नई दिल्ली -पेजर और वॉकी-टॉकी में विस्फोट के बाद इजरायल ने अब लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह के खिलाफ अब सीधे युद्ध छेड़ दिया है। सोमवार 23 सितम्बर को हिज़्बुल्लाह पर भीषण हमला करते हुए इजरायल ने लगातार 1600 हमले किए हैं। इन हमलों में लगभग 500 लोग मारे जा चुके हैं। चिंता की बात यह है कि इस जंग में अमेरिका, ईरान जैसे देशों के भी कूदने का डर है। अमेरिका ने तो मिडल ईस्ट में अपने और सैनिक भेजने का ही ऐलान कर दिया है। वहीं ईरान का कहना है कि ये हमले हमें युद्ध में घसीटने की साजिश हैं।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बीच लेबनान की जनता को संबोधित करते हुए कहा है कि आप लोग सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि लेबनान के लोगों से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह को नहीं छोड़ेंगे। इजरायल के इन हमलों से पूरे पश्चिम एशिया में ही हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
फ्रांस ने UNSC की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का किया आग्रह
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बरोट ने लेबनान में इजरायल के हमले पर चिंता जताई। सोमवार को बरोट ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि फ्रांस ने लेबनान के हमलों को संबोधित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक इमरजेंसी मीटिंग का अनुरोध किया है। बरोट ने तनाव कम करने और पूरे क्षेत्र के हमलों को रोकने का आह्वान किया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिआन ने कहा है कि अगर इजरायल अपने सारे हथियार रख देता है तो ईरान भी ऐसा करने के लिए तैयार है। ईरानी राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में बयान दिया कि ईरान शांति के साथ रहना चाहता है, हम युद्ध नहीं चाहते हैं। यह इजरायल है जो सभी तरह के संघर्ष को अंजाम देना चाहता है। हम सभी हथियार रख देंगे अगर इजरायल भी ऐसा करने के लिए तैयार हो।
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