलाड़ी थे जो कि ICC का खिताब पहले जीत चुके हैं।
भारत की ओर से कौन रहा सर्वाधिक रन स्कोरर-
वर्ष 2025 के चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की ओर से सभी बल्लेबाजों ने अपने-अपने बल्ले से रनों का योगदान दिया। पर इस सूची में सबसे ऊपर नाम है मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज श्रेयस अय्यर का। चार नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए अय्यर ने 243 रन बनाए। वहीं श्रेयस अय्यर के बाद विराट कोहली 218 , गिल ने 188 रन बनाए। सूची में रोहित, केएल राहुल, हार्दिक का नाम भी आता है।
भारत की ओर से कौन रहा सर्वाधिक विकेट टेकर-
वरुण चक्रवर्ती जिस तरह बीच टूर्नामेंट में हर्षित राणा की जगह आए और भारत के लिए ब्रह्मास्त्र बन गए, उन्होंने महज 3 मैचों में 9 विकेट झटके। वो मैट हेनरी के बाद सबसे ज्यादा विकेट (10) के बाद दूसरे नंबर पर रहे। शमी ने भी 9 विकेट झटके। वहीं भारत की ओर से कुलदीप, अक्षर और जडेजा ने भी विकेट से टीम की जीत में योगदान दिया।
ICC चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब के अब तक के विजेता
3 - भारत (2002,2013, 2025)
2 - ऑस्ट्रेलिया (2006, 2009)
1 - न्यूजीलैंड (2000)
1 – श्रीलंका (2002 सांझा रूप से)
1 - साउथ अफ्रीका (1998)
1 - वेस्टइंडीज (2004)
1 - पाकिस्तान (2017)
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