इन दिनों AI का प्रयोग भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व भर में काफी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जो कुछ रोचक तो कुल मजेदार पहलू को उजागर करता है। जो कई मामले में बेहद की कारगर साबित हो रह है तो कई मामलों में इसका गलत प्रयोग किया जा रहा है। पिछले कुछ महिनों में AI ने काफी तेज रफ्तार पकड़ी है। खासकर भारत में इसका प्रयोग काफी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। AI यानी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह इंटेलिजेंस तरीके से सोचने वाला सॉफ्टवेयर बनाने का एक तरीका है। यह इस बारे में अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे सीखता है, कैसे निर्णय लेता है और कैसे काम करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग भविष्य में विकास लाने में बहुत सहायक होंगे। क्योंकि इसमें विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता है। एक शोध के अनुसार AI 2035 तक वार्षिक वित्तीय विकास दर को दोगुना कर सकता है। AI लोगों के काम करने की प्रकृति को बदल देगा, मानव और मशीनों के बीच एक नया संबंध बनाएगा।
अब ऐसे में बीते कुछ दिनों में भारत में AI का प्रोयग गलत तरीके से किया जा रहा है। वैसे तो AI की मदद से कई इमेजेस को नए तरीके से प्रदर्शित किया गया है। पर इसका प्रयोग कर अब बीते कुछ दिनों में गलत मीम्स, साथ ही वीडियो बनाने के लिए किया जा रहा है। किसी भी प्रख्यात या जाने माने नेताओं, कलाकारों, सिंगरों के चित्र के साथ किसी अन्य का चित्र जोड़ दिया जा रहा है या फिर किसी अन्य के वायरल वीडियो पर इन कलाकारों, नेताओं और जाने-माने हस्तियों के चित्र को उनकी छवि को बिगाड़ने के लिए किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण है, पीएम मोदी का इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा सिंगिंग वीडियो। इन सभी वायरल वीडियो में ओरिजिनल सिंगर की आवाज को AI के माध्यम से परिवर्तित कर पीएम मोदी के आवाज में परिवर्तित किया गया है। कई जगहों पर अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया गया है। ऐसा ही ठीक एक और ताजा मामला है फिल्म अदाकार रश्मिका मंदाना का। जिसमें AI के एक अन्य रुप यानी की डीपफेक का प्रयोगा किया गया है। डीपफेक का प्रयोग करते हुए रश्मिका के चेहरे, हाव-भाव का प्रयोग कर उसे एक बोल्ड वीडियो के साथ जोड़ा गया है। जो काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल यह जारा पटेल का है। जारा के इंस्टाग्राम पर 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। जारा ने यह वीडियो पिछले महीने शेयर किया था, जिसमें वह काले रंग के कपड़ों में लिफ्ट में एंट्री करते दिखाई दे रही हैं। उनका चेहरा एकदम रश्मिका के चेहरे जैसा दिखने लगता है। एक्टर अमिताभ बच्चन के साथ कई अन्य हस्तियों की भी प्रतिक्रिया आई है। जिसमें सबका कहना है कि इस वीडियो को देखने के बाद कानूनी एक्शन की जरूरत है। AI के वॉइस माड्यूलेशन के साथ ही अब प्रमुख रुप से डीपफेक का प्रयोग किया जाने लगा है।
क्या है डीपफेक?

A I के एक रुप डीपफेक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किसी भी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो में बदलाव किया जा सकता है। इन दिनों डीपफेक गलत सूचना का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। ये अक्सर फर्जी वायरल पोस्ट से जुड़े होते हैं। जिसे आप लोग यकीन मान लें। डीपफेक से वीडियो और फोटो को बनाया जाता है। इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है। इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद बनाया जाता है।
एआई में एल्गोरिदम और सिस्टम का विकास शामिल होता है जो अनुभव से सीख और सुधार कर सकते हैं, डेटा विश्लेषण के आधार पर निर्णय ले सकते हैं और ऐसे कार्य कर सकते हैं जिनमें तर्क, धारणा और भाषा की समझ की आवश्यकता होती है। पर अगर इसी AI का प्रोयग अगर गतल रुप में किया जाए तो यह विकास की जगह पतन की ओर अग्रसर हो जाएगा।
डीपफेक पर भारतीय सरकार का बड़ा कदम

अ ब लगातार प्रयोग किए जा रहे AI डीपफेक के खिलाफ कड़े शब्दों में अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गलत जानकारी से लड़ने के लिए उनके कानूनी राइट्स याद ऱखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अप्रैल, 2023 में अधिसूचित आईटी नियमों के तहत, प्लेटफॉर्म्स के लिए यह सुनिश्चित करना कानूनी जिम्मेदारी है कि किसी भी यूजर द्वारा कोई गलत सूचना पोस्ट न की जाए। किसी भी यूजर या सरकार द्वारा रिपोर्ट किए जाने पर उसे हटा दिया जाए। आईटी मंत्री ने कहा कि अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अगर इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो उनको भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत कोर्ट ले जाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "डीप फेक गलत सूचना का नया और उससे भी ज्यादा खतरनाक और हानिकारक रूप है, प्लेटफार्म्स को इससे निपटने की जरूरत है।"
लगातार बड़े पैमाने पर हो रहे AI के प्रयोग से इंसान के लिए काम कम हो जाएंगे। इंसान की बजाय मशीनों को काम में लिया जाएगा जिसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। मशीन स्वयं ही निर्णय लेने लगेंगी और अगर उस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो वह मानव सभ्यता के साथ कार्यप्रणाली के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
सात्विक उपाध्याय
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