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गावों, गली नुक्कड़ ने डाला बॉलीवुड पर परदा

Villages, street corners put a curtain on Bollywood

सोशल मीडीया की रील्स ने बनाएं कई सुपरस्टार


एक समय ऐसा था जब  भारत के लोगो में   बड़े पर्दे पर  फिल्म देखने का उत्साह उल्लास बहुत अधिक था लोग सिनेमा घर में फिल्म देखने और टिकट लेने के लिए बड़ी खुशी-खुशी कई घंटो लाइन में लगते थे।   हम उस दौर की बात कर रहे है जब गावों, कस्बो, और तो और शहरो तक टीवी बहुत कम देखने को मिलते थे।  फिल्म देखने और फिल्म देखने की टिकट खरीदने वालो की लाइनों में वो लोग भी होते जो सिर्फ फिल्म देखने नहीं अपना किरदार उन हीरो-हीरोइन में महसूस करने  जाते   कि एक दिन हम भी उस पर्दे पर दिखगे  हमारे लिए भी क्या लोग उन फिल्मो की टिकटे खरीदेंगे जिसमे हम हीरो हीरोइन होंगे। और आपने तो देखा ही होगा बड़े-बड़े सुपरस्टार के घरों के बाहर फैंस की इतनी ज्यादा भीड़ होती थी और लोग उन्हें देखना बड़ा पसंद करते थे और सुपरस्टार को भी फैन फॉलोइंग बहुत पसंद आती। वह चाहते है कि हमारे घरों के बाहर  लोगों की भीड़  ऐसे  ही  रहे और हम जब बालकोनी से बाहर आकर हाथ हिलाये  तो हमारे एक हाथ हिलाने से, वहां हमारे  नाम के जयकारे उस भीड़ में गूंजे। ऐसा हो भी रहा था, लोग उनकी  एक झलक देखते ही  उनके नाम के जयकारे  लगाते थे  चाहे बॉलीवुड इंडस्ट्री में भाई-भतीजा, परिवारवाद अपना रुतबा कायम रखें पर लोग आंख मूंदकर उनके पीछे पड़े रहते थे उनके पीछे पागल थे।

 

बॉलीवुड इंडस्ट्री में पैर  रखने के लिए जरुरी था  पारिवारिक सदस्य या रिश्ते नातेदारी 

आपका मन है की मुझे भी एक मौका मिले और मैं बॉलीवुड में काम कर सकूं भले ही आप में हुनर उन सुपरस्टार से ज्यादा हो लेकिन अगर आप उनके पारिवारिक सदस्य या रिश्ते नातेदार नहीं है, तो आपको उस मुकाम तक पहुंचने में पूरी उम्र लग जाए जो आप हासिल करना चाहते हैं, फिल्म इंडस्ट्री में किसी नए व्यक्ति के लिए मुकाम हासिल करने के लिए एक  प्रतिशत  चांसेस है, 99 प्रतिशत आपका उस  बॉलीवुड इंडस्ट्री में पैर  रखना भी बहुत मुश्किल है, पैर रख भी दिया तो उनकी नजरों से आप बच नहीं पाएंगे आपकी जड़े जमने से पहले ही आप उनकी फैन फॉलोइंग में ही शामिल होकर रह जाएंगे, आप किसी बड़े फैमिली से है ,पैसे वाले हैं तो शायद कहीं ना कहीं आपको चांस मिल जाए।

 

गावों- गरीब के बेटे को बॉलीवुड इंडस्ट्री ने नहीं समझा काबिल

एक गरीब घर का लड़का हो  या लड़की, फिल्म इंडस्ट्री में अपना हुनर दिखाने का मौका मिलना  ना के बराबर था इन्हीं  कुछ 6 से 7 सालों में आए बदलाव आप देख रहे होंगे। एक समय था जब बॉलीवुड के फिल्म प्रोडक्शन में या कह दीजिये नई फिल्म बनाने में  कम से कम 100 से 150 करोड रुपए लगते और एक समय अब जब यह प्रोडक्शन करोड़ से सिमट कर हजारों तक आ गया है, इसमें हर वह व्यक्ति अपना हुनर दिखा सकता है, जो बॉलीवुड इंडस्ट्री में जाने के काबिल नहीं समझा जाता था।

 

सोशल मीडिया ने दिया हुनर निखारने का मौका

यह प्रोडक्शन आप गांव,गलियों , नुक्कड़, शहरो में भी देख सकते हैं या जल्दी ही बनने वाली फिल्मे बिना किसी ट्रेलर ,टीजर के फेसबुक, इंस्टाग्राम यूट्यूब ट्विटर पर  देखने को मिल जाती है, अब पूरी फिल्म की कहानी के लिए ज्यादा समय जाया करने की जरूरत नहीं है, आपको कम समय, शॉर्ट फिल्म के माध्यम पूरी कहानी समझ आती नजर आएगी बहुत कम खर्चे में। यह  आने वाले समय का बहुत बड़ा बदलाव है, जिनके साथ नाइंसाफी हुई है उनके लिए एक इंसाफ और एक रुतबा कायम करने की मिसाल बनकर आ रहा है,तो अब आपको सुपरस्टार की फैन फॉलोइंग बन  कर नहीं रहना होगा। इन 6- 7 सालों में वह भी जगह अब सुनी-सुनी सी  होने लगी है, जहां कभी बड़े-बड़े सुपरस्टारों की बालकनी बनी होती थी अब वह जमाना गया। वह नया जमाना आ गया है, लोग टीवी के रिमोट से ज्यादा फोन अपने हाथ में रखना पसंद करते हैं और अब एक आदत सी उनके लिए हो गई है, अगर 2 मिनट भी फ़ोन की  स्क्रीन ऑन ना करें तो उनसे रहा नहीं जाता, लोगों ने अपना मनोरंजन का साधन भी इसी को ही बना लिया है । टीवी कम और फोन देखना ज्यादा पसंद करते हैं। जब आप फेसबुक ट्विटर, यूट्यूब देखते है तो देखते -देखते ही कही ना कही उन फिल्मो का कुछ अंश आपको देखने के लिए सोशल मिडिया पर मिल ही जाता  है जो गांव , गली में बनी होती है।    फोन में फिल्में देखना  लोगों को लुभाता भी है । उन्हें कोई मतलब नहीं रहता कि वह फिल्में बॉलीवुड सुपरस्टार की है या किसी गली नुक्कड़ के स्तर की।  कंटेंट अच्छा होना चाहिए एक्टिंग अच्छी होनी चाहिए

 

सोशल की रील्स ने बनाये  सूपरस्टार

सोशल मीडिया शॉर्ट्स रील लोगों को इतनी लुभाती है कि उसको देखने में कम से कम 2 घंटे और ज्यादा ज्यादा तीन-चार घंटे निकाल देते हैं। उनकी एडिटिंग उनकी वीडियो उनके कंटेंट इतने अच्छे होते हैं, कि हर किसी की नजरे उसे हटती नहीं ,सबसे बड़ी बात लोग पुराने चेहरे देखना भी पसंद नहीं करते क्योंकि वह भी बोर हो चुके हैं वही घिसी  पीटी एक्टिंग देखकर, लोगों का जो स्वाद बदला है उसी स्वाद के अनुसार अब इंस्टाग्राम,युटुब, फेसबुक पर लोग अपने  अच्छे हुनर का प्रदर्शन करते हैं। कम खर्च  में जो फिल्में बनाते हैं जो अपना हुनर दिखाते हैं, जिनको बॉलीवुड इंडस्ट्री के सहारे की भी जरूरत नहीं है, उनकी फैन फॉलोइंग भी उन बड़े-बड़े सुपरस्टार से भी ज्यादा होती है ।

 

उभरते हुए चेहरों को नहीं  किसी ट्रेनर  की जरूरत
समय का बदलाव बहुत तेजी दिखा  रहा है हो सकता है ,आने वाले सालों में बॉलीवुड इंडस्ट्री के फिल्म प्रोडक्शन की दुकानों पर ताला लगा देने का कारण भी यह गली नुक्कड़ में  बनने वाली फिल्में हो सकती  है क्योंकि आज के युवाओं में जो हुनर है ,जो नए तरीके अपने खुद  को निखारने के।

शायद ही आपको बॉलीवुड इंडस्ट्री के कोई सुपरस्टार में मिलेंगे। हालांकि इन उभरते हुए चेहरों को किसी ट्रेनर की भी जरूरत नहीं होती ताकि वह उन्हें एक्टिंग सीखा सके। जो आज की जनरेशन है, जिन्हें बॉलीवुड की फिल्म नहीं ब्लॉग्स देखना पसंद है  और उन ब्लॉक बनाने वालों की  पहचान भी अच्छी तरह जानते हैं। अब एक बात बहुत बड़ी चिंता वाली है सोशल मीडिया ने बॉलीवुड के सुपरस्टारों पर जो घूंघट डालने का काम किया है उस घूंघट को उठाकर उन सुपरस्टारो से कौन इस नयी जनरेशन  परिचय कराएगा जिसे सोशल मीडिया पर ब्लॉक देखने की लत लग चुकी है।

 

 

अंकुश मांझू

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