नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है. केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है. इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं. इसके साथ ही अब 11 शास्त्रीय भाषाएं हो जाएंगी.
पहले किन भाषाओं को मिला था दर्जा
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है. दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को "शास्त्रीय भाषाओं" के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था. सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे. इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा.
बता दें कि शास्त्रीय भाषाएं के माध्यम से भारत की गहन और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षण का काम किया जाता है. ये भाषाएं प्रत्येक समुदाय के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के मील के पत्थर का सार है.
पीएम मोदी ने दी बधाई
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मराठी भारत का गौरव है. इस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर बधाई. यह सम्मान हमारे देश के इतिहास में मराठी के समृद्ध सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देता है. मराठी हमेशा से भारतीय विरासत का आधार रही है. मुझे यकीन है कि शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से और भी अधिक लोग इसे सीखने के लिए प्रेरित होंगे."
Marathi is India’s pride.
— Narendra Modi (@narendramodi) October 3, 2024
Congratulations on this phenomenal language being accorded the status of a Classical Language. This honour acknowledges the rich cultural contribution of Marathi in our nation’s history. Marathi has always been a cornerstone of Indian heritage.
I am…
दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मुझे बहुत खुशी है कि महान बंगाली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है, खासकर दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर. बंगाली साहित्य ने वर्षों से अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है. मैं इसके लिए दुनिया भर के सभी बंगाली भाषियों को बधाई देता हूं."
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