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सोशल मीडिया कंटेंट की आड़ में नियमों की अनदेखी आखिर क्यों?

Why are rules being ignored under the guise of social media content?

 

मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है अक्शर आप सभी ने यह टैगलाइन सूनी होगी। जाहिर सी बात है कि यह पंक्ति यह बताती है की देश तेजी के साथ विकास कर रही है, नए आयाम हासिल कर रहा है। पर बीते कुछ वर्षों में यह टैगलाइन किसी गंभीर विषय को इंगित नहीं करता बल्कि यह बता रहा है कि कैसे बदलते परिवेश और समय के साथ चीजें बदल रही हैंं। कोविड 19 के दौर के बाद से सोशल मीडिया का प्रभाव हमारी जिंदगी में ऐसा पड़ा की कई चीजें बदल गईं। हमारी सोच, हमारे काम करने की क्षमता और नजरिया भी। जी हां सोशल मीडिया ने हमें सोशल तो बना दिया..नए कंटेंट तो दिए पर उन सभी कंटेंट के पीछे लगातार और काफी बड़े पैमाने पर नियमों को अनदेखी हुई, उनकी अवहेलना की गई। जिस पर लगाम तो लगाने के प्रयास हुए पर असर कुछ भी ना पड़ा। नियमों को लगातार ताक पर रखा गया ऐसा जताया गया कि कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। सोशल मीडिया आज के समय में हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। इसकी पहुँच और प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से, 'रील्स' (Reels) और 'शॉर्ट्स' (Shorts) जैसे छोटे-वीडियो वाले फॉर्मेट्स ने युवाओं को अपना दीवाना बना लिया है। चंद सेकंड की यह रील लोगों को रातों-रात सेलिब्रिटी बनाने और पैसा कमाने का एक सुनहरा अवसर दे रही है। कई लोगों की किस्मत इन रील्स और कंटेंट से ऐसी बदली की आज के समय में वे सभी किसी और ही मुकाम पर हैं। हालांकि इसके पीछे उनकी मेहनत छिपी हुई है। पर यह बात उनकी है जो अच्छे कंटेंट के साथ आगे बढ़े पर आज के समय में रील्स बनाने के चक्कर में लड़का हो, लड़की हो या फिर कोई भी समाज के कई अहम नियमों को ताक पर रख दे रहे हैं या फिर सरकारी नियमों की अनदेखी और अवहेलना कर देते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस 'रील' के बढ़ते क्रेज ने अब नियमों की धज्जियाँ उड़ाना शुरू कर दिया है। रील बनाने के नाम पर हो रही नियमों की अनदेखी और सुरक्षा से खिलवाड़ एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन गया है। रील की इस अंधी दौड़ ने सभी को कुछ नया तो दिया पर कई सामाजिक समस्याओं को पैदा करने के बाद।

आजकल लोग रील बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अपनी रील को 'वायरल' करने और अधिक 'लाइक्स' 'व्यूज' पाने की होड़ में वे अक्सर अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डाल देते हैं। इसमें नियमों की अनदेखी और सुरक्षा से जुड़ी आम तौर पर ये गलतियां देखी जा रही हैं:

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन: रील बनाने के लिए अक्सर लोग चलते वाहन पर रील बनाते हैं, बिना हेलमेट पहने स्टंट करते हैं, या गलत लेन में ड्राइविंग करते हैं या फिर कार का गलत प्रयोग करते हैं रील्स बनाने के लिए। यह केवल उनके लिए बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी बेहद खतरनाक है।

निजी जगहों और संवेदनशील इलाकों में प्रवेश: लोग अक्सर अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल या अन्य सरकारी संवेदनशील जगहों पर रील बनाते हैं, जिससे वहाँ की व्यवस्था और शांति भंग होती है। सोचने वाली बात यह है कि आखिर इन जगहों पर रील्स बनाकर क्या मिलेगा।

अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री: कई बार लोग रील में अभद्र भाषा, गाली-गलौज, या किसी विशेष समुदाय को आहत करने वाली सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, जो सामाजिक सौहार्द को खराब करता है।

रील्स बनाकर आज के समय में आसानी के साथ नियमों को तोड़ा जा रहा है। हाल यह है कि इस अंधी दौड़ का परिणाम जीवन जाने का भी कारण बन जा रही है। हाल में कई ऐसी घटनाएं सोशल मीडिया कंटेंट बनाने को लेकर लगातार सामने आती रही हैं जिन्होंने एक बड़ी चिंता को जन्म दे दिया है। पहले के समय में लोग किसी जगह जाया करते थे घूमने या फिर मनोरंजन करने तो उसका आनंद लिया करते थे पर आज के समय में यह पूरी तरह से बदल गया है। लोग किसी जगह घूमने कम, एक्सप्लोर करने कम बल्कि कंटेंट बनाने जा रहे हैं। यह बात अच्छी भी है पर कई बार यही सामाजिक चिंता का कारण भी बन जा रही है। उदाहरण के तौर पर अगर देखें तो सबसे पहले आता है मंदिर,धार्मिक स्थल जी हां लोग ऐसी जगहों पर आस्था के साथ कम बल्कि रील्स बनाने जाने लगे हैं। सभी के हाथ में मोबाइल फोन दिखता है और आस्था के नाम पर कुछ भी नहीं। इसके अलावा कई बार यह भी देखा गया है कि कोई प्राचीन परंपरा देश या विश्व में कहीं मनाई जाती है तो उसे इस रील्स की अंधी दौड़ ने व्यापार का जरिया बना दिया है। इस रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट की इस अंधी दौड़ के गंभीर परिणाम सामने रहे हैं:

सड़क दुर्घटनाएं: Traffic नियमों का उल्लंघन करने से सड़क दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। रील बनाने के चक्कर में अपनी जान गंवाने वाले युवाओं की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं।

क़ानूनी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने पर क़ानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, जिससे रील बनाने वालों को जेल भी जाना पड़ सकता है।

सामाजिक शांति भंग: अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री से सामाजिक शांति और भाईचारा खराब हो सकता है।

युवाओं पर बुरा प्रभाव: रील के माध्यम से नियमों की अनदेखी का संदेश युवाओं को गलत दिशा में प्रेरित कर सकता है।

अगर हम इस पूरे मामले की जड़ की बात करें या फिर इसके पीछे कौन जिम्मेदार है तो यह जाहिर तौर पर कहा जा सकता है कि  इस पूरे मामले में हम सभी की ज़िम्मेदारी एक समान है।  रील बनाने वालों को अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। नियमों का पालन करना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रील से जुड़ी अपनी पॉलिसी को और सख्त बनाना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को तुरंत हटाना चाहिए। साथ ही माता-पिता को अपने बच्चों को रील के नकारात्मक प्रभाव के बारे में बताना चाहिए और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अलावा सरकार को नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

रील के क्रेज को नकारात्मक दिशा से सकारात्मक दिशा में मोड़ना कठिन नहीं है पर यह जरुर कहा जा सकता है कि इसके लिए कड़ी मसक्कत करनी होगी, कई अनूठे प्रयास करने होंगे। जिससे हमें नए कंटेंट तो मिले पर उसके पीछे नियमों का पूरा पालन किया जाए।  रील बनाने के दौरान नियमों का पालन करना सबसे ज़रूरी है। यह केवल क़ानूनी रूप से सही है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी बेहद ज़रूरी है। ध्यान इस बात का देना होगा कि रील के माध्यम से सकारात्मक और जानकारीपूर्ण सामग्री शेयर की जाए जो समाज के लिए फायदेमंद हो। साथ ही साथ नियमों का पालन करने वाले रील बनाने वालों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा ले सकें। इस विषय को लेकर बीते वर्ष पीएम मोदी के द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर मीट दिल्ली में आयोजित की गई थी। जिसमें अलग-अलग विषय के कंटेंट क्रिएटरों को सम्मानित किया गया और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित भी किया गया। इस मुहिम को आज और भी बड़ा करने की जरूरत है जिससे जागरूकता का स्तर और बड़ा हो सके और लोग ज्यादा से ज्यादा जागरूकहो सकें।

रील आज के समय की एक ज़रूरत बन गई है, लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि रील की इस अंधी दौड़ में नियमों की अनदेखी और सुरक्षा से खिलवाड़ हो। रील को सकारात्मक दिशा में मोड़कर ही हम इसके नकारात्मक प्रभाव से बच सकते हैं और एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।

 

 

 

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