हमारा देश आगे बढ़ रहा है आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर हो रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान था, जिसे भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड ने भलीभांति अपनाया है और भारत को सशक्त बनाने की इस मुहिम में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड भारत की एक अग्रणी रक्षा कंपनी है जो कि रक्षा संबंधी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है। यही नहीं BEL नागरिक सुविधा के क्षेत्र में भी काम करती है। हम जिस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल मतदान के लिए करते हैं, उसे BEL ही बनाती है। उदय इंडिया के न्यूज एडिटर अंशुमान आनंद ने BEL (भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड) के चेयरमैन भानु प्रकाश श्रीवास्तव का साक्षात्कार किया। जिसमें उन्होंने भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड की भविष्य की कार्य योजना और पुरानी उपलब्धियों को साझा किया- प्रस्तुत है इस इस साक्षात्कार की प्रमुख बातें-
देखिये भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड रक्षा के क्षेत्र में औऱ उससे संबंधित क्षेत्रों में नए- नए अनुसंधान करके अपनी सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरण देने में विश्वास करती है। हमारे जितने प्रोडक्ट्स हैं उनका लगभग जो 75 प्रतिशत जो उपकरण है, वह स्वदेशी तकनीक और यहीं पर डिजाइन किये गए हैं। यानी स्वदेश में निर्मित किए गए हैं। बाहर के देशों पर हमारी निर्भरता काफी कम है। इसके लिए हम अनुसंधान और विकास पर काफी ध्यान देते हैं। भारत इलेक्ट्रानिक्स अपने टर्नओवर का लगभग 6.5 प्रतिशत अनुसंधान और विकास पर खर्च करता है। हमारे पास 3 स्तर का अनुसंधान और विकास का स्ट्रक्चर है औऱ उसमें लगभग 2700 इंजीनियर और वैज्ञानिक आज लगातार कार्य कर रहे हैं। हमारे यहां 2 सेन्ट्रल रिसर्च लेबोरेट्री हैं, जो भविष्य की तकनीक पर काम करती हैं। प्रोडक्ट डिवेलपमेंट एंड इनोवेशन सेंटर बैंगलुरु में हैं। जो भी मॉड्यूल हैं, सब-सिस्टम हैं जो सभी उत्पादों में लगाये जाते हैं उन सभी पर अनुसंधान करते हैं। और करीब 24 अनुसंधान और विकास की यूनिट हैं, जो कि विभिन्न स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट्स के साथ लगी है। जो कि कस्टमर को फाइनल प्रोडक्ट देती हैं। तो इन सभी का परिणाम यही है कि हम बहुत बड़े पैमाने पर देश में आत्मनिर्भरता लाने का काम कर रहे हैं जो कि पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत मुहिम से जुड़ा हुआ है। आज के समय में हम ना केवल यह उत्पाद डिफेंस को दे रहे हैं बल्कि हम इसको नागरिक क्षेत्र में भी लाने का प्रयास कर रहे हैं।
देखिये दो चीजें है, एक तो हम एंटी ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम बनाते हैं , जिसको D4 सिस्टम कहते हैं। जिसमें भविष्य में जो भी आने वाले ड्रोन्स हैं, उनको या तो राडार से या तो ऑप्टिक इलेक्ट्रिक सेंसर से डिटेक्ट करते हैं। और उसके बाद उनको डीटर करने का भी हमारे D4 सिस्टम में व्यवस्था है। एक तो रेडियो फ्रिक्वेंसी वेव (RF) से हम जाम कर देते हैं, जिससे ड्रोन की कार्यविधि बाधित हो जाती है और वह गिर जाता है। अगर वह नजदीक आ गया और रेडियो फ्रिक्वेंसी के क्षेत्र में आ जाता है तो हमारे पास उसे लेजर से खत्म करने और इनएक्टिव करने की सुविधा भी है।

यह जो D4 सिस्टम है, हमलोगों ने इसे G20 के लिए विशेष रुप से नहीं तैयार किया था। इसको किसी भी प्रकार के थ्रेट के लिए डिजाइन किया था। हमने इस सिस्टम को आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को पहले ही दिया हुआ था। जिसका प्रयोग मुख्य तौर पर G20 के दौरान सरकारी एजेन्सियों के द्वारा किया गया। G20 में NDRF के लिए हमने एक सिस्टम मुख्य रुप से तैयार किया था और उसे केमिकल, बॉयोलाजिकल, रेडियोलॉजिकल इन न्यूक्लियर हेजार्डस मैटेरियल ब्रेकिंग। इसे शॉर्ट मे कहते हैं CBRN हेजमैट ब्रेकिंग। ये कॉमनवेल्थ गेम्स के समय पर इंपोर्ट किया गया था। लेकिन इस बार जब G20 की समिट भारत में हुई तो एनडीआरएफ ने यह सोचा की क्यों ना इसे देश में विकसित किया जाए, जो कि मुख्य रुप से G20 में काम आये। तो हम ये सिस्टम आर्मी के लिए बनाते हैं, लेकिन एनडीआरएफ को मुख्य तौर पर G20 के लिए चाहिए था। हमने साढ़े 5 महीने के कम समय में इसका डिजाइन तैयार करके साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग करके 4 सिस्टम हमने एनडीआरएफ को दिया था, जिसका डिप्लॉयमेंट G20 के दौरान किया गया। जिसमें किसी भी थ्रेट को पकड़ने की क्षमता थी। तो उसमें पूरा बायोलॉजिकल सेंसर, न्यूक्लियर रेडिएशन, और इन सब को मॉनिटर करने की क्षमता थी। एनडीआरएफ के जो रेस्पॉन्डर्स हैं वो कहीं भी जा सकते हैं, उसपर उचित कदम उठा सकते हैं, उनके हेल्थ की मॉनिटरिंग। उसमें हमने कन्ट्रोल सिस्टम दिया था, जिसमें कि एक कंट्रोल सिस्टम से पूरा जो सीबीआरएएन मूवमेंट कहां है?, वो कहां जा रहा है? उसको पूरा मानिटर किया जाये। तो ये सिस्टम हमने एनडीआरएफ के कहने पर विशेष तौर पर G20 के लिए बनाया था और ऐसे 4 सिस्टम हमने एनडीआरएफ को दिया।
हम पर्यावरण की मदद के लिए हमने अपनी सारी इकाइयों में कार्य किया है यह सुनिश्चित किया है कि हमारे सारे इकाइयों में सोलर पावर लगे और जो हमारी विंड एनर्जी भी जो हमने बैंगलुरु में लगाये हैं। उससे विंड एनर्जी बनकर जो ग्रिड में जाती हैं उनका हमें मुख्य तौर पर लाभ मिलता है। हमने अपने फैक्ट्री में , स्टॉफ कालोनी में बहुत ही बड़े पैमाने पर सोलर पावर लगाये हैं, जिससे हमारी काफी एनर्जी रिनेवेबल एनर्जी में हो जाता है। हमने रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी बहुत अच्छी व्यवस्था की हुई है। हमारी सभी इकाइयों में एलईडी बल्ब लगे हुए हैं। और अभी जितना नवनिर्माण कार्य हम कर रहे हैं उसमें हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जितनी अधिक मात्रा में सूर्य की रोशनी आ जाये हम उस चीज पर भी मुख्य रुप से फोकस कर रहे हैं। जिससे दिन के समय में बिजली की कम खपत हो। इसके अलावा हम डिफेंस फोर्सेज के साथ काम करते रहे हैं और टेक्नोलॉजी में हमारा खास योगदान रहा है और पीएम मोदी का कहना है कि भारत को आत्मनिर्भर बनाया जाए तो हमने यह प्रयास किया है कि हम अपने ज्ञान का सिविल मार्केट में किस तरह प्रयोग करें।
दो चीजों का मैं उल्लेख करना चाहता हूं- पहला कि हमने एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ टाइअप किया है, कि कैसे एयपोर्ट पर नेविगेसनल औजार, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, राडार सिस्टम है, जिसे हम कितना स्वदेशीकरण कर सकें। और उसी दिशा में हमारा पहला सफल प्रयास रहा है कि हमने पूर्ण रुप से स्वदेशी एयर ट्रैफिक मैंनेजमेंट सिस्टम, AI यानी कि एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ डेवलप किया है। पहला सिस्टम हमने भुवनेश्वर एयपोर्ट पर इंस्टॉल किया है। वह पूरी तरह से सेवा में है और जल्द ही एयपोर्ट एथॉरिटी आॅफ इंडिया उसका उद्घाटन भी करेगी। एकबार यह सफल हो गया तो बाकि सारी कैटेगरी C और D एयपोर्ट पर भी यह सिस्टम लगेगा। अभी तक यह सिस्टम बाहर से इंपोर्ट होता रहा है। और दूसरा हमने बड़ा कदम दिल्ली मेट्रो के साथ मिलकर उठाया है। उनके साथ MOU किया है, पिछले 2 सालों में और हमारी यह कोशिश और प्रयत्न रहा है कि जो मेट्रो में प्रोडक्ट्स आयातित होते हैं, उनको किस प्रकार रिप्लेस किया जाए। तो जो इसमें हमें पहली सफलता मिली है। वह है ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन सिस्टम जो इस बार हम लोगों ने बनाया है, जो कि फरवरी में ही दिल्ली मेट्रो के रेड लाइन पर इंस्टॉल कर दिया गया है। रेड लाइन का संचालन होता है वो BEL और DMRC द्वारा मिलकर स्वदेशी एयर ट्रैफिक सुपरविजन सिस्टम उसके द्वारा हो रहा है जो कि काफी बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा स्टेशनों पर प्लेटफार्म स्क्रीन डोर जो लगा होता है, उसका भी हम लोगों ने एक सिस्टम तैयार किया है जो कि एनसीईआरटी के साथ मिलकर तैयार हुआ है। साथ ही हमारा प्रयास यह है कि एक की जगह और भी स्टेशनों पर इसको लगाया जाए। एक तीसरी चीज है जो कि मेट्रो के कम्प्यूटर बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम उसपर भी हमने दिल्ली मेट्रो के साथ मिलकर काम करना शुरु कर दिया है। और अगले एक से दो साल के भीतर हम इसको भी प्रयोग में लेकर आयेंगे। BEL का प्रयास मेट्रो, एयपोर्ट एथॉरिटी के साथ औऱ साथ ही अन्य क्षेत्रों में हो रहा है। जिससे देश ज्यादा से ज्यादा
आत्मनिर्भर बने।
अगर धन्धे की बात करें तो पिछले साल यानी साल 2022-23 में BEL को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। हमने 17733 करोड़ रुपये का सेल किया था। तो साल के अंत में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की हमारी ऑर्डरबुक पोजिशन थी। और अभी की बात करें तो अप्रैल से लेकर अबतक लगभग 15500 करोड़ का का ऑर्डर BEL को आ चुके हैं। तो उस हिसाब से अच्छी उपलब्धि है। क्योंकि पिछले पूरे साल में 20 हजार करोड़ का ऑर्डर था। हमारी यही कोशिश रहेगी कि पिछले साल के रिकॉर्ड को तोड़ा जाए। उसी हिसाब से पिछले साल टर्नओवर में जो हमने रिवेन्यू में विकास किया था वह 15.22 प्रतिशत का था। साल 2021-22 में हमने 15 हजार 44 करोड़ का टर्नओवर दिया था और 2022-23 में वह 17700 करोड़ का हो गया, जो कि लगभग 15 प्रतिशत का ग्रोथ था। इस साल हमारा टार्गेट 20 हजार करोड़ के लिमिट को पार करना है, औऱ अगर हम इसे पार करते हैं तो हमारा जो ग्रोथ यानी कि विकास होगा वह 17 प्रतिशत का होगा। जो कि निश्चित तौर पर एक उप्लब्धि होगी। हमारा प्रयास यही रहेगा का हम व्यापार के क्षेत्र में भी विकास करते रहें। कॉम्पटिशन के इस दौर में लाभ मायने करता है और BEL का लाभ पिछले साल 23 प्रतिशत था। जो कि इस साल भी उसी के आस पास रहेगी। क्योकि आज के इस दौर में प्रतिस्पर्धा बहुत मायने करती है और हमारी प्रतिस्पर्धा विदेशी कंपनियों, प्राइवेट क्षेत्रों के कंपनियों के साथ सीधे तौर पर है। और हमें इस बात पर विश्वास है कि इस साल भी हम 21 से 23 प्रतिशत का लाभ प्राप्त करेंगे।
निर्यात की बात जो कर रहे हैं उसमें हमने पिछले साल लगभग 97 प्रतिशत का टर्नओवर अपने देश में ही सप्लाई किया था। जिसमें 87 प्रतिशत BEL ने डिफेंस सेक्टर में किया और 3 प्रतिशत BEL ने दूसरे देश में निर्यात किया। बता दें कि डिफेंस के सेक्टर में निर्यात करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है तो ऐसे में पिछले साल हमने 400 करोड़ का ही निर्यात किया पर इस साल हमारा टार्गेट है कि हम 700 करोड़ का निर्यात करें। जिसमें मुख्य रुप से हमारे देश के साथ-साथ हम मित्र देशों में भी निर्यात करने की कोशिश कर रहे हैं। और एक ऑफसेट बिजनेस होने के नाते हमारी कोशिश है कि हम फ्रांस, स्पेन और एयरबस को सप्लाई करें। जहां तक स्वदेशी प्रोडक्ट का सवाल है तो हमारे सारे प्रोडक्ट तो भारत में ही बन रहे हैं। जिसमें 75 से 80 प्रतिशत भारत में ही डिजाइन किये हुए होते हैं। 20 प्रतिशत हमारे जो प्रोडक्ट्स हैं वो विदेशी साझेदारों से मिलकर बने हुए होते हैं। जिसमें कुछ चीजों का निर्माण हम भारत में ही करते हैं।
इस चीज को लेकर हमारी बहुत ही आक्रामक योजना है जिससे हम अपने प्रोडक्ट्स को विदेश में आसानी से सेल कर सके। तो उसके लिए दो तरीके से प्रयास होता है। एक तो है कि जहां भी आवश्यकता है वहां हम अपने प्रोडक्ट को सेल कर सके। इस दिशा में हमने श्रीलंका, ओमान, वियतनाम में, और साथ ही जितने भी मित्र देश हैं वहां हमने अपने कार्यालय भी खोले हैं। हमारा न्यूयार्क और सिंगापुर में भी ऑफिस है। हम ब्राजील में भी अपना कार्यालय खोलने वाले हैं। और इस क्षेत्र में हमारी टीम पूरी कोशिश कर रही है कि हम दूसरे देशों में जाएं और वहां से बड़े पैमाने पर ऑर्डर लाया जाए जिससे हमारी मार्केटिंग और बढ़े। इस दिशा में दूसरा हमारा जो पार्ट है वह यह है कि जितनी भी विदेशी बड़ी कंपनियां हैं, उनके पास एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट होता है और उनके पास एक ऑफसेट ऑब्लिगेसन होता है, जिसके अंतर्गत उन्हें कुछ प्रतिशत भारत में बनाना पड़ता है। तो उनके साथ भी हमारी साझेदारी है। जिसमें हम अपनी मैन्यूफैक्चरिंग कैपेबिलिटी के आधार पर बनाएं और उनका निर्यात करें। कुछ प्रोडक्ट हम AAI के लिए बना रहें हैं और उनको निर्यात कर रहे हैं। और हमारी कोशिश है कि प्रधानमंत्री के इस काल को हम स्पोर्टिंग तरीके से लें और ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट्स को निर्यात करें।
BEL का प्रोडक्ट रेंज बहुत ही बड़ा है। कम्यूनिकेशन तो इसका एक छोटा पार्ट है। अगर आप प्रोडक्ट रेंज देखते हैं तो BEL का जमीन, पानी पर, पानी के अंदर और हवा में इन सारे क्षेत्रों में हैं BEL का रेंज है। हम रडार बनाते हैं, हम संचार के साधन बनाते हैं, हम जहाज में लगने वाले सोनार को बनाते हैं। फायर कन्ट्रोल सिस्टम बनाते हैं जिससे की टारपिडो औऱ रॉकेट फायर किये जाते हैं। हम मुख्य तौर पर टारपीडो डिफेंस सिस्टम भी बनाते हैं। सबमरीन में लगने वाले सभी सिस्टम जैसे कि सोनार सिस्टम, टारपीडो फायर सिस्टम, फायर कन्ट्रोल सिस्टम, संचार माध्यम के सिस्टम हम सभी चीजें बनाते हैं। हवाई क्षेत्र में हम तेजस जैसे फाइटर जेट के एवियॉनिक्स पैकेज बना के देते हैं। C-295 में हमारा एयरबस के साथ समझौता है तो हम एयरबस को भारत में कुछ चीजें जैसे कि काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम, मिसाईल अप्रोच वार्निंग सिस्टम बना के दे रहे हैं। जो कि C-295 जैसे विमान को बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। स्ट्रैटेजिक प्लेटफार्म के लिए भी हम हथियार और औजार बना के दे रहे हैं। कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम भी हम बना के दे रहे हैं। C4I (सी4आई) सिस्टम भी एक है जिसमें हमारी मजबूती है जिसके तहत हम पूरे प्रोडक्ट के नेटवर्किंग की चीजें बनाते हैं, जैसे की इंटिग्रेटेड एयर कमांड सिस्टम, नेवल कमांड कंट्रोल सिस्टम, कोस्टल सर्विलांस सिस्टम, इंटीग्रेटेड पेरिमीटर सिक्योरिटी सिस्टम का निर्माण किया जो कि BEL के विस्तार की कहानी को दिखाता है।
हम किसी भी प्रोडक्ट को HAL को देंगे और HAL उसको निर्यात करता है। हम किसी भी प्रोडक्ट्स के OEM यानी की ओरिजिनल इक्विपमेंट मैनूफैक्चर है। इसी दिशा में जो मुख्य तौर पर प्रोडक्ट की बिक्री होगी वह HAL के द्वारा किया जाएगा। जिसके अंतर्गत हम प्रोडक्ट्स को HAL को सप्लाई करेंगे। हम उस जगह पर यह सुनिश्चित करेंगे। जैसे कि अर्जेन्टीना की जो रिक्वायरमेंट है कि किसी खास देश और उसके उत्पादों का प्रयोग नहीं करना है तो हम वह ध्यान देंगे कि उस विशेष उत्पाद के बिना हम वह प्रोडक्ट उसे सफलतापूर्वक प्रदान कर सकें।
हमारे पास 2700 इंजीनियर्स , रिसर्च और विकास के क्षेत्र में हैं। हमारी पूरी स्ट्रैंथ कुल 9000 है। जिसमें आधी जनसंख्या के लोग इंजीनियर्स हैं, और उसके आधे यानी कि 2700 लोग रिसर्च और विकास के क्षेत्र के हैं। और यह सीधे तौर पर BEL से जुड़े हुए हैं। वहीं अगर इंडायरेक्ट तौर पर बात करें तो BEL काफी बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ा है साथ ही रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है। BEL से सीधे तौर पर तो 8800 से अधिक लोग जुड़े हुवे हैं पर वहीं दूसरी तरफ MSME, PRIVATE सेक्टर से भी कई लोग BEL से जुड़े हुए हैं। तो इस प्रकार BEL का परिवार काफी बड़ा है औऱ BEL 80000 से 1लाख लोगों से जुड़ा हुआ है। जिससे इन सभी लोगों को आजीविका प्राप्त हो रही है। हमारी इस वक्त भारत में कुल 9 इकाइयां है औऱ आगे चलकर हम भारत में 5 अन्य इकाइयां भी खोल रहे हैं। जिसके कार्य प्रगति पर हैं। जिसके दिसम्बर माह से सक्रिय हो जाने के पूरे आसार है जिससे निश्चित तौर पर रोजगार पैदा होंगे।
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