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विशाखा टोपो भारत की पहली आदिवासी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी

Vishakha Toppo is India's first tribal international badminton player

लेखक- सतीश शर्मा 


ओडिशा: 10 अक्टूबर का दिन भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक अविस्मरणीय दिन के रूप अंकित रहेगा। इस दिन गुवाहाटी के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में संपन्न 25वें विश्व जूनियर (19 वर्ष आयु वर्ग) मिश्रित टीम चैम्पियनशिप (6 से 19 अक्तूबर) में भारत पहली बार कांस्य पदक हासिल किया करने में सफल हुआ है।  भारत की इस ऐतिहासिक सफलता में ओडिशा की एक आदिवासी लड़की विशाखा टोपो ने योगदान देने के साथ स्वंय अपने लिये भी एक इतिहास रचा है। भारतीय दल में शामिल होकर वे देश की पहली आदिवासी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। 

सुंदरगढ़ जिले के बिसरा प्रखंड के संतोषपुर गांव की 18 वर्षीय  विशाखा का अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन कोर्ट तक का सफर संघर्ष, समर्पण और जुनून की मिसाल है। सीमित संसाधनों में पली-बढ़ी विशाखा ने अपने दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया जंहा बह आदिवासी समुदाय के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। उसकी सफलता ने न सिर्फ ओडिशा बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज को नई प्रेरणा दी है। उसने दिखाया है कि आदिवासी युवा भी अपने परंपरागत खेल हाकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स से आगे बढ़कर अब अभिजात वर्ग का खेल माने जाने वाले खेलों में अपनी धमक दिखा सकते है।

विशाखा टोपो के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पँहुचने के पीछे उसकी प्रतिभा और परिश्रम के साथ उसके पिता चारो टोपो  के त्याग और तपस्या की भी भूमिका रही हैं। राउरकेला इस्पात संयंत्र में कार्यरत और जुनून की हद तक खेलों (विशेषकर बैडमिंटन) से प्रेम करने वाले चारो टोपो अपने परिवार में किसी को बड़ा खिलाड़ी बनते देखना चाहते थे। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाई के साथ अच्छा खिलाड़ी बनने को हमेशा प्रेरित किया। परंतु दो बड़ी बेटियों अनंदिता और महिमा ने पढ़ाई को प्राथमिकता दी और अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। छोटी बेटी विशाखा  मेधावी छात्रा होने के साथ बैडमिंटन में भी अपनी प्रतिभा की झलक दिखाने लगी थी तो पिता ने उसीपर ध्यान केंद्रीत करना शुरू किया जिसका नतीजा अब सामने है। गुवाहाटी में अपनी पत्नी जयश्री के साथ जब उन्होंने विशाखा को भारतीय दल के सदस्य के रूप में पदक प्राप्त करते देखा तो उनकी आंखे खुशी और गर्व से छलक उठी थी। विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद विशाखा ने भावुक होकर कहा "अपने पिता के त्याग और धैर्य के बदले उन्हें यह मेडल भेंट देकर अत्यंत प्रसन्न हूँ। पिछले छह साल से मैं घर से दूर हूं । पर्व त्योहार पर भी घर नहीं जा पाती हूँ। कई बार हारने के बाद परिवार का कोई व्यक्ति सांत्वना देने वाला भी पास नहीं होता तो वहां स्वंय को खुद ही संभालना पड़ता है। अब उस कष्ट, त्याग का फल मिला है। वह बताती है " हमारे  पिता ने हम बहनों को खेल के मैदान तक पहुँचाने के लिए अथक परिश्रम और त्याग किया। वे ड्यूटी से लौटकर आधी रात तक भी मेरे साथ बैडमिंटन खेला करते थे"। 

विशाखा में बैडमिंटन प्रतिभा की पहचान के बाद पिता ने बेहतर प्रशिक्षण के लिए उसे सेक्टर-9 स्थित बैडमिंटन प्रशिक्षण केंद्र में दाखिल कराया जहां कोच मोहम्मद हासिम से उसने खेल की बारीकियां सीखीं। 12 वर्ष की उम्र में ही विशाखा ने राज्य की 13 वर्ष आयु वर्ग की चैम्पियन बनकर अपने पिता के विश्वास को सही सिद्ध कर दिया।  2020 में उसका चयन साई रीजनल एकेडमी, भुवनेश्वर में हुआ और इसके बाद 2023 में वह गुवाहाटी स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चुन ली गई। भुवनेश्वर में साई एकेडमी में रहने के दौरान कोच दिलीप पंचाती ने विशाखा में बैक कोर्ट में उसकी कुशलता और मजबूत स्मैश शॉट को देखते हुए उसे सिंगल्स छोड़ कर डबल्स पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। कोच का यह सुझाव उसके लिये बहुत सही सिद्ध हुआ है। डबल्स में अपनी पार्टनर प्रगति परिडा के साथ  उसने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता दर्ज की है। आज जूनियर वर्ग के मिक्स्ड डबल्स में वह देश में दूसरे रैंक की खिलाड़ी हैं।

फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो से प्रेरणा लेने वाली विशाखा के बैडमिंटन में प्रिय खिलाड़ी जापानी जोड़ी  चिहारू शिडा और नामी माटसुयामा हैं।  विशाखा टोपो एक तेज़-तर्रार और ऊर्जावान बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, उसमें सपनों को सच करने का अदम्य उत्साह साफ झलकता है। वह  कहती हैं – “यह खेल महंगा है और अधिकतर संपन्न परिवार के खिलाड़ी इसमें आते हैं। लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरी सफलता यह साबित करे कि मेहनत और लगन से संसाधनों की कमी को मात दी जा सकती है।

आत्मविश्वास से पूर्ण विशाखा केवल भारत का प्रतिनिधित्व करने मात्र से संतुष्ट नहीं है। वह कहती है " देश की ओर से खेलना गर्व की बात है। पर मैं परिणाम में विश्वास करती हूं।  मेरा सपना ओलिंपिक में भारत के लिए लिये पदक जीतना है "।

अबतक विशाखा टोपो ने जो उपलब्धियां हासिल की है उनमें प्रमुख हैं-
 

  •  सितंबर 2019 – अंडर 13 की ओडिशा चैंपियन बनी।
  • 2023 अंडर 19 डबल्स , कांस्य
  • कोलकाता में पूर्वी क्षेत्र - स्वर्ण
  • हैदराबाद राष्ट्रीय सबजूनियर, 
  • कांस्य पदक
  • उदयपुर अंडर 19 रैंकिंग टूर्नामेंट डबल्स में रजत
  • 2024 चेन्नई छठी खेलो इंडिया में रजत पदक
  • 2024 गया में पूर्वी क्षेत्र स्वर्ण
  • 2024 भुबनेश्वर 47वीं जूनियर  राष्ट्रीय प्रतियोगिता, मिक्स्ड डबल्स में स्वर्ण

अबतक वह नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी में कई रैंकिग प्रतियोगिताओं में भी भाग ले चुकी है।


(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

 

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