शिक्षा ही वो हथियार है जो व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में सक्षम है, शिक्षा ही वो मूलाधार शास्त्र है जिसके माध्यम से सभ्य तथा उत्कृष्ट समाज की आकांक्षा की जा सकती है। शिक्षा के माध्यम से ही गरीब वर्ग अमीर बनने का ख्वाब देखता है तथा शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज की पिछड़ी जातियां मुख्य धारा में शामिल होकर समाज में अपनी पहचान बनाने का सपना देखती हैं क्योंकि एक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ही देश में हो रहे घटनाक्रमों का लाभ आंकलन कर सकता है तथा स्वयं का उचित अनुचित जांच कर सकता है। ऐसे में यदि शिक्षा व्यवस्था ही अनियमितताओं एवं धांधलियों का सामना करे, तो देश के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगता है। भारत जैसे विकासशील देश में एक बड़ी आबादी मध्यम वर्ग के परिवार से आती है जो प्रतिभावान प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने बुनता है। किंतु बीते कुछ दिनो में कई प्रमुख परीक्षाओं के लीक और कैंसिल होने की खबर ने प्रतियोगी विद्यार्थियों के आत्मा को झिंझोड़ कर रख दिया है। यूं तो देश में प्रतिवर्ष कई परीक्षा सीधे तौर पर पहले ही 'पेपर लीक' होने से रद्द कर दिये जाते हैं। किंतु एक साल में ही राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नीट यूजी और यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक होना और उसकी वजह से परीक्षा रद्द किये जाने की घोषणा, देश के युवा वर्ग के भविष्य के लिए निश्चित ही अनुचित है। जो विद्यार्थी कई-कई सालों से बिना एक दिन गंवाए, बिना कोई त्यौहार मनाए परीक्षा की तैयारी में अथक रूप से लगे रहते हैं, उसे पास करने का प्रयास करते हैं, उनके मानस पर पेपर लीक का असर उन्हें अवसाद और चिंता जैसी अंकशास्त्री बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना देती है जिसके लिए देश के राजनेताओं एवं नीति निर्माताओं को संभावत: कभी भी जवाबदेह नहीं देखा गया है।
नीट यूजी और नेट दोनों ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं हैं और दोनों में ही पेपर लीक की खबर सामने आना देश की परीक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती है। बड़ी बात यह है कि इन दोनों ही परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी कि NTA कराती है। NTA का गठन साल 2017 में केंद्र सरकार ने किया था जो की एक स्वायत्त निकाय है तथा देश में उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करती है। साथ ही यह पेपर तैयार करने से लेकर एग्जाम सेंटर तक पेपर वितरित करने तक की जिम्मेदारी भी संभालती है ऐसे में नीट यूजी और नेट एग्जाम में हुई गड़बड़ी से NTA पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह यह लगता है क्या NTA इन परीक्षाओं को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए वांछित संसाधनों से परिपूर्ण है या नहीं?
साथ ही इन परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के तार शिक्षा माफियाओं ,कोचिंग माफियाओं एवं पेपर सॉल्वर गैंग से भी जुड़ जा रहा है। जिसमें तथाकथित रूप से राजनेता एवं अमीर लोग के भी शामिल होने के सबूत मिले हैं। जिन्होंने पेपर लीक के लिए 5 से 10 लाख रुपए तक लिया। इन अराजक तत्वों से केवल और केवल निर्दोष, ईमानदार, मासूम और गरीब वर्ग के अभ्यर्थी को ही ज्यादा नुकसान पहुंचता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लीक मामले को सरकार द्वारा पूरी तरह नियंत्रण में नहीं लिया गया तो जल्दी ही इन परीक्षाओं पर से अभ्यर्थियों का विश्वास भी उठ जाएगा और मजबूरन उन्हें किसी और रोजगार की तलाश करनी पड़ेगी। साथ ही एक बड़ा शिक्षित वर्ग सड़क पर खड़ा होने को मजबूर होगा। आइए इन दोनों ही परीक्षाओं से जुड़े कुछ विशेष पहलुओं को समझने की कोशिश करते हैं:
नीट यूजी सरल भाषा में कहें तो देश भर के एम्स, सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए एक प्रवेश परीक्षा है। यूं तो भारत में सभी को लगता है की सबसे ज्यादा विद्यार्थी यूपीएससी या स्टेट पीसीएस में लगे हुए हैं पर इस साल 2024 में नीट की कुल 108940 सीटों के लिए मांगे गए प्रतिवेदन के लिए 24 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन किया था जो अपने आप में एक बेहद विशाल का आंकड़ा है। विशेषज्ञों द्वारा यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि नीट यूजी स्कैम की शुरुआत रजिस्ट्रेशन के समय पर ही हो गई थी, जब रजिस्ट्रेशन की डेट खत्म हो जाने के 24 दिन बाद अचानक से 2 दिन के लिए और बढ़ाई गई थी साथ ही कुछ बच्चे जो कि ओडिशा, झारखंड और कर्नाटक के थे, उनके एग्जाम सेंटर गुजरात में थे। जबकि विकल्प में नेटिव प्लेस को चुनने का विकल्प मौजूद रहता है। इसके अलावा पेपर लीक की घटना एग्जाम से 1 दिन पहले ही हो गई थी शिक्षा मंत्रियों ने पेपर 5 से 50 लाख रुपए में बेचा था। बिहार पुलिस ने तो पेपर सॉल्वर गैंग को पकड़ने का दावा भी किया जिसमें कथित तौर पर कुछ डॉक्टर ही एग्जाम देने बैठे थे पर इन सब के बीच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि जब रिजल्ट जारी हुआ तो इस बार नीट एग्जाम में कुल 67 बच्चों ने 720 में से 720 अंकों के साथ प्रथम स्थान हासिल किया जो की बिल्कुल ही असामान्य घटना है। पिछले कुछ वर्षों के परिणामों को देखा जाए तो केवल एक या दो ही बच्चे प्रथम स्थान हासिल करते आए हैं। हालांकि NTA ने इसके लिए प्रश्न पत्र का सरल होना बताया परंतु दो बच्चों को 718 और 719 अंक मिले थे जो की नीट मार्किंग प्रक्रिया के अनुसार संभव ही नहीं है। इसके प्रति उत्तर में NTA द्वारा ग्रेस मार्क का का बहाना दिया गया। जिसके लिए कोई भी उचित आधार या तर्क प्रस्तुत नहीं किए गए साथ ही NTA पिछले कई सालों से इस परीक्षा का संचालन कर रहा है तब भी बच्चे रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाते थे या तब भी एग्जाम सेंटर पर पेपर वितरण में लेट लतीफ होती थी, तब NTA ने ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया। इसके अलावा RE NEET की प्रक्रिया में भी कई खामियां हैं जिसे NTA की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।
इसी तरह 18 जून को आयोजित यूजीसी नेट एग्जाम को भी पेपर ली की वजह से 19 जून को रद्द कर दिया गया था साथ ही परीक्षा दोबारा से कराये जाने की घोषणा भी की गई है, जिसमें कुल 11 लाख 21225 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। आसान शब्दों में कहें तो पीएचडी और असिस्टेंट प्रोफेसर होने के लिए नेट क्वालीफाई करना आवश्यक है। इसके साथ ही इसी के माध्यम से जेआरएफ भी क्वालीफाई किया जाता है। जो कि एक तरह से छात्रवृत्ति है जो कि केंद्र सरकार द्वारा विद्यार्थियों को शोध कर कार्य के लिए प्रदान किया जाता है। साल 2018 से NTA यूजीसी नेट परीक्षा का संचालन कर रही है जो कि ऑनलाइन माध्यम से होता है, जबकि इस बार यह परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से किए जाने के कारण समझ नहीं आया। क्योंकि एक तरफ देश को डिजिटल इंडिया बनाने की बात की जा रही है वहीं दूसरी तरफ परीक्षाओं को फिर से ऑनलाइन माध्यम से ऑफलाइन माध्यम में कराना यह चिंता का विषय है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जानकारी दी गई की इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन केंद्र ने एक दिन पहले ही प्रश्न पत्र को सोशल मीडिया पर डार्क वेब द्वारा लीक किए जाने की खबर दी। डार्क वेब जो सर्च इंजन होता है जिसे साधारण क्रोम आदि द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता है तथा कुछ सूत्रों के अनुसार प्रश्न पत्र टेलीग्राम के माध्यम से भी बेचे गए जिसके कारण इस परीक्षा को रद्द किया गया साथ ही जांच किए जाने के बाद नीट की परीक्षा का दोबारा आयोजन किया गया और अगस्त महीने के अन्त में और सितंबर माह के शुरुआती हफ्ते में रद्द की गई और यूजीसी नेट की पुनः परीक्षा कराने का ऐलान किया गया, जो कि 21 अगस्त से 4 सितंबर के बीच होगा।
यहां विडंबना यह है कि दोनों ही नीट यूजी और नेट में पेपर लीक सहित अन्य गड़बड़ी पाई गई। जबकि दोबारा परीक्षा केवल यूजीसी नेट के लिए कराया जा रहा है। नीट यूजी की दोबारा परीक्षा केवल उन्हीं छात्रों ने दी जिन्हें समय से जूझना पड़ा था। इसके अलावा परीक्षा रद्द किए जाने से अभ्यर्थियों का केवल एक दिन बर्बाद नहीं होता बल्कि उनकी आशाएं भी धूमिल पड़ती हैं और इसका दुगना प्रहार उन गरीब वर्ग के बच्चों पर पड़ता है जो अपने मां-बाप की खून पसीने की कमाई को परीक्षा रद्द होने से व्यर्थ जाते देखे हैं। अभी हाल ही में देश में इन समस्याओं से निजात पाने के लिए लोक परीक्षा कानून 2024 बनाया गया है। परंतु फिर भी प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पूर्ण संचालन एवं निष्पक्ष आचरण से ही सरकार युवा वर्ग में अपनी विश्वसनीयता को बनाए रख सकती है जिसे कौशल पूर्ण एवं बुद्धिजीवी युवा वर्ग निश्चित ही देश को विकसित भारत बनने में अपना सहयोग दे पाएगा।

स्मृति उपाध्याय
( असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय )
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
Comments (1)
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प्रणाम दीदी ???????? बहुत ही स्पष्टता के साथ आपने हम छात्रों की बातों को समाज और सरकार के सामने रखा।