वर्ष 1961 में भारत सरकार को स्कूली शिक्षा से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करने तथा उन्हें सुझाव देने के कार्य के अनुरुप राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी कि NCERT का गठन किया गया। एक स्वायत्त संगठन होने के नाते NCERT ने कई मामलों में केंद्र एवं राज्य सरकारों को सुझाव दिया। एनसीईआरटी की स्थापना जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री होने के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय के तहत 27 जुलाई 1961 में की गई थी। जिसके बाद इसने 01 सितंबर 1961 से काम करना शुरू किया। तब इसमें सरकार ने 07 राष्ट्रीय शासकीय संस्थानों को मिला दिया था। ऐसे में एनसीइआरटी पाठ्यक्रमों में एक बड़े बदलाव की बात की जा रही है। और साथ ही एनसीईआरटी द्वारा गठित पैनल द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। स्कूल के शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के दृष्टि से समय-समय पर NCERT द्वारा नई नीति लाई गई। जो कि निश्चित ही मददगार साबित हुई। पैनल द्वारा पेस किए गए प्रस्ताव के मुताबिक एक Common Education System को डिजाइन और सपोर्ट करने के एजेंडे के साथ NCERT द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान संस्थान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT की 12 वीं कक्षा की किताबों में अब इंडिया की जगह भारत लिखा जाएगा। हालांकि इसका कोई प्रमाण अभी सामने नहीं आया है। किताबों में जरूरी बदलाव को लेकर बनाया गए पैनल के फैसले पर सूत्रों के खबर के अनुसार कहा जा रहा है कि एनसीईआरटी ने अपनी मुहर लगा दी है। एनसीईआरटी ने कहा है कि किसी भी प्रकार के अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
कब हुई थी सिफारिश
एनसीआईटी पैनल ने इन बदलावों की सिफारिश उस वक्त की थी, जब देश में इंडिया बनाम भारत विवाद चल रहा था। इसकी शुरूआत बीते महीने देश में हुए जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति को भेजे गए निमंत्रण पत्र में 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा जाने के बाद से हुई है। कमेटी के प्रेसिडेंट सीआई इसाक ने पैनल पाठ्यक्रम की किताबों में इंडिया शब्द को बदलकर भारत करने की सिफारिश की थी। जिसके बाद पैनल ने सभी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में "इंडिया" को "भारत" से बदलने के प्रस्ताव को इसके सदस्यों से सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। ऐसे में जल्द ही एनसीईआरटी कि किताबों में इंडिया की जगह भारत लिखा नजर आ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडिया के अलावा एंशिएंट हिस्ट्री की जगह किताबों में क्लासिकल हिस्ट्री को भी शामिल किए जाने की संभावनाएं हैं। साथ ही समिति ने हिंदू योद्धाओं की वीरगाथाओं को भी किताब का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया है। गौरतलब है कि साल 2020 में नई शिक्षा निति के आने के बाद ये परिवर्तन किए गए हैं।
कमेटी के प्रेसिडेंट सीआई इसाक ने कहा कि सात सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से यह सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि भारत बहुत पुराना नाम है। भारत नाम का प्रयोग विष्णु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में किया गया है, जो 7,000 वर्ष पुराने हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना और 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद ही इंडिया शब्द आम इस्तेमाल में आया। इसलिए समिति ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया है कि सभी कक्षाओं की किताबों में इंडिया की जगह भारत नाम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अंग्रेजों द्वारा भारत पर थोपी गई परंपरा और नियमों में सुधार की आवश्यकता है। जो देश के हित के लिए स्वर्णिम कदम है। भारत नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर G20 शिखर सम्मेलन के दौरान लिखा गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से दिए गए रात्रिभोज के निमंत्रण में PRESIDENT OF INDIA की जगह PRESIDENT OF BHARAT लिखा गया था। उसी वक्त जी20 के मंच से पीएम मोदी की नेमप्लेट पर 'भारत' भी लिखा नजर आया था। इस पर विपक्षी दलों ने खूब हंगामा किया था। जिसकी चर्चाएं कई दिनों तक समाचार पत्रों के साथ ही टीवी चैनलों में भी चरम पर थी।
एनसीईआरटी ने 2021 में विभिन्न विषयों पर पेपर तैयार करने के लिए 25 समितियों का गठन किया था। उनकी समिति भी इनमें से एक है। इस समिति ने पाठ्यपुस्तकों में 'प्राचीन इतिहास' के स्थान पर 'शास्त्रीय इतिहास' को शामिल करने की सिफ़ारिश की है। 'अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को तीन चरणों में विभाजित किया - प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक, जिसमें भारत को अंधेरे में, वैज्ञानिक ज्ञान और प्रगति से अनभिज्ञ दिखाया गया। हालाँकि, उस युग में भारत की उपलब्धियों के कई उदाहरणों में आर्यभट्ट का सौर मंडल मॉडल पर काम शामिल है।
अब ऐसे में समिति ने पाठ्यपुस्तकों में 'हिंदू जीत' को उजागर करने की भी सिफारिश की है। इसके अलावा, समिति ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को शामिल करने की भी सिफारिश की है। अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है तो एनसीईआरटी की नई किताबों में 'इंडिया' की जगह 'भारत' मुद्रित किया जाएगा। हालांकि, एनसीईआरटी के अधिकारियों ने कहा कि पैनल की सिफारिशों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। एनसीईआरटी पैनल ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) को शामिल करने की सिफारिश की है। पैनल का मानना है कि एनसीईआरटी द्वारा जल्द ही इस प्रस्ताव पर बात की जाएगी और साथ ही उक्त फैसला भी लिया जाएगा।
सात्विक उपाध्याय
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