फरवरी 8 की शाम उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा के मलिक के बगीचे में अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने के दौरान विशेष यानी की मुस्लिम समुदाय के द्वारा जमकर हंगामा किया गया। हंगामा इतना बढ़ गया कि उसे दंगे का रूप ले लिया। सरकारी आदेश पर अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने के लिए टीम के पहुंचते ही माहौल में तनाव बढ़ने लगा था, हर तरफ से लोग जुटने लगे। छत पर लोग एकत्र हो गए थे, जहां पर कार्रवाई होनी थी, उसके मोड़ के सामने एक जगह पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई हुई थी, वहां काफी भारी मात्रा में लोगों का जुटना शुरू हो गया था। मौके पर पुलिस, स्थानीय प्रशासन के साथ ही पत्रकार भी मौजूद थे। जब पुलिस ने वहां जुट रहे लोगों से हटने के लिए कहा तो पुलिस की उनसे तकरार हो गई। आक्रोश बढ़ता जा रहा था, पुलिस ने उन्हें धकेलने की कोशिश की तो दूसरी तरफ से भी जोर आजमाइश और नारेबाजी होने लगी। तनाव के बीच पहुंची जेसीबी ने ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की तो पथराव शुरू हो गया। हंगामा साफ तौर पर पूर्वनियोजित जाहिर हो रहा था। घटना के पीछे का मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक बताया जा रहा है। जो अब भी फरार है।
बनभूलपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक के खिलाफ सरकारी संपत्तियों को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए मलिक पर दो करोड़ 44 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया। कड़े तौर पर निगम ने उसे चेतावनी दी है और कहा है कि 15 फरवरी तक यह राशि नगर निगम, हल्द्वानी में जमा करवानी होगी। नोटिस में कहा गया है कि ऐसा न होने पर उससे कानूनी तरीके से यह वसूली की जाएगी। इस हंगामे में उपद्रवियों और दंगाइयों द्वारा पत्थरबाजी तथा आगजनी की गई। जिसमें 6 लोगों की मौत तथा 300 से भी अधिक लोग घायल हो गये। पत्थरबाजी में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं पत्रकार घायल हुए। घायलों का इलाज पास के अस्पताल में कराया गया। हंगामे में उपद्रवियों ने पुलिस, स्थानीय प्रशासन के साथ पत्रकारों की गाड़ियों में आग लगा दी थी। हंगामा इतना बढ़ गया था कि पुलिस द्वारा मामले को लेकर कई राउंड फायरिंग भी करनी पड़ी। हंगामे में दंगाइयों द्वारा पत्रकारों के कैमरे छीने गये, उनके गाड़ियों में आग लगा दी गई, उन्हें पत्थरों से मारा गया साथ ही उन्हें आग में धकेलने की कोशिश की गई। ठीक ऐसा ही स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस के साथ भी दंगाइयों के द्वारा किया गया। दंगाइयों ने महिला पुलिस के साथ ही पुरुष पुलिस जवानों को भी पत्थरों का शिकार बनाया। जिसमें 300 से अधिक लोग घायल हो गए। हंगामे पर पुलिस द्वारा बड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया गया।
अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने को लेकर हुए हंगामे के बाद पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया, जिले में धारा 144 लागू कर दी गई। इंटरनेट की सुविधायें बंद कर दी गई, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन को सुरक्षा के मध्यनजर बंद कर दिया गया, पूरे इलाके में कर्फ्यू भी लगा दिया गया। पूरे जिले में दंगे के कारण भय का माहौल है।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुए इस दंगे को देखते हुए प्रदेश सरकार कार्रवाई की गई। SHOOT AT SITE, के साथ ही पहचान कर दंगाइयों की गिरफ्तारी का फरमान भी जारी कर दिया गया। उपद्रव के बाद से पुलिस ने हर उस घर को चिन्हित कर उनकी तलाशी और छानबीन शुरू कर दी है, जिनकी छतों से गुरुवार की ईंट-पत्थर बरस रहे थे। बनभूलपुरा में शामिल दंगाइयों को चिन्हित कर उन पर मुकदमे के साथ उनकी गिरफ्तारी की जा रही है। कुल 30 दंगाइयों की गिरफ्तारी मामले में की जा चुकी है।

घटना के बाद इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। उन्होंने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, पुलिस एवं इंटेलिजेंस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा की। सीएम धामी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही उपद्रवियों पर कड़े एक्शन लेने को कहा है। 9 फरवरी की सुबह हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई घटना के संबंध में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। बैठक में सीएम धामी ने पुलिस को अराजक तत्वों से सख्ती से निपटने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि आगजनी पथराव करने वाले एक-एक दंगाई की पहचान की जाए और उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम धामी ने यह भी कहा कि सौहार्द और शांति बिगाड़ने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जायेगा। घटना के बाद सीएम धामी ने हल्द्वानी की सम्मानित जनता से अनुरोध किया और कहा कि शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें। ताकि आरोपियों और उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। हंगामे के कारण सुरक्षा के मध्यनजर शनिवार 10 फरवरी को प्रशासन द्वारा हल्द्वानी रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया गया। प्रशासन द्वारा जारी की गई सूचना के मुताबिक इस वक्त स्टेशन पर फिलहाल कोई भी ट्रेन नहीं रुक रही है। इतना ही नहीं हिंसा के बाद से सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद है और पुलिस हिंसा प्रभावित इलाकों से सटे इलाकों में भी हाई अलर्ट पर है। धारा 144 पहले से ही लागू किया जा चुका है।
गिरफ्तार दंगाइयों में से कुछ दंगाइयों के नाम
प्रशासन ने बताया कि हल्द्वानी आने वाली कुल 9 ट्रेनें फिलहाल स्टेशन पर नहीं रुक रही हैं। जिसमें मुख्य रूप से दिल्ली से आने वाली शताब्दी, संपर्क क्रांति और रानीखेत के साथ-साथ लखनऊ और देहरादून से आने वाली ट्रेनें शामिल हैं। हिंसा के बाद प्रभावित वनभूलपुरा से लोगों के पलायन का सिलसिला लगातार जारी है। पुलिस, प्रशासन और सरकार के कड़े रुख को देखते हुए पत्थरबाज परिवार के साथ गायब हो रहे हैं। वनभूलपुरा में कर्फ्यू के बाद भी 300 घरों पर ताले लटक गए हैं। गुरुवार की शाम कर्फ्यू लागू किए जाने के बाद लोगों को घरों से बाहर निकलने की मनाही थी। इसके बाद भी लोग घरों को छोड़कर भाग गए हैं। कई घरों में ताला नहीं है, इसके बावजूद लोग घरों के भीतर नहीं हैं। इलाके के लोग पूरे परिवार के साथ दूसरे जिलों में जा चुके हैं। हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस ने जिन लोगों को चिह्नित किया है, उनमें से कई फरार चल रहे हैं। ऐसे लोगों की गिरफ्तारी के लिए दूसरे जिलों में पुलिस टीम भेजी गई है। वहीं, केंद्रीय बलों की मौजूदगी में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। स्थानिय लोगों के द्वारा बताया गया कि हंगामें की रात से ही उपद्रवी लोग ऑटो और निजी वाहनों से घरों को छोड़कर भागने लगे थे। उपद्रव की रात लोग गोलापुर होते हुए टेंपो और निजी वाहनों से भागते देखे गए। कई लोग गोला बाईपास के रास्ते रात के अंधेरे का फायदा उठाकर परिवार सहित भाग गए। कई लोगों ने करीब 10 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर लालकुआं से ट्रेन पकड़ी। सीएम धामी ने साफ किया है कि प्रदेश में जिन स्थानों पर अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां अतिक्रमण है, उन पर कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी। इस अभियान को रोका नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन दंगाइयों से सख्ती से पेश आएगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दंगे को लेकर कहा है कि बनभूलपुरा, हल्द्वानी में जिस जगह से अवैध अतिक्रमण हटाया गया वहां पर अब पुलिस थाने का निर्माण किया जाएगा। उपद्रवियों और दंगाइयों के लिए हमारी सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि देवभूमि की शांति से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, ऐसे उपद्रवियों के लिए उत्तराखंड में कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार के कार्य करने की स्थिति के लिए अब उन्हें तैयार रहना होगा। किसी भी प्रकार की कोई भी अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हल्द्वानी की तरह ही भारत में पिछले कई दशकों में कई दंगे हुए जिन्होंने ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिसमें प्रमुख रुप से 1969 में गुजरात में मंदिर को अपमानित करने को लेकर हुआ दंगा, 1980 का मुरादाबाद दंगा,1981 बिहार दंगा, 1984 सिख विरोधी दंगा, 1987 का दिल्ली और मेरठ दंगा, 1989 का भागलपुर दंगा, 1989 का कश्मीर हिंसा, 1990 गुजरात हिंसा, 1990 अयोध्या कांड, 1990 हैदराबाद दंगा, 1992 बंबई दंगा, के साथ ही 2002 में गुजरात दंगा, 2008 कंधमाल हिंसा, 2018 का बिहार दंगा, और साथ ही 2020 का दिल्ली दंगा, और 2023 का मणिपुर दंगा शामिल है।
सात्विक उपाध्याय
Leave Your Comment