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वक्फ बोर्ड के जुल्मों को रोकना क्यों था जरुरी

Why was it necessary to stop the atrocities of the Waqf Board

कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न, ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है। किसी शायर ने जुल्म की हदें पार होने पर क्या शेर लिखा है। वैसे तो यह शेर मैनें कई साल पहले पढ़ा था पिछले दो दिनों से वक्फ संशोधन मामले पर देश की सर्वोच्च सत्ता के केन्द्र संसद में जो बहस चल रही है और उससे जो तथ्य निकल कर सामने दिखे उसने मुझे फिर से इस शेर की याद दिला दी।

ये वक्फ क्या है क्यों इसपर इतना बवाल चल रहा है। आम इंसान की जिंदगी में इसका क्या दखल है। आखिर क्यों संसद में इसपर इतने बड़े बहस की आवश्यकता हुई। ये प्रश्न हमारे आपके सबके ज़ेहन को मथ रहे हैं। इन प्रश्नों का उत्तर उसी शेर में छिपा है जो मैनें शुरुआत में ही आपको सुनाया था यानी  ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है। बात कुछ यूं है कि वक्फ बोर्ड काफी समय से अस्तित्व में है ये आहिस्ता आहिस्ता देश में संपत्तियां इमारतें जमीनें निगल रहा था लेकिन साल 2013 में कांग्रेस की सरकार ने इसे कानूनी रुप से नाखून और दांत दे दिए। जिसके बाद यह आदमखोर हो गया और उसने अंधाधुंध जमीनें हड़पनी शुरु कर दीं और हालत यह हो गई कि वक्फ बोर्ड आज भारत में सबसे ज्यादा जमीनों का मालिक बन बैठा यानी देश का सबसे बड़ा जमींदार बन गया। जिसके पास जिसके पास 9.4 लाख एकड़ जमीन में 8.7 लाख से अधिक संपत्तियां हैं। जानते हैं इस संपत्ति का अनुमानित मूल्य कितना है इसकी कीमत है 1.2 लाख करोड़ रुपये। पिछले कुछ वर्षों में वक्फ बोर्ड की जमीनें हड़पने की हवस और बढ़ गई थी, जिससे विवाद बढ़ने लगा था।  जरा इस लिस्ट पर गौर कीजिए

=     वक्फ बोर्ड ने अनादिकाल से चले आ रहे हिंदुओं के विश्वप्रसिद्ध कुंभ मेले की जमीन पर दावा कर दिया।

=     तमिलनाडु में पूरे के पूरे थिरुचेंथुरई गांव पर दावा कर दिया जहां 15 सौ साल पुराना मंदिर है यानी कि जब इस्लाम पैदा भी नहीं हुआ था

=     सूरत में नगर निगम भवन पर दावा ठोंक दिया

=     दिल्ली विकास प्राधिकरण की 138 संपत्तियों और भूमि एवं विकास कार्यालय की 108 संपत्तियों पर कब्जा कर लिया

=     केरल के एर्नाकुलम जिले में लगभग 400 एकड़ जमीन पर दावा किया, जो ऐतिहासिक रूप से ईसाई निवासियों के कब्जे में थी।

=     इसके अलावा बेंगलुरु का ईदगाह मैदान ऐतिहासिक हुमायूं का मकबरा बेंट द्वारका द्वीप मुगल मस्जिद लुटियंस दिल्ली की 123 संपत्तियां अब आपको कहां तक गिनाऊं वक्फ के खूनी पंजे पूरे देश में फैलने लगे थे।

लेकिन साहिर लुधियानवी ने लिखा है ना कि ‘ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है। खून फिर खून है टपकेगा तो जम जाएगा।।’ यानी कि वक्फ का जुल्म इतना बढ़ गया था उसके पापों का बोझ इतना ज्यादा हो गया था। उसके अत्याचार के शिकार लोगों की कराह इतनी ज्यादा गूंजने लगी थी कि देश के नीति नियंताओं को उसपर ध्यान देना ही पड़ा। जिसके बाद वक्फ की इन आदमखोर हरकतों पर लगाम कसने की कवायद शुरु हो गई।

 और फिर आया वक्फ संशोधन अधिनियम जो वक्फ की जमीनें हड़पने की इस हवस को रोकेगा। जरा इन प्वाइंट्स में समझिए कि यह होगा कैसे-

=     पुराने क़ानून में वक्फ बोर्ड किसी भी प्रॉपर्टी पर दावा कर सकती थी, जिसके निस्तारण के लिए वक्फ़ ट्रिब्यूनल में ही जाना होता था। ट्रिब्यूनल के निर्णय को अंतिम निर्णय माना जाता था यानी कि वक्फ के जुल्म के खिलाफ वक्फ के पास ही फरियाद लगानी पड़ती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा नए क़ानून के अंतर्गत अब विरोधी पक्ष 90 दिन के भीतर हाईकोर्ट में जा सकता है और उसके बाद की कार्रवाई सामान्य मामलों की तरह चलेंगी।

=     पुराने क़ानून के अंतर्गत केवल मुसलमान ही वक्फ बोर्ड के सदस्य हो सकते थे। जिनका झुकाव स्वाभाविक तौर पर अपने इस्लामी आकाओं की तरफ होता था जहां गैर मुस्लिमों को न्याय मिलने की संभावना बेहद कम होती थी लेकिन नए नियम के अंतर्गत कम से कम दो सदस्य ग़ैर मुस्लिम होने अनिवार्य हैं जिससे कि ग़ैर मुस्लिमों के जमीनों पर क़ब्ज़ा करने के मामले में वक्फ़ बोर्ड के भीतर ही कोई व्यक्ति आवाज उठाने वाला मौजूद हो और उसके साथ इंसाफ हो सके।

=     इसके साथ ही बोर्ड में अब दो मुस्लिम महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व होगा जो कि पहले नहीं था

=     पुराने क़ानून में वक्फ के अंतर्गत वक्फ अपने ही क़ब्ज़े को सही ग़लत जांचने के लिए स्वतंत्र था जिसकी वजह से वक्फ की तानाशाही बढ़ती जा रही थी। लेकिन नए क़ानून के अंतर्गत अब केवल वही प्रॉपर्टी  वक्फ की मानी जाएगी जो गैर विवादित हो कोई भी प्रॉपर्टी यदि उस पर न्यायालय में या पुलिस में विवादित हो तो उसे वक्फ़ का तब तक नहीं माना जाएगा जब तक कि उस पर अंतिम निर्णय न आ जाए।

=     इसके अतिरिक्त पहले वो संपत्ति जो वारिस के अभाव में लावारिस हो जाती थी, वह अपने आप वक्फ़ की हो जाती थी। जिसके कारण लगातार वक्फ़ की संपत्ति बढ़ती जा रही थी यह संपूर्ण संपत्तियां आम मुसलमानों की थी लेकिन नए क़ानून के तहत अब संपत्ति में बेटियों को भी अधिकार रहेगा इसीलिए किसी दंपत्ति के बेटा ना होने पर संपत्ति खुद ब खुद बेटी को मिलेगी ना कि  वक्फ को। 

=     पहले नियम था कि वक्फ़ बोर्ड के बारे में केंद्र सरकार न तो नियम बना सकती थी, न उसके लिए दिशा निर्देश जारी कर सकती थी और ना ही कैग ऑडिट कर सकता था। अब नए कानून के आने बाद केंद्र सरकार वक्फ़ बोर्ड को लेकर नियम क़ानून बना सकती है, दिशा निर्देश जारी करेगी और कैग प्रति वर्ष अन्य विभागों की तरह ऑडिट भी करेगा। जिससे वक्फ बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। 

 ये वो प्वाइंट है जिससे वक्फ बोर्ड के पुराने ठेकेदार बहुत ज्यादा घबराए हुए हैं क्योंकि इससे उनकी सारी अवैध कमाई का रास्ता बंद हो जाएगा।

=     पहले केवल सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड होता था लेकिन नए क़ानून के बाद आग़ाख़ानी और बोहरा अपना अलग से बोर्ड बना सकते हैं। मुसलमानों के भीतर के ये अलग अलग धड़े अब दोयम दर्जे के मुसलमानों के तौर पर नहीं गिने जाएंगे।

=     साथ ही पहले यह नियम था कि वक्फ़ बोर्ड को कोई भी मुस्लिम अपनी संपत्ति दान कर सकता था लेकिन नए क़ानून के बाद यह साबित करना अनिवार्य है कि दानकर्ता पिछले पाँच साल से इस्लाम मत को मान रहा है। इससे ग़ैर मुस्लिमों पर तुरंत दबाव बनाकर उनकी संपत्ति वक्फ़ के नाम लगवाकर उन्हें भगाने के प्रवृत्ति से राहत मिलेगी यानी कि आप समझ गए होंगे कि वक्फ कानून में संशोधन सिर्फ और सिर्फ रसूखदार मुसलमानों के करतूतों पर लगाम लगाना और गरीबों के हितों की रक्षा करना है। दरअसल इस कदम के बारे में पिछले नवंबर में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के इरादे पूरी तरह से स्पष्ट कर दिए थे। जब पीएम मोदी ने कहा था कि वक्फ कांग्रेस की तुष्टीकरण की पॉलिटिक्स का नतीजा है जिसके लिए संविधान में कोई जगह नहीं है जिसके बाद जनवरी 2025 में जेपीसी की रिपोर्ट पेश की गई। बजट से संबंधित बिलों के पारित होने के बाद इस संशोधन विधेयक को  संसद के बजट सत्र के अंतिम सप्ताह में पेश किया गया जहां लोकसभा में इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े जबकि राज्यसभा में वक्फ संशोधन के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह आधिकारिक रुप से कानून बन जाएगा अब तो आप समझ ही गए होंगे कि वक्फ बोर्ड का जुल्म इतना बढ़ गया था कि वह अपने पापों के बोझ से दबकर खुद ही खत्म हो गया क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है।





अंशुमान आनंद

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