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जोहो : भारत की स्वदेशी तकनीकी सफलता

Zoho: India's homegrown tech success

जोहो आजकल चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह भारतीय मूल का ऐसा सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बन गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है। हाल ही में कंपनी के संस्थापक श्री श्रीधर वेम्बू ने स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अपने नए प्रयासों की घोषणा की है, जिसके अंतर्गत कंपनी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्चस्तरीय अनुसंधान केंद्र स्थापित कर रही है। इस प्रयास का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं बल्कि ग्रामीण युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना भी है। जोहो का यह दृष्टिकोण “भारत में बने, भारत के लिए बने और विश्व में छाए” की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसके अलावा जोहो सुर्खियों में आया जब भारत के गृह मंत्री अमित शाह जी ने भी जोहो प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया। यह घटना केवल तकनीकी दृष्टि से ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई। अमित शाह जी जैसे शीर्ष राजनेता का इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म से जुड़ना इस बात का संकेत है कि भारत का प्रशासनिक और सरकारी तंत्र अब विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहने के बजाय अपने ही देश में विकसित तकनीकी साधनों को प्राथमिकता दे रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के मूल उद्देश्य के अनुरूप कदम है। इससे जोहो को राष्ट्रीय स्तर पर और भी व्यापक पहचान मिली है तथा आम जनता में इसके प्रति विश्वास और गर्व की भावना और गहरी हुई है।

जोहो एक ऐसी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसने अपने स्वदेशी दृष्टिकोण और आत्मनिर्भर तकनीकी क्षमता के बल पर विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह कंपनी पूरी तरह भारतीय मूल की है और इसका मुख्यालय तमिलनाडु में स्थित है। जोहो की स्थापना भारतीय उद्यमी श्री श्रीधर वेम्बू ने 1996 में की थी। उस समय भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ रहा था, परंतु अधिकांश कंपनियाँ विदेशी सॉफ्टवेयर और पूंजी पर निर्भर थीं। ऐसे समय में जोहो ने पूरी तरह भारतीय पूंजी और भारतीय प्रतिभा के बल पर अपनी यात्रा शुरू की। प्रारंभ में इसका नाम “एडवेंटनेट” था, जिसे बाद में बदलकर “जोहो कॉर्पोरेशन” कर दिया गया। धीरे-धीरे यह कंपनी एक छोटे से स्टार्टअप से विश्व-स्तरीय सॉफ्टवेयर प्रदाता के रूप में विकसित हुई। श्री श्रीधर वेम्बू ने यह साबित कर दिखाया कि भारतीय प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार की क्षमता किसी भी विदेशी कंपनी से कम नहीं है। उनका उद्देश्य केवल एक सफल व्यावसायिक संस्था बनाना नहीं था, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना था, ताकि हमारा देश अपनी जरूरतों के लिए विदेशी सॉफ्टवेयर कंपनियों पर निर्भर न रहे।

जोहो की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने कभी भी विदेशी निवेश या पूंजी पर निर्भरता नहीं दिखाई। श्रीधर वेम्बू ने स्वयं यह निर्णय लिया कि कंपनी पूरी तरह स्वदेशी पूंजी और भारतीय प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ेगी। यह निर्णय उस समय लिया गया जब भारत में अधिकांश स्टार्टअप विदेशी वेंचर कैपिटल पर निर्भर थे। जोहो ने अपने अनूठे कार्य मॉडल से यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय उद्यमिता यदि दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े तो सफलता के लिए विदेशी सहायता आवश्यक नहीं है।

जोहो के उत्पाद विविध प्रकार के हैं। इसमें व्यापार, वित्त, लेखांकन, विपणन, मानव संसाधन, ईमेल, प्रोजेक्ट प्रबंधन और क्लाउड सेवाओं से संबंधित लगभग सभी सॉफ्टवेयर समाधान उपलब्ध हैं। जोहो वन, जोहो मेल, जोहो बुक्स, जोहो सीआरएम और जोहो वर्कड्राइव जैसे उत्पादों ने छोटे से लेकर बड़े उद्योगों तक को अपनी दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों में आधुनिक डिजिटल सुविधा प्रदान की है। जोहो के सभी सॉफ्टवेयर उपयोग में सरल, सुरक्षित और किफायती हैं। यही कारण है कि आज यह भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी लाखों उपयोगकर्ताओं का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन चुका है।

जोहो की नीति केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं है। श्रीधर वेम्बू ने इस कंपनी को सामाजिक दायित्व से भी जोड़ा है। उन्होंने यह विचार रखा कि भारत के गाँवों में भी उच्च तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर पैदा किए जाएँ। इस सोच के परिणामस्वरूप जोहो ने अपने कई अनुसंधान और विकास केंद्र ग्रामीण तमिलनाडु के क्षेत्रों में स्थापित किए हैं। वहाँ के स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया गया है। इस पहल से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हुई है बल्कि डिजिटल भारत की अवधारणा को वास्तविक रूप मिला है।

जोहो का यह उत्थान भारतीय युवाओं और नवप्रवर्तकों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। इस कंपनी ने यह सन्देश दिया है कि यदि किसी के पास मजबूत दृष्टि, स्वदेशी भावना और नवाचार की लगन हो तो किसी भी क्षेत्र में वैश्विक स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। श्रीधर वेम्बू का यह कथन प्रसिद्ध है कि “भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनना चाहिए।” यह वाक्य आज जोहो की नीति और कार्यशैली में स्पष्ट रूप से झलकता है।

आज जब दुनिया भर में डेटा सुरक्षा, डिजिटल गोपनीयता और तकनीकी स्वतंत्रता के प्रश्न तेजी से उभर रहे हैं, तब जोहो का महत्व और भी बढ़ गया है। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो भारतीय सर्वरों पर संचालित होता है, जहाँ उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखी जाती है। इस दृष्टि से जोहो न केवल भारत के लिए बल्कि उन सभी देशों के लिए प्रेरणा है, जो तकनीकी स्वतंत्रता और डिजिटल स्वराज की दिशा में बढ़ना चाहते हैं।

जोहो की सफलता केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी स्वाभिमान की कहानी है। इस कंपनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय मस्तिष्क और मूल्य यदि एक साथ काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। जोहो का विकास यह बताता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनने की क्षमता रखता है।

आज जोहो केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि डिजिटल भारत के स्वप्न की पूर्ति का प्रतीक बन चुका है। यह दर्शाता है कि सच्ची प्रगति तभी संभव है जब नवाचार, स्वदेशी भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व एक साथ आगे बढ़ें। आने वाले वर्षों में जोहो का यह योगदान न केवल भारत के तकनीकी इतिहास को दिशा देगा, बल्कि यह भी प्रमाणित करेगा कि आत्मनिर्भर भारत की राह तकनीकी रूप से मजबूत, स्वदेशी और आत्मविश्वास से परिपूर्ण है। आने वाले वर्षों में जोहो जैसी स्वदेशी कंपनियाँ भारत को डिजिटल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी। यह कहानी न केवल तकनीकी सफलता की है, बल्कि यह उस विश्वास की कहानी है कि यदि हम अपनी मिट्टी, अपनी प्रतिभा और अपने लोगों पर भरोसा करें, तो भारत विश्व में किसी भी क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है।





डॉ दीपक कोहली
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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