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बिहार के देव सूर्य नगरी में चैती छठ के अवसर पर अभूतपूर्व जनसैलाब,सात लाख श्रद्धालुओं की आने का रिकॉर्ड

Unprecedented crowds gathered in the Sun City of Bihar on the occasion of Chaitra Chhath, with a record number of seven lakh devotees arriving

पटना, बिहार : महान लोक आस्था और श्रद्धा एवं विश्वास का महापर्व चैती छठ के अवसर पर बिहार प्रदेश के औरंगाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक सूर्यनगरी देव में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा ।  इस बीच जिधर भी नजर पड़ी वहीं जनसैलाब नजर आया ।हर तरफ केवल छठ व्रती और उनके परिजन ही दिखाई दे रहे हैं। अपनी अक्षुण्ण गरिमा और पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध सूर्यकुण्ड के चारों ओर पैर रखने भर की भी जगह शेष नहीं बची । आलम यह रहा कि पवित्र सरोवर में स्नान और भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों को अपनी बारी का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

इस बीच औरंगाबाद के जिलाधिकारी  अभिलाषा शर्मा और पुलिस कप्तान अंबरीष राहुल ने भी अस्ताचलगामी एवं उदयचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया।इस बीच औरंगाबाद प्रशासनिक आंकड़ों और स्थानीय अनुमान के मुताबिक इस मौके पर सूर्य नगरी देव में लगभग सात लाख से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे ।इस बीच लाखों की इस भारी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है।

ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्यनगरी देव का विशेष महत्व है, क्योंकि यहाँ भगवान भास्कर का त्रेतायुगीन प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका पश्चिम की ओर स्थित द्वार है, जो वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ भगवान सूर्य की आराधना करता है और सूर्यकुण्ड में पवित्र स्नान कर अर्घ्य प्रदान करता है, छठी मईया और भगवान भास्कर उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं।

आपको जानकारी दे दें कि विशेषकर चर्म रोगों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष चैती और कार्तिक छठ के मौके पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं और चार दिवसीय कठिन अनुष्ठान कर खुद को धन्य समझते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन द्वारा जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम गृह की व्यवस्था की गई है, ताकि दूर-दराज से आए लोगों को कठिनाई न हो।

चार दिवसीय यह धार्मिक अनुष्ठान नहाय खाय से लेकर खरना उसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने और उसके बाद आज उष्षा का में उदयाचलगामी  भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यह महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान खत्म हो गया है। वहीं अब श्रद्धालुओं ने अपने अपने घर परिवार की ओर लौटने लगे हैं।इस बीच चार दिनों तक पूरा  सूर्य नगरी देव 'जय छठी मैयाऔर भगवान भास्कर की जय के जयकारों से गूँजता रहा । आज सुबह उदयगामी सूर्य को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिवसीय महापर्व का समापन हो गया।  इस बीच जिला प्रशासन प्रशासन ने  छत्तीस घंटों के लिए पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर रखा था ताकि शांतिपूर्ण तरीके से पर्व संपन्न कराया जा सके।इस महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

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