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क्यों बढ़ रहे हैं जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले

Why are terrorist attacks increasing in Jammu and Kashmir?

आतंकवाद एक ऐसा कृत्य जो एक शांत समृद्ध एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र के अमन और चैन भंग कर वैश्विक पटल पर आम लोगों में भय पैदा कर शारीरिक और मानसिक रूप से दहशत फैला रहा है। आज पूरे विश्व में आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर ने विभाजन के बाद लगातार आतंकी हमले सहे हैं कश्मीर की शांत वादियों में गूंजती गोलियों और बमों के विस्फोट की गूंज, कश्मीर घाटी से विस्थापित होते लोगों का पीड़ा और देश की सहादत में शहीद होते जवानों को खोने का दर्द सम्पूर्ण भारत के ह्रदय को छिन्न-भिन्न कर देता है।

भारतीय सीमा पर आतंकवादी आए दिन घुसपैठ करने में लगे रहते हैं। हालांकि आतंकवादियों को भारतीय सेना से कई बार हार का सामना करना पड़ा है, भारतीय सेना के नौजवानों ने आतंकवादियों के घर में घुसकर आंतकवादियो का मनोबल चकनाचूर किया है बावजूद इसके जम्मू-कश्मीर में बढ़ते आतंकी हमले बहुत बड़ा सोचनीय विषय बन चुके हैं। पिछले सात महीनों में जम्मू कश्मीर में लगातार लगभग 24 बार आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई ।  जिसमें जुलाई महीने में भारतीय सेना के 12 जवान शहीद हुए हैं।

आतंकवादियों ने राजौरी, कुलगाम,कटरा कठुआ,डोडा और नौशेरा जगहों को अपना निशाना बनाया है।

जम्मू रीजन में 78 दिन में 11 आतंकी हमले हुए हैं। सुरक्षा बलो के दवारा आंतकवादियों के खिलाफ कई ऑपरेशन भी चलाये जा रहे हैं कुछ में सुरक्षा बलो के हाथ सफलता लगी तो वही कुछ में आंतकी भाग निकलने में कामयाब हुए।

 

पहला एनकाउंटर 11 जून

आतंकियों ने डोडा के भद्रवाह-पठानकोट मार्ग पर 4 राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस की जॉइंट चेकपोस्ट पर फायरिंग की। 5 जवान और एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर घायल हो गए। हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन कश्मीर टाइगर्स  ने ली।

 

दूसरा एनकाउंटर 12 जून
डोडा के गंडोह में कोटा टॉप में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुडभेड़ हुई। इसमें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के कॉन्स्टेबल जख्मी हो गए।

 

तीसरा एनकाउंटर 26 जून
डोडा जिले के गंडोह इलाके में 26 जून को सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया और जम्मू-कश्मीर पुलिस में तैनात स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप का जवान भी घायल हुआ था।

चौथा एनकाउंटर 9 जुलाई
डोडा के गढी भगवा इलाके में शाम को शुरू हुए एनकाउंटर में सेना और आंतकियों की तरफ से लगातार फायरिंग हुई।

 

पांचवा एनकाउंटर 14 जुलाई
जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा के पास सुरक्षाबलों ने रविवार 14  जुलाई को 3 आतंकियों को मार गिराया। तीनों लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। इनके पास से पिस्तौल, गोला-बारूद बरामद किए गए।

 

छठा एनकाउंटर 15 जुलाई
15 जुलाई की शाम को पौने आठ बजे सर्च ऑपरेशन के दौरन सुरक्षा बलो या आंतकवादियो के बीच मुठभेड हुई। जिसकी सेना के एक अधिकारी सहित 4 जवान शहीद हो गए।

 

सातवां एनकाउंटर 17 जुलाई
17 जुलाई  जम्मू के डोडा में रात 11बजे आराम करती हुई सेना पर आतंकियों ने ग्रेनेड हमला किया जिसमें 2 जवान घायल हुए।

 

कश्मीर में सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की गतिविधियां देख नजर आता है कि उन्होंने अपना फोकस और पैटर्न दोनों बदल दिये हैं। आतंकी अब कश्मीर की जगह जम्मू पर फोकस कर रहे हैं। साथ ही ये हाई वैल्यू टारगेट पर अटैक कर रहे हैं।  कश्मीर में सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती के चलते आतंकवादियों के साथ सफलता नहीं लग पा रही थी अब आतंकवादियों ने नई जगहों से घुसपैठ करना शुरू कर दिया है इसका अर्थ है आतंकवादी समस्त केंद्रशासित प्रदेश पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं जम्मू में हुए औसत हमलों में आतंकवादियों का निशाना बेहद सटीक रहा है। इसके पीछे का कारण बेहद सोचनीय होता जा रहा है आतंकी जम्मू के जंगलों में घात लगाए बैठे हैं उनकी नज़र सेना की हर गतिविधि पर है। आतंकियों को सैनिकों के चेहरे पहचानने और सैनिकों पर घात लगाने के लिए सीमा पार ट्रेनिंग दी जा रही है इसके अलावा आतंकियों ने कई बार घाटी के लोगों को डरा धमकाकर और लालच देकर सेना की खबर रखने का काम भी किया है। इन बढ़ते हमलों के पीछे कहीं ऐसा न हो कि आतंकियों तक सेना की खबर पहुंचाई जा रही हो। कई बार आतंकियों को इलाके में छिपने में मदद भी दी जाती है। सीमा पार घने जंगलों में आतंकवादी समूहों का मजबूत होना इस बात का संकेत देता है कि किसी बड़े संगठन द्वारा इन आतंकवादियों को हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। भारत इस समय विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के पथ पर अग्रसर है इस राह में भारत के खिलाफ कई साजिशें रची जा रहीं हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों में तनाव बढ़ा है सूत्रों के मुताबिक लाइन आफ कन्ट्रोल के पास लगभग 60-70 आतंकी सक्रिय हैं । आतंकवादियों का जम्मू कश्मीर में अलग अलग जगहों से घुसपैठ का सामना करना चुनौतीपूर्ण होगा।

 

 

उदय इंडिया ब्यूरो

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